Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 27 अगस्त को एक बार फिर दबाव देखने को मिला। BSE की मंथली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली, ग्लोबल बाजारों से मिले-जुले संकेत, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा पर असर डाला। हालांकि, फार्मा और डिफेंस से जुड़े कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 539 अंक यानी 0.70 फीसदी गिरकर 76,933.59 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 117 अंक यानी 0.48 फीसदी की गिरावट रही और यह 24,090.85 पर बंद हुआ। व्यापक बाजार में भी हल्का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स 0.10 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स 0.12 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार में क्यों आई गिरावट?
गुरुवार के कारोबारी सत्र में बाजार पर कई फैक्टर्स का असर रहा। सबसे बड़ा दबाव मंथली एक्सपायरी से जुड़ी उठापटक और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का रहा। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण है।
तेल की कीमतों में तेजी से भारत के लिए आयात बिल बढ़ने का दबाव बन सकता है। इसका असर महंगाई, कंपनियों की लागत और रुपये की चाल पर भी पड़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम लेने से बचते हुए चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी करना पसंद कर सकते हैं।
हालांकि, बाजार में पूरी तरह बिकवाली का माहौल नहीं रहा। फार्मा, हेल्थकेयर और डिफेंस से जुड़े कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक मौजूदा अनिश्चितता के बीच भी मजबूत सेक्टर और कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं।
140 से ज्यादा शेयरों ने छुआ 52-हफ्ते का हाई
बाजार में गिरावट के बावजूद कई शेयरों में मजबूती देखने को मिली। वेल्सपन कॉर्प, HFCL, सोलर इंडस्ट्रीज, जिंदल सॉ, एंथम बायोसाइंसेज, एथर इंडस्ट्रीज, लॉरस लैब्स, ग्लेनमार्क फार्मा, डिविस लैबोरेटरीज, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्यूटिकल्स और JSW स्टील समेत 140 से ज्यादा शेयरों ने अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर को छुआ।
यह आंकड़ा बताता है कि प्रमुख इंडेक्स में गिरावट के बावजूद बाजार के कुछ हिस्सों में स्टॉक स्पेसिफिक खरीदारी जारी है। खासकर मजबूत फंडामेंटल, बेहतर कमाई की संभावना और घरेलू मांग से जुड़े शेयर निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
शॉर्ट टर्म में दायरे में रह सकता है बाजार
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, एक्सपायरी से जुड़ी अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता की कमी के कारण शॉर्ट टर्म में बाजार एक दायरे में कारोबार कर सकता है।
हालांकि, कंपनियों की कमाई के अनुमानों में ऊंची एनर्जी कीमतों के असर को काफी हद तक शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा, हाल में कच्चे तेल की कीमतों और लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड में आई नरमी महंगाई के आउटलुक के लिए कुछ राहत दे सकती है।
वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां और कंपनियों की कमाई में मजबूती भारतीय इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक फैक्टर बने हुए हैं। खासकर मिडकैप सेगमेंट के कुछ हिस्से ग्लोबल अनिश्चितताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं और मजबूत घरेलू मांग का फायदा उठा रहे हैं।
निवेशकों की नजर जैक्सन होल भाषण पर
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के जैक्सन होल भाषण पर भी रहेगी। निवेशक यह जानने की कोशिश करेंगे कि महंगाई, ब्याज दरों और आने वाली मौद्रिक नीति को लेकर फेड का रुख क्या हो सकता है।
फेड की ओर से मिलने वाले संकेतों का असर अमेरिकी बाजारों के साथ-साथ ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा, उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसलिए 28 अगस्त को घरेलू बाजार के लिए ग्लोबल संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे।
28 अगस्त को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल?
