नई दिल्ली। भारत के उद्योग जगत का इतिहास सिर्फ टाटा और बिड़ला जैसे बड़े कारोबारी घरानों तक सीमित नहीं है। देश में एक ऐसा बुनकर परिवार भी हुआ जिसने मेहनत, दूरदर्शिता और कारोबार की समझ के दम पर इन दिग्गज समूहों को कड़ी टक्कर दी। यह कहानी है मफतलाल ग्रुप (Mafatlal Group) की, जिसकी शुरुआत एक साधारण बुनकर परिवार से हुई और जिसने आगे चलकर टेक्सटाइल, केमिकल्स, प्लास्टिक और अन्य उद्योगों में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
आज 120 साल से अधिक पुराने इस कारोबारी समूह की विरासत पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। ग्रुप की प्रमुख कंपनियां हजारों करोड़ रुपये के कारोबार के साथ देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रही हैं।
सड़क पर कपड़े बेचने से शुरू हुई थी कहानी
मफतलाल ग्रुप की नींव एक साधारण बुनकर परिवार ने रखी थी। परिवार के मुखिया मफतलाल गगलभाई का जन्म अहमदाबाद के एक बुनकर परिवार में हुआ। शुरुआती दिनों में उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर सड़क पर कपड़े बेचने का काम किया।
धीरे-धीरे कारोबार बढ़ा और उन्होंने अपनी पहली कॉटन मिल शोरॉक मिल्स (Shorrock Mills) की स्थापना की। उस दौर में भारतीय टेक्सटाइल उद्योग ब्रिटिश कंपनियों के दबदबे में था, लेकिन मफतलाल परिवार ने स्वदेशी उद्योग को मजबूत करने का लक्ष्य रखा।
तीसरी पीढ़ी ने बदली कंपनी की दिशा
ग्रुप के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब 1954 में अरविंद मफतलाल ने नेतृत्व संभाला। उन्होंने सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित रहने के बजाय कारोबार का तेजी से विस्तार किया।
उनकी अगुवाई में समूह ने कई नए क्षेत्रों में प्रवेश किया, जिनमें शामिल हैं—
- टेक्सटाइल
- स्पेशलिटी केमिकल्स
- पेट्रोकेमिकल्स
- प्लास्टिक
- आईटी
- शिक्षा (EdTech)
- हेल्थकेयर
इसी रणनीति के दम पर एक समय ऐसा भी आया जब मफतलाल ग्रुप देश का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक समूह बन गया। उस समय उससे आगे केवल टाटा और बिड़ला समूह थे।
आज भी कायम है 120 साल पुरानी विरासत
समय के साथ कई पुराने औद्योगिक घराने कमजोर पड़े, लेकिन मफतलाल ग्रुप ने खुद को बदलते दौर के हिसाब से ढाला।
आज ग्रुप का संचालन पांचवीं पीढ़ी के प्रियव्रत मफतलाल और चेयरमैन ऋषिकेश मफतलाल के नेतृत्व में किया जा रहा है।
ग्रुप की प्रमुख कंपनी मफतलाल इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड देश में स्कूल यूनिफॉर्म और कॉर्पोरेट यूनिफॉर्म की सबसे बड़ी सप्लायर कंपनियों में गिनी जाती है।
FY25 में शानदार रही कंपनी की कमाई
वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा।
मुख्य आंकड़े:
- कुल आय बढ़कर ₹2,845.3 करोड़ पहुंची।
- आय में सालाना करीब 33% की वृद्धि दर्ज की गई।
- टेक्सटाइल कारोबार के साथ-साथ नए बिजनेस से भी अच्छी ग्रोथ मिली।
NOCIL के जरिए केमिकल सेक्टर में मजबूत पकड़
मफतलाल ग्रुप की सबसे चर्चित कंपनियों में NOCIL भी शामिल है।
यह कंपनी रबर केमिकल्स और स्पेशलिटी केमिकल्स बनाने वाली भारत की अग्रणी कंपनियों में गिनी जाती है। ऑटोमोबाइल, टायर और औद्योगिक सेक्टर में इसके उत्पादों की बड़ी मांग रहती है।
कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹3,000 करोड़ के आसपास है और यह भारतीय स्पेशलिटी केमिकल उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
बदलते समय के साथ बदला बिजनेस मॉडल
जहां कभी मफतलाल ग्रुप सिर्फ कपड़ा उद्योग तक सीमित था, वहीं आज उसका कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।
ग्रुप के प्रमुख बिजनेस सेक्टर:
- टेक्सटाइल
- स्पेशलिटी केमिकल्स
- रबर केमिकल्स
- प्लास्टिक
- एड-टेक
- हेल्थकेयर
इसी विविधीकरण ने समूह को 120 वर्षों तक प्रतिस्पर्धा में बनाए रखा।
मेहनत, दूरदर्शिता और बदलाव से बनी सफलता की मिसाल
मफतलाल ग्रुप की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों से शुरू हुआ कारोबार भी सही नेतृत्व, जोखिम लेने की क्षमता और समय के साथ बदलाव अपनाकर बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
सड़क पर कपड़ा बेचने वाले एक साधारण बुनकर परिवार से शुरू हुआ यह सफर आज हजारों करोड़ रुपये के औद्योगिक समूह में बदल चुका है। भारतीय उद्योग जगत के इतिहास में मफतलाल परिवार का योगदान हमेशा एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में याद किया जाएगा.


