MSCI Rebalancing: भारतीय शेयर बाजार में आज MSCI की रीबैलेंसिंग होने जा रही है। खास बात यह है कि यह Closing Auction Session (CAS) लागू होने के बाद होने वाली पहली बड़ी MSCI पैसिव रीबैलेंसिंग है। ऐसे में बाजार की नजर खास तौर पर आखिरी कारोबारी मिनटों पर रहेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिन के अंतिम चरण में कुछ शेयरों में खरीदारी और बिकवाली बढ़ने से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
MSCI इंडेक्स में होने वाले बदलावों के तहत लॉरस लैब्स, लेंसकार्ट, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो को शामिल किया जाएगा। वहीं बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, SBI कार्ड्स और एस्ट्रल इंडेक्स से बाहर होंगे। इसके अलावा MSCI में भारत के वेटेज में भी मामूली बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
CAS लागू होने के बाद पहली MSCI रीबैलेंसिंग
MSCI की यह रीबैलेंसिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नए CAS सिस्टम के लागू होने के बाद पहली MSCI पैसिव रीबैलेंसिंग है। इसका असर खासतौर पर उन फंड्स पर पड़ सकता है जो MSCI इंडेक्स को ट्रैक करते हैं।
पहले क्लोजिंग के आसपास VWAP आधारित ट्रेडिंग के कारण पैसिव फंड्स को अपने बेंचमार्क के अनुरूप पोर्टफोलियो एडजस्ट करने में ट्रैकिंग एरर का सामना करना पड़ सकता था। CAS को इसी तरह के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
CAS में दिन के अंत में एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस के जरिए क्लोजिंग प्राइस तय होता है। ऐसे में पैसिव फंड्स अपनी बड़ी खरीदारी या बिकवाली को निर्धारित ऑर्डर विंडो के दौरान पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं।
आखिरी 15-20 मिनट क्यों हैं महत्वपूर्ण?
MSCI रीबैलेंसिंग के दिन बाजार में सबसे ज्यादा नजर कारोबार के अंतिम हिस्से पर रहेगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पैसिव फंड्स की ओर से 3:20 PM से 3:28 PM के बीच बड़े ऑर्डर आने की संभावना है।
इसके बाद 3:28 PM से 3:30 PM के बीच ऑर्डर विंडो बंद हो सकती है। फिर 3:30 PM से 3:35 PM के दौरान ऑर्डर मैचिंग और क्लोजिंग प्राइस डिस्कवरी की प्रक्रिया होगी।
इस वजह से दिन के आखिरी हिस्से में इंडेक्स से जुड़े शेयरों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एक्सपर्ट्स की नजर में क्या है जोखिम?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक कैश सेगमेंट के सामान्य शेयरों में कारोबार पर बहुत बड़ा असर जरूरी नहीं है। हालांकि, जिन कैश शेयरों में फ्यूचर्स कारोबार होता है, उनमें अस्थिरता अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दे सकती है।
पैसिव फंड्स की ओर से 3:15 PM तक भी खरीदारी देखने को मिल सकती है। हालांकि, अगर फंड्स इस दौरान बड़े पैमाने पर ट्रेड करते हैं तो बेंचमार्क के मुकाबले ट्रैकिंग एरर का जोखिम बढ़ सकता है।
वहीं, 3:20 PM के बाद ऑर्डर विंडो में ट्रेडिंग का दबाव बढ़ सकता है। इस दौरान उपलब्ध लिक्विडिटी के मुकाबले बड़े संस्थागत ऑर्डर आने पर कुछ शेयरों की कीमतों में तेज मूवमेंट संभव है।
लिक्विडिटी पर पड़ सकता है असर
MSCI रीबैलेंसिंग के दौरान सबसे बड़ी चिंता लिक्विडिटी को लेकर है। बाजार के अंतिम मिनटों में बड़े पैमाने पर पैसिव फंड्स के ऑर्डर आने से कुछ शेयरों में खरीदारी या बिकवाली का दबाव अचानक बढ़ सकता है।
अगर बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी नहीं रही तो बड़े ऑर्डर को मौजूदा कीमत के आसपास पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इससे ट्रैकिंग एरर का जोखिम भी बढ़ सकता है।
इसी वजह से कुछ पैसिव फंड्स रीबैलेंसिंग के पूरे प्रभाव को एक ही दिन में समायोजित करने के बजाय अगले कारोबारी दिन भी कुछ सौदे कर सकते हैं।
बाजार में पहले से बना हुआ है दबाव