तकनीकी संकेतों के आधार पर शुक्रवार, 28 अगस्त को बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी के लिए कुछ अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल बने हुए हैं, जिनके आसपास बाजार की अगली दिशा तय हो सकती है।
निफ्टी में कमजोरी के संकेत
LKP Securities के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी डेली टाइमफ्रेम पर अपने ‘राइजिंग चैनल’ के नीचे आ गया है। इसे बाजार में बढ़ती कमजोरी का संकेत माना जा रहा है।
इसके अलावा, इंडेक्स 50-EMA के नीचे फिसल गया है, जिससे कमजोर होते ट्रेंड की पुष्टि होती है। डेली RSI भी अपनी राइजिंग ट्रेंडलाइन के नीचे आ गया है। इससे बाजार के मोमेंटम में कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं।
रूपक डे के मुताबिक, अगर कमजोरी आगे भी जारी रहती है तो निफ्टी 23,900 और उससे नीचे के स्तरों की ओर जा सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ 24,200 और 24,350 के स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकते हैं।
इसका मतलब है कि 28 अगस्त के सत्र में निफ्टी के लिए 24,200 के ऊपर टिकना काफी अहम होगा। अगर इंडेक्स इस स्तर को मजबूती से पार करता है तो बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है। इसके उलट 24,000 के नीचे कमजोरी बढ़ने पर बिकवाली का दबाव तेज हो सकता है।
सेंसेक्स के लिए 77,000 का स्तर अहम
Kotak Securities के हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान के अनुसार, बेंचमार्क इंडेक्स में ऊंचे स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। निफ्टी 117 अंक और सेंसेक्स 539 अंक की गिरावट के साथ बंद हुए।
सेक्टरों की बात करें तो चुनिंदा फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में इंट्राडे खरीदारी देखने को मिली, जबकि कैपिटल मार्केट इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
टेक्निकल चार्ट पर बाजार ने डेली टाइमफ्रेम में एक बेयरिश कैंडल बनाया है। वहीं, इंट्राडे चार्ट पर ‘लोअर टॉप फॉर्मेशन’ भी दिखाई दे रहा है। यह संकेत शॉर्ट टर्म में बाजार की कमजोरी की ओर इशारा करता है।
24,100 के ऊपर टिकना जरूरी
श्रीकांत चौहान के मुताबिक, फिलहाल इंट्राडे बाजार का रुझान कमजोर है। हालांकि, अगर निफ्टी 24,100 के सपोर्ट और सेंसेक्स 77,000 के स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो टेक्निकल बाउंस बैक की संभावना बन सकती है।
इस स्थिति में निफ्टी दोबारा 24,250-24,300 के स्तर की ओर बढ़ सकता है, जबकि सेंसेक्स 77,500-77,700 के जोन तक रिकवरी कर सकता है।
दूसरी तरफ, अगर निफ्टी 24,000 और सेंसेक्स 76,700 के अहम सपोर्ट के नीचे फिसलते हैं, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में निफ्टी 23,900-23,850 तक और सेंसेक्स 76,500-76,200 के स्तर तक कमजोर हो सकता है।
28 अगस्त के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
| इंडेक्स | सपोर्ट | रेजिस्टेंस |
|---|---|---|
| Nifty 50 | 24,100 / 24,000 / 23,900-23,850 | 24,200 / 24,250-24,300 / 24,350 |
| Sensex | 77,000 / 76,700 / 76,500-76,200 | 77,500-77,700 |
निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर?
28 अगस्त के कारोबार में निवेशकों के लिए कुछ प्रमुख संकेत बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। सबसे पहले निफ्टी का 24,000-24,100 सपोर्ट जोन बाजार की दिशा के लिहाज से अहम होगा। इसके ऊपर इंडेक्स के टिकने पर रिकवरी की संभावना बनी रह सकती है।
दूसरी ओर, 24,000 के नीचे लगातार कमजोरी बाजार में नई बिकवाली का संकेत दे सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी बाजारों के संकेत, फेड चेयरमैन का जैक्सन होल भाषण, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर-रुपये की चाल और FII की खरीद-बिक्री भी बाजार के मूड को प्रभावित कर सकती है।
मंथली एक्सपायरी के बाद अगले कारोबारी सत्र में डेरिवेटिव पोजीशन के एडजस्टमेंट से भी कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को केवल एक स्तर के आधार पर फैसला लेने के बजाय बाजार के वॉल्यूम, सेक्टर रोटेशन और ग्लोबल संकेतों पर भी नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 28 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार होने की संभावना है। तकनीकी संकेत फिलहाल निफ्टी और सेंसेक्स में कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। निफ्टी के लिए 24,000-24,100 और सेंसेक्स के लिए 77,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।
अगर ये सपोर्ट जोन कायम रहते हैं तो बाजार में टेक्निकल बाउंस बैक देखने को मिल सकता है। वहीं, इनके टूटने पर निफ्टी 23,900-23,850 और सेंसेक्स 76,500-76,200 की ओर फिसल सकते हैं। ऐसे में शुक्रवार के कारोबार में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
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