Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 13 अगस्त को कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। ज्यादातर एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में नजर आए। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 250 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 फिसलकर 24,300 के करीब पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग शेयरों में देखने को मिला।
इससे पहले बुधवार, 12 अगस्त को सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24 फीसदी की गिरावट के साथ 77,966.35 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 50 भी 35.75 अंक यानी 0.15 फीसदी फिसलकर 24,435.95 पर बंद हुआ था। ऐसे में गुरुवार को बाजार की शुरुआत एक बार फिर कमजोर रहने से निवेशकों की चिंता बढ़ी।
सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 159.82 अंक यानी 0.20 फीसदी की गिरावट के साथ 77,806.53 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 में 90.25 अंक यानी 0.37 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,345.70 के करीब पहुंच गया। इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 256.72 अंक तक टूटकर 77,709.63 और निफ्टी 119.65 अंक फिसलकर 24,316.30 के स्तर तक पहुंच गया।
बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 पर भी बिकवाली का दबाव दिखाई दिया, हालांकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 हरे निशान में कारोबार करता नजर आया। सेक्टोरल स्तर पर बैंकिंग शेयरों की कमजोरी ने बाजार पर खासा दबाव बनाया।
Share Market Crash: बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजह
1. महंगाई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजहों में जुलाई की महंगाई के आंकड़े शामिल हैं। जुलाई में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45 फीसदी हो गई, जो जून के 4.38 फीसदी के मुकाबले ज्यादा है। इसके साथ ही महंगाई लगातार चौथे महीने बढ़ी है।
महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के 2-4 फीसदी के टारगेट रेंज से ऊपर बनी हुई है। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी कुल महंगाई को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई है।
महंगाई के आंकड़े बाजार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अगर कीमतों का दबाव लगातार बना रहता है तो ब्याज दरों में कटौती को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने महंगाई के आंकड़ों के बाद सतर्क रुख अपनाया।
2. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की बिकवाली का है। बुधवार, 12 अगस्त को विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹1,002.50 करोड़ की नेट बिकवाली की।
जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में भारतीय शेयर बेचते हैं तो बाजार में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट दोनों प्रभावित होते हैं। खासतौर पर बड़े और लार्ज-कैप शेयरों में बिकवाली का असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स पर तेजी से दिखाई देता है।
पिछले कारोबारी सत्र की बिकवाली का असर गुरुवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। घरेलू निवेशकों के बीच भी मौजूदा स्तरों पर सतर्कता बढ़ी है, जिसके कारण बाजार में खरीदारी का मजबूत सपोर्ट नजर नहीं आया।
3. बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग सेक्टर बाजार की कमजोरी का एक बड़ा कारण बना। सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
निफ्टी के बैंकिंग से जुड़े इंडेक्स में आधे फीसदी से ज्यादा की कमजोरी दिखाई दी। बैंकिंग शेयरों का बाजार के प्रमुख इंडेक्स में काफी वजन होने के कारण इस सेक्टर की गिरावट का सीधा असर निफ्टी और सेंसेक्स पर पड़ता है।
इसके अलावा निफ्टी मेटल और निफ्टी फार्मा इंडेक्स में भी करीब आधे फीसदी की कमजोरी देखने को मिली। दूसरी तरफ निफ्टी ऑटो हरे निशान में था, लेकिन इसमें भी बढ़त आधे फीसदी से कम रही।
इससे संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर खरीदारी का उत्साह फिलहाल मजबूत नहीं है और निवेशक चुनिंदा शेयरों में ही पोजिशन लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
4. Sensex की वीकली एक्सपायरी का दबाव
गुरुवार को सेंसेक्स के इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी भी है। एक्सपायरी के दिन बाजार में अक्सर उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, क्योंकि ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशक अपनी डेरिवेटिव पोजिशन को एडजस्ट करते हैं।
इस दौरान इंडेक्स में तेज मूवमेंट देखने को मिल सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में सुबह के कारोबार के दौरान आई कमजोरी के पीछे एक्सपायरी से जुड़ी गतिविधियां भी एक कारण मानी जा रही हैं।
हालांकि सिर्फ एक्सपायरी को बाजार की गिरावट की वजह मानना सही नहीं होगा। मौजूदा कमजोरी में महंगाई के आंकड़े, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बैंकिंग शेयरों में दबाव जैसे कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं।
एशियाई बाजार मजबूत, फिर भी भारतीय बाजार क्यों कमजोर?
गुरुवार को कई एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद भारतीय बाजार में कमजोरी देखने को मिली। इसका मतलब है कि घरेलू बाजार फिलहाल सिर्फ वैश्विक संकेतों के आधार पर कारोबार नहीं कर रहा है।
घरेलू महंगाई के आंकड़े, विदेशी निवेशकों का रुख, बैंकिंग शेयरों की चाल और डेरिवेटिव एक्सपायरी जैसे स्थानीय कारक भारतीय बाजार की दिशा पर ज्यादा असर डाल रहे हैं। यही कारण है कि एशियाई बाजारों की मजबूती के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी पर बिकवाली हावी रही।
Nifty 24,300 के करीब, आगे क्या देखना होगा?
निफ्टी 50 के 24,300 के करीब पहुंचने के बाद अब निवेशकों की नजर इस स्तर के आसपास की गतिविधियों पर रहेगी। अगर बिकवाली का दबाव जारी रहता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं, निचले स्तरों पर खरीदारी लौटती है तो इंडेक्स में रिकवरी भी संभव है।
फिलहाल बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की खरीदारी, बैंकिंग शेयरों की चाल और महंगाई से जुड़े संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों का रुख भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
कुल मिलाकर गुरुवार के शुरुआती कारोबार में भारतीय बाजार पर दबाव के पीछे कोई एक कारण नहीं है। महंगाई में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, बैंकिंग शेयरों में कमजोरी और Sensex की वीकली एक्सपायरी ने मिलकर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर किया है। आने वाले कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि निफ्टी 24,300 के आसपास खुद को संभाल पाता है या बिकवाली का दबाव और बढ़ता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य केवल सूचनात्मक है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश विकल्प में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं देता।


