Highlights
- मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट छोड़ भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट
- 2024 की CDS परीक्षा में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 2
- मिस इंटरनेशनल इंडिया 2023 का खिताब भी जीत चुकी हैं
- OTA चेन्नई से कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर बनीं आर्मी ऑफिसर
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से PhD का ऑफर मिलने के बावजूद चुनी देश सेवा
देश में कई युवा ग्लैमर और कॉर्पोरेट करियर का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने जुनून और देशभक्ति को सबसे ऊपर रखते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी की। मॉडलिंग की चमक-दमक से लेकर भारतीय सेना की वर्दी तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन गया है। उन्होंने न केवल मिस इंटरनेशनल इंडिया 2023 का ताज अपने नाम किया, बल्कि 2024 की Combined Defence Services (CDS) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 2 हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लक्ष्य के सामने कोई भी राह कठिन नहीं होती।
मॉडलिंग की दुनिया छोड़ चुना देश सेवा का रास्ता
मुंबई में जन्मीं और पुणे में पली-बढ़ीं कशिश मेथवानी के पास मॉडलिंग में शानदार करियर बनाने के कई अवसर थे। वर्ष 2023 में उन्होंने Miss International India का खिताब अपने नाम किया। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि मॉडलिंग उनका शौक था, करियर नहीं।
उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वे नेशनल कैडेट कोर (NCC) से जुड़ीं। एनसीसी के अनुभव ने उनके भीतर देश सेवा का जज्बा जगाया और उन्होंने सेना में अधिकारी बनने का फैसला कर लिया।
CDS परीक्षा में AIR 2 से बनाई नई पहचान
कशिश ने वर्ष 2024 में Combined Defence Services (CDS) परीक्षा दी और पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की। यह उपलब्धि उनके मजबूत अकादमिक रिकॉर्ड और अनुशासित तैयारी का प्रमाण है।
इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग को पूरी तरह अलविदा कहकर ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई में लगभग 11 महीने की कठिन सैन्य ट्रेनिंग पूरी की। सफल प्रशिक्षण के बाद उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला।
रिपब्लिक डे परेड से मिला बड़ा प्रेरणा स्रोत
एक मीडिया इंटरव्यू में कशिश मेथवानी ने बताया कि रिपब्लिक डे परेड में मार्च करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेस्ट कैडेट ट्रॉफी प्राप्त करना उनके जीवन का सबसे प्रेरणादायक क्षण था। उसी समय उन्हें महसूस हुआ कि भारतीय सेना ही उनका वास्तविक लक्ष्य है।
वर्तमान में उनकी पोस्टिंग आर्मी एयर डिफेंस रेजिमेंट में हुई है, जो देश की वायु सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कौन हैं लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी?
9 जनवरी 2001 को मुंबई के पास उल्हासनगर में जन्मी कशिश मेथवानी एक सिंधी परिवार से संबंध रखती हैं। बाद में उनका परिवार पुणे के वाकड में बस गया, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
उन्होंने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु में न्यूरोसाइंस विषय पर रिसर्च भी की। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से PhD का ऑफर भी मिला था, लेकिन उन्होंने देश सेवा को प्राथमिकता दी।
परिवार से मिला प्रेरणा और अनुशासन
कशिश के पिता डॉ. गुरमुख दास पहले वैज्ञानिक रहे और बाद में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (DGQA) में वरिष्ठ पद पर कार्यरत रहे। उनकी मां आर्मी पब्लिक स्कूल, घोरपड़ी में शिक्षिका हैं।
बचपन से ही कशिश पढ़ाई के साथ-साथ कई गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उन्हें भरतनाट्यम, वाद-विवाद, बास्केटबॉल और नेशनल लेवल पिस्टल शूटिंग में भी रुचि रही है।
समाज सेवा के लिए भी शुरू किया NGO
भारतीय सेना में शामिल होने से पहले कशिश मेथवानी ने Dedication Critical Cause नाम से एक सामाजिक पहल शुरू की थी। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को रक्तदान, प्लाज्मा दान और अंगदान के प्रति जागरूक करना था। इससे यह भी साबित होता है कि समाज सेवा उनके जीवन का अहम हिस्सा रही है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
लेफ्टिनेंट कशिश मेथवानी की कहानी यह बताती है कि सफलता केवल लोकप्रिय करियर चुनने में नहीं, बल्कि अपने उद्देश्य को पहचानकर उस पर पूरी निष्ठा से आगे बढ़ने में है। मॉडलिंग, शिक्षा, रिसर्च और सेना—हर क्षेत्र में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और अनुशासन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


