नई दिल्ली। आमतौर पर जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (Foreign Portfolio Investors-FPI) भारतीय शेयर बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकालते हैं तो बाजार पर दबाव बढ़ जाता है। पहले ऐसा कई बार देखने को मिला है कि विदेशी बिकवाली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई। लेकिन पिछले दो वर्षों में तस्वीर कुछ अलग रही है। विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की, इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली।
अब वैश्विक निवेश बैंक जेपी मॉर्गन (JP Morgan) की ताजा रिपोर्ट ने इसकी असली वजह बताई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हुए टैक्स सुधार, नियामकीय बदलाव और घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने शेयर बाजार को मजबूती दी है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।
घरेलू निवेशकों ने संभाली बाजार की कमान
जेपी मॉर्गन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 और 2026 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में अपना निवेश कम किया। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों ने निवेश जारी रखा।
विशेष रूप से म्यूचुअल फंड के जरिए होने वाले सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में लगातार रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला। हर महीने लाखों नए निवेशक SIP के माध्यम से बाजार में पैसा लगा रहे हैं, जिससे इक्विटी मार्केट में लगातार नई पूंजी आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भारतीय निवेशक बाजार में गिरावट आने पर निवेश रोक देते थे, लेकिन अब निवेश का व्यवहार बदल चुका है। अब बड़ी संख्या में निवेशक नियमित SIP को लंबी अवधि की रणनीति के रूप में अपना रहे हैं।
टैक्स सुधारों ने इक्विटी को बनाया ज्यादा आकर्षक
जेपी मॉर्गन का कहना है कि सरकार द्वारा किए गए कई टैक्स बदलावों ने इक्विटी निवेश को अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में अधिक आकर्षक बना दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में इक्विटी निवेश पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लागू है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने कई अन्य निवेश विकल्पों के टैक्स नियमों में बदलाव किए हैं।
इनमें प्रमुख बदलाव शामिल हैं—
- डेट म्यूचुअल फंड में इंडेक्सेशन बेनिफिट समाप्त करना।
- कुछ हाई-वैल्यू इंश्योरेंस पॉलिसियों की मैच्योरिटी राशि पर टैक्स लागू करना।
- डेट फंड पर स्लैब के अनुसार टैक्स व्यवस्था लागू करना।
इन बदलावों के बाद निवेशकों के लिए इक्विटी अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक निवेश विकल्प बनकर उभरी है।
भारतीय परिवारों की बचत अब शेयर बाजार की ओर
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय परिवारों की बचत का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले अधिकांश निवेश फिक्स्ड डिपॉजिट, सोना, रियल एस्टेट और पारंपरिक बचत योजनाओं में होता था, लेकिन अब बड़ी मात्रा में पैसा वित्तीय परिसंपत्तियों (Financial Assets) की ओर जा रहा है।
म्यूचुअल फंड, इक्विटी और SIP जैसे विकल्पों ने छोटे निवेशकों को भी शेयर बाजार से जोड़ दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन ब्रोकिंग और निवेश संबंधी जागरूकता बढ़ने से यह बदलाव और तेज हुआ है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर क्यों कम हुआ?
पहले भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के मूड पर काफी निर्भर रहता था। जैसे ही FPI बिकवाली करते थे, बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिलती थी।
लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
जेपी मॉर्गन का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII), म्यूचुअल फंड और रिटेल निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।
यही कारण है कि हाल के वर्षों में विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा।
SIP बना भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा सहारा
बीते कुछ वर्षों में SIP निवेश लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। हर महीने लाखों निवेशक म्यूचुअल फंड के जरिए नियमित निवेश कर रहे हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि बाजार में लगातार नकदी आती रही। जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की, तब घरेलू निवेशकों का यही पैसा बाजार के लिए मजबूत आधार बना।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर SIP का यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है तो भारतीय शेयर बाजार की स्थिरता और मजबूत हो सकती है।
क्या आगे भी मजबूत रहेगा बाजार?
जेपी मॉर्गन का मानना है कि यदि वर्तमान टैक्स ढांचा और निवेशकों की भागीदारी इसी तरह बनी रहती है तो आने वाले वर्षों में भी भारतीय शेयर बाजार को घरेलू निवेशकों का मजबूत समर्थन मिलता रहेगा।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार की दिशा को प्रभावित करती रहेंगी।
आईटी सेक्टर को लेकर जताई चिंता
रिपोर्ट में भारतीय आईटी सेक्टर को लेकर सतर्कता भी जताई गई है।
जेपी मॉर्गन का कहना है कि आने वाले समय में आईटी कंपनियों को धीमी ग्रोथ का सामना करना पड़ सकता है। इसकी दो प्रमुख वजहें बताई गई हैं—
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में तेजी से हो रहे बदलाव।
- वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता।
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां नई आईटी परियोजनाओं पर खर्च करने में सावधानी बरत रही हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की आय वृद्धि पर दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय शेयर बाजार अब पहले की तुलना में अधिक परिपक्व हो चुका है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली अब बाजार को पहले जैसी बड़ी चोट नहीं पहुंचा पा रही है क्योंकि घरेलू निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में जोखिम खत्म हो गया है। निवेशकों को लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और केवल बाजार की अल्पकालिक तेजी या गिरावट देखकर निवेश निर्णय नहीं लेना चाहिए।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां विदेशी निवेशकों का पैसा बाजार की दिशा तय करता था, वहीं अब घरेलू निवेशक भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। SIP निवेश, टैक्स सुधार और वित्तीय बचत की बदलती आदतों ने बाजार को नई मजबूती दी है। हालांकि वैश्विक चुनौतियां और आईटी सेक्टर की सुस्ती जैसी चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन लंबी अवधि के नजरिए से घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।


