सरकार 5% तक हिस्सेदारी बेचेगी, ₹1400 प्रति शेयर रखा न्यूनतम भाव; शेयर 4% से ज्यादा फिसला
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के विनिवेश अभियान के तहत मिनीरत्न कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में हिस्सेदारी बिक्री के ऐलान के बाद मंगलवार को कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए कंपनी में 5% तक हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इस घोषणा के बाद शेयर शुरुआती कारोबार में करीब 4.5% तक टूट गया।
सरकार ने OFS के लिए ₹1,400 प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया है, जो पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव से लगभग 7% कम है। इसी वजह से बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
प्रमुख बातें
- सरकार कोचीन शिपयार्ड में 5% तक हिस्सेदारी OFS के जरिए बेचेगी
- ₹1,400 प्रति शेयर तय किया गया फ्लोर प्राइस
- शेयर में शुरुआती कारोबार में 4% से अधिक गिरावट
- चालू वित्त वर्ष में सरकार का ₹80,000 करोड़ विनिवेश लक्ष्य
शेयर में क्यों आई गिरावट?
बीएसई पर कोचीन शिपयार्ड का शेयर सोमवार को ₹1,504.75 पर बंद हुआ था। मंगलवार को यह ₹1,454.80 पर खुला और कारोबार के दौरान ₹1,438 तक फिसल गया। सुबह करीब 9:45 बजे शेयर लगभग 4.30% की गिरावट के साथ ₹1,440 के आसपास कारोबार कर रहा था।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, OFS का फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार भाव से कम होने के कारण निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे शेयर पर दबाव देखने को मिला।
OFS में कौन और कब कर सकता है आवेदन?
सरकार के अनुसार, OFS के तहत:
- 7 जुलाई को गैर-रिटेल (संस्थागत) निवेशकों के लिए ऑफर खुला।
- 8 जुलाई को रिटेल निवेशक बोली लगा सकेंगे।
- शुरुआती चरण में 2.52% हिस्सेदारी बेची जाएगी।
- यदि मांग अधिक रही तो ग्रीन-शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 2.52% हिस्सेदारी भी बेची जा सकती है।
सरकार की कितनी हिस्सेदारी है?
फिलहाल केंद्र सरकार के पास कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में 67.91% हिस्सेदारी है। इस OFS के बाद सरकार की हिस्सेदारी में कमी आएगी, जबकि कंपनी में उसकी नियंत्रण हिस्सेदारी बनी रहेगी।
विनिवेश से ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण के जरिए ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है।
अब तक सरकार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जीआईसी और आईआरएफसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में OFS के माध्यम से ₹18,561 करोड़ जुटा चुकी है। कोचीन शिपयार्ड का यह OFS उसी रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
OFS के कारण अल्पावधि में शेयर पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि फ्लोर प्राइस बाजार मूल्य से कम है। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशक कंपनी के ऑर्डर बुक, रक्षा एवं शिपबिल्डिंग सेक्टर में संभावनाओं और सरकारी नीतियों को ध्यान में रखकर निर्णय ले सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