MSCI रीबैलेंसिंग ऐसे समय हो रही है जब भारतीय शेयर बाजार पहले से ही दबाव में है। US-ईरान तनाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट प्रभावित हुआ है।
भारतीय बाजार में शुरुआती कमजोरी के बाद कुछ रिकवरी जरूर देखने को मिली, लेकिन निफ्टी अभी भी करीब 100 अंक नीचे कारोबार कर रहा है और 24,000 के स्तर को बचाने की कोशिश कर रहा है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा दिखाई दे रहा है। वहीं India VIX करीब 5 फीसदी ऊपर है, जो बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता की ओर संकेत करता है। कच्चे तेल की कीमत भी करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
अदाणी ग्रुप के शेयरों में तेज गिरावट
बाजार की कमजोरी के बीच अदाणी ग्रुप के शेयरों में भी तेज बिकवाली देखने को मिली। अदाणी एंटरप्राइजेज करीब 6 फीसदी गिरकर निफ्टी का टॉप लूजर बना हुआ है।
इसके अलावा अदाणी पोर्ट्स, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और अदाणी ग्रीन एनर्जी समेत ग्रुप के अन्य शेयरों में भी करीब 2-4 फीसदी तक की कमजोरी दिखाई दी।
MSCI रीबैलेंसिंग में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शामिल होने के कारण इस शेयर पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।
मेटल शेयरों में भी दबाव
मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर मेटल शेयरों पर भी पड़ा है। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2 फीसदी कमजोर नजर आया।
NALCO, वेदांता, टाटा स्टील और हिंडाल्को जैसे प्रमुख मेटल शेयरों में करीब 2-4 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली।
मेटल सेक्टर के बाद कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। इस इंडेक्स में करीब 1.5 फीसदी की कमजोरी रही। Angel One और BSE जैसे शेयरों में करीब 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
IT और दूसरे सेक्टर भी दबाव में
बाजार की व्यापक कमजोरी का असर IT शेयरों पर भी पड़ा। Infosys और Wipro निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में शामिल रहे।
इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस, PSU बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी बिकवाली देखने को मिली।
हालांकि, बाजार के सभी सेक्टर लाल निशान में नहीं रहे। DAM Capital की बुलिश रिपोर्ट के बाद शुगर कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बलरामपुर चीनी का शेयर करीब 12 फीसदी ऊपर पहुंच गया, जबकि अन्य शुगर शेयरों में भी 5 फीसदी तक की तेजी रही।
HDFC Bank पर भी बाजार की नजर
इस बीच HDFC Bank को लेकर भी बाजार में चर्चा तेज है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के नए MD और CEO के लिए SBI के पूर्व चेयरमैन दिनेश खारा के नाम पर विचार किया जा रहा है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि HDFC Bank का बोर्ड SBI के दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के नामों पर भी विचार कर सकता है। CNBC-TV18 की इस खबर के बाद HDFC Bank का शेयर दिन के उच्च स्तर से करीब 3 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।
निवेशकों के लिए आज क्या मायने रखता है?
MSCI रीबैलेंसिंग और CAS का कॉम्बिनेशन आज बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि रीबैलेंसिंग अपने आप में बाजार की दिशा तय नहीं करती, लेकिन इंडेक्स में शामिल और बाहर होने वाले शेयरों में पैसिव फंड्स के ऑर्डर से शॉर्ट टर्म में तेज मूवमेंट जरूर हो सकता है।
इसलिए निवेशकों को खास तौर पर 3:15 PM के बाद और 3:30 PM के आसपास शेयरों में अचानक आने वाले वॉल्यूम और कीमतों के उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क रहना चाहिए। किसी शेयर में तेज तेजी या गिरावट केवल उसके फंडामेंटल बदलाव का संकेत नहीं हो सकती, बल्कि MSCI रीबैलेंसिंग से जुड़े संस्थागत ऑर्डर का असर भी हो सकता है।


