पश्चिम एशिया में पैदा हुए एलपीजी सप्लाई संकट ने भारत में सिर्फ ईंधन की उपलब्धता को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि लोगों की खाना बनाने की आदतों में भी बड़ा बदलाव ला दिया। संकट के दौरान गैस सिलेंडर की अनिश्चित सप्लाई ने लाखों परिवारों को इंडक्शन कुकिंग की ओर रुख करने पर मजबूर किया। अब जब एलपीजी की सप्लाई सामान्य हो रही है, तब भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता इंडक्शन कुकटॉप को अपनी रसोई का स्थायी हिस्सा बना रहे हैं।
एलपीजी के साथ बढ़ा हाइब्रिड कुकिंग का चलन
नई दिल्ली: पहले जहां अधिकांश घरों में खाना बनाने का एकमात्र साधन एलपीजी सिलेंडर था, वहीं अब लोग गैस और इंडक्शन कुकटॉप दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंडस्ट्री का कहना है कि उपभोक्ता अब इंडक्शन को केवल गैस का विकल्प नहीं, बल्कि एक सुविधाजनक और आधुनिक कुकिंग सिस्टम के रूप में देख रहे हैं।
घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर तिमाही के लिए इंडक्शन कुकटॉप की मांग पिछले साल के मुकाबले कम से कम दोगुनी हो गई है। यही वजह है कि कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुटी हुई हैं।
40 लाख से 70 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है मांग
इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में करीब 40 लाख इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री हुई थी। वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 लाख यूनिट तक पहुंचने की संभावना है। बढ़ती मांग के चलते मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर ऑर्डर का भारी दबाव है।
एक साल में तीन गुना बढ़े ब्रांड्स
इंडक्शन कुकटॉप बाजार में प्रतिस्पर्धा भी तेजी से बढ़ी है। जहां एक साल पहले इस सेगमेंट में करीब 60 से 70 ब्रांड्स सक्रिय थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 240 से अधिक हो चुकी है।
कई नई कंपनियां इस बाजार में उतर रही हैं, जबकि प्रीमियम ब्रांड्स भी हाई-एंड इंडक्शन कुकटॉप लॉन्च कर रहे हैं। शहरी और उच्च आय वर्ग के परिवारों में आधुनिक किचन के लिए इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
Epack Durable ने बताया बढ़ी मांग का कारण
Epack Durable के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय डीडी सिंघानिया के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए इंडक्शन कुकटॉप के ऑर्डर रिकॉर्ड स्तर पर हैं और उत्पादन पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब उपभोक्ता इंडक्शन कुकटॉप को केवल आपातकालीन विकल्प नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कुकिंग के लिए भी खरीद रहे हैं।
प्रीमियम कंपनियां भी उतरीं मैदान में
बढ़ती मांग को देखते हुए प्रीमियम होम अप्लायंस कंपनियां भी इस सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही हैं। जर्मन कंपनी BSH इंडिया अपने Bosch ब्रांड के तहत इंडक्शन कुकटॉप बाजार में उतर रही है।
कंपनी के अनुसार, कई ग्राहक अपने किचन में बैकअप कुकिंग सिस्टम के तौर पर इंडक्शन कुकटॉप खरीद रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गैस सप्लाई बाधित होने पर परेशानी न हो।
संकट के दौरान खत्म हो गया था स्टॉक
ईरान युद्ध के दौरान एलपीजी सप्लाई प्रभावित होने से इंडक्शन कुकटॉप की मांग अचानक बढ़ गई थी। कई शहरों में रिटेल दुकानों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर स्टॉक पूरी तरह खत्म हो गया था।
स्थिति को देखते हुए सरकार ने भी कंपनियों से उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने के लिए सुझाव मांगे थे।
कमर्शियल किचन में भी बढ़ावा
सरकार अब होटल, रेस्तरां और अन्य कमर्शियल किचन में भी इंडक्शन कुकिंग को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इससे ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या है तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रसोई में हाइब्रिड कुकिंग मॉडल तेजी से लोकप्रिय होगा। एलपीजी और इंडक्शन दोनों का संयुक्त इस्तेमाल न केवल सुविधा बढ़ाएगा बल्कि किसी भी सप्लाई संकट के दौरान खाना बनाने की समस्या से भी राहत दिलाएगा। इंडक्शन कुकटॉप की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता अब आधुनिक, सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल कुकिंग विकल्पों को तेजी से अपना रहे हैं।


