Asian Market: अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों में नरमी और सेमीकंडक्टर शेयरों में मजबूत खरीदारी के बीच गुरुवार को ज्यादातर एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इस तेजी में सबसे आगे रहा और करीब 4.5% तक चढ़ गया। जापान के निक्केई में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, हांगकांग के बाजार से मिले संकेत कमजोर रहे और हैंग सेंग फ्यूचर्स लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।
अमेरिका में जुलाई के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े उम्मीदों के अनुरूप रहे। महंगाई में अपेक्षाकृत नरमी ने निवेशकों की धारणा को सहारा दिया। इसका असर खास तौर पर टेक्नोलॉजी और चिप शेयरों में देखने को मिला, जिससे नैस्डेक में बढ़त दर्ज हुई।
एशियाई बाजारों में जोरदार तेजी
गुरुवार के कारोबार में दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला प्रमुख एशियाई इंडेक्स रहा। कोस्पी में 4.48% की तेजी दर्ज की गई। सेमीकंडक्टर शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को खास सपोर्ट दिया।
जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) भी 1.83% ऊपर कारोबार करता दिखा। वहीं, जापान का व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स करीब 1.01% चढ़ा।
इसके उलट हांगकांग के हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.87% की गिरावट रही। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र के ज्यादातर बाजारों में तेजी के बावजूद हांगकांग के निवेशक अभी कुछ सतर्क नजर आ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 प्रमुख एशियाई इंडेक्सों में एकमात्र ऐसा इंडेक्स रहा, जिसमें गिरावट देखने को मिली। यह करीब 0.12% नीचे रहा।
US महंगाई के आंकड़ों का बाजार पर असर
अमेरिका में बुधवार, 12 अगस्त को शेयर बाजार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुआ। जुलाई की महंगाई के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के करीब रहे, इसलिए निवेशकों की प्रतिक्रिया बहुत ज्यादा आक्रामक नहीं रही।
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 240 अंकों के दायरे में कारोबार करने के बाद लगभग सपाट बंद हुआ। दूसरी ओर, S&P 500 में 0.3% और नैस्डेक में 0.5% की बढ़त दर्ज की गई।
जुलाई में अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में महीने-दर-महीने 0.1% की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना आधार पर महंगाई दर 3.4% रही। महंगाई में अपेक्षाकृत नरमी ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की चिंताओं को कुछ कम किया है।
चिप शेयरों में खरीदारी से मिला सपोर्ट
एशियाई बाजारों में गुरुवार की तेजी का एक बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी शेयरों में खरीदारी रही। अमेरिका में टेक और चिप शेयरों में मजबूती का असर एशिया के बाजारों पर भी दिखाई दिया।
दक्षिण कोरिया का बाजार विशेष रूप से सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रदर्शन से प्रभावित होता है। ऐसे में चिप शेयरों में खरीदारी बढ़ने से कोस्पी में अन्य प्रमुख बाजारों के मुकाबले ज्यादा तेजी देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI क्रूड दोनों में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब $1.29 या 1.5% गिरकर $87.69 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, WTI क्रूड करीब $1.30 या 1.6% गिरकर $81.97 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल की कीमतों में गिरावट की एक वजह 2026 में वैश्विक तेल मांग के अनुमान में कटौती को माना जा रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं ने कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट को सीमित किया।
अमेरिका में पिछले सप्ताह कमर्शियल क्रूड ऑयल इन्वेंटरी में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। यह जनवरी 2023 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि बताई गई। एक्सपोर्ट में भारी गिरावट को भी इन्वेंटरी बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया।
US-Iran तनाव पर भी बाजार की नजर
ग्लोबल बाजारों के लिए भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। US-Iran बातचीत में अभी तक गतिरोध दूर होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलने को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रणनीतिक रास्ते पर वॉशिंगटन के नियंत्रण की बात कही है।
मध्यस्थता की कोशिशों में शामिल पाकिस्तान की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि व्यापक शांति प्रक्रिया फिलहाल धीमी पड़ गई है। ऐसे में निवेशकों की नजर आगे होने वाले राजनयिक प्रयासों और उनके संभावित आर्थिक असर पर बनी रहेगी।
मध्य पूर्व में जारी तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष और बंदरगाहों तथा रिफाइनरियों जैसे ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने ग्लोबल क्रूड और रिफाइंड प्रोडक्ट मार्केट में अनिश्चितता बढ़ाई है।
सोने की कीमतों पर भी नजर
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से नरम रहने के बाद सोने की कीमतों में बड़ी हलचल नहीं हुई। नरम CPI आंकड़ों से ब्याज दरों को लेकर तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है, जिससे सोने को सपोर्ट मिला।
बुधवार को करीब 0.9% की तेजी के बाद शुरुआती कारोबार में स्पॉट गोल्ड लगभग स्थिर रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.1% गिरकर $4,403.02 प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली नीति और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों में बदलाव का असर आगे सोने और वैश्विक शेयर बाजारों दोनों पर देखने को मिल सकता है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या संकेत?
एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी टेक शेयरों में मजबूती भारतीय शेयर बाजार के लिए शुरुआती तौर पर सकारात्मक संकेत दे सकती है। खासकर ग्लोबल टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों में खरीदारी से भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी शेयरों की धारणा को भी सहारा मिल सकता है।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। इसलिए भारतीय निवेशकों को केवल एशियाई बाजारों की तेजी को देखकर ट्रेड लेने के बजाय ग्लोबल संकेतों के साथ घरेलू ट्रिगर्स पर भी नजर रखनी चाहिए।
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