**Highlights
- जून तिमाही में डॉ रेड्डीज का कंसॉलिडेटेड मुनाफा 69% गिरकर 443 करोड़ रुपये रहा।
- ऑपरेशंस से रेवेन्यू 5.6% घटकर 8,070.5 करोड़ रुपये पर पहुंचा।
- सेमाग्लूटाइड सप्लाई में बाधा और 240 करोड़ रुपये के प्रोविजन ने मुनाफे पर दबाव बढ़ाया।
- नॉर्थ अमेरिका से आय 35.3% घटकर 2,205 करोड़ रुपये रही।
- कमजोर नतीजों के बाद कंपनी का शेयर 2% से ज्यादा फिसल गया।
Dr Reddy’s Q1 Results: जून तिमाही में कंपनी का मुनाफा 69% घटा
हैदराबाद स्थित दवा कंपनी डॉ रेड्डीज लेबोरेट्रीज (Dr Reddy’s Laboratories) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 69 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 443 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 1,418 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
कमजोर तिमाही नतीजों के पीछे सबसे बड़ा कारण जेनरिक सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) की सप्लाई में आई बाधा और उससे जुड़ी अतिरिक्त लागत रही। नतीजों के बाद निवेशकों की निराशा भी देखने को मिली और कंपनी का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।
ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी घटा
कंपनी के अनुसार, जून तिमाही में ऑपरेशंस से कुल रेवेन्यू 5.6 फीसदी घटकर 8,070.5 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 8,545.2 करोड़ रुपये था।
रेवेन्यू में यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर उत्तरी अमेरिका में बिक्री कमजोर रहने और कुछ प्रमुख उत्पादों की मांग घटने की वजह से आई।
सेमाग्लूटाइड सप्लाई संकट से बढ़ी लागत
डॉ रेड्डीज ने बताया कि सेमाग्लूटाइड की सप्लाई में आई रुकावट के कारण कंपनी को इनवेंट्री और अन्य संबंधित खर्चों के लिए 240 करोड़ रुपये का प्रोविजन करना पड़ा। इसी अतिरिक्त लागत का सीधा असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ा।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में फिलहाल जेनरिक सेमाग्लूटाइड उपलब्ध नहीं होगी, जबकि चीन में भी कम से कम अक्टूबर तक इसकी सप्लाई प्रभावित रहने की संभावना है।
API में अशुद्धता के कारण रुका उत्पादन
कंपनी को एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) में अशुद्धता (Impurity) से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। इस तकनीकी समस्या के कारण नए बैचों का उत्पादन रोकना पड़ा, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
गौरतलब है कि सेमाग्लूटाइड वही सक्रिय दवा तत्व है जिसका उपयोग वजन घटाने की लोकप्रिय दवा Wegovy में किया जाता है। भारत में इसके पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद कई कंपनियां इसके जेनरिक संस्करण लॉन्च करने की तैयारी कर रही थीं।
भारत में विस्तार की योजना को लगा झटका
डॉ रेड्डीज का लक्ष्य तेजी से बढ़ रहे भारतीय सेमाग्लूटाइड बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना था। हालांकि उत्पादन बाधित होने के कारण कंपनी की यह रणनीति फिलहाल प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सप्लाई सामान्य होने में अधिक समय लगता है तो आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
नॉर्थ अमेरिका से आय में 35% से ज्यादा गिरावट
कंपनी के सबसे बड़े बाजार नॉर्थ अमेरिका से मिलने वाला रेवेन्यू भी कमजोर रहा। इस क्षेत्र से कंपनी की आय 35.3 फीसदी घटकर 2,205 करोड़ रुपये रह गई।
इसके अलावा कंपनी को लेनालिडोमाइड (Lenalidomide) की बिक्री में भी गिरावट का सामना करना पड़ा। यह दवा ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब की कैंसर रोधी दवा Revlimid का जेनरिक संस्करण है।
शेयर में भी दिखा दबाव
कमजोर तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में बिकवाली की। 22 जुलाई को एनएसई पर डॉ रेड्डीज का शेयर 2.16 फीसदी गिरकर 1,179.90 रुपये पर बंद हुआ।
सिर्फ डॉ रेड्डीज ही नहीं, बल्कि सन फार्मा, सिप्ला और अन्य प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।
अमेरिकी टैरिफ की चिंता भी बढ़ी
फार्मा सेक्टर पर दबाव की एक बड़ी वजह अमेरिका से आई नई घोषणा भी रही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने जेनरिक दवाओं के आयात पर चरणबद्ध तरीके से टैरिफ लगाने की योजना का संकेत दिया है।
यदि यह फैसला लागू होता है तो भारत की दवा कंपनियों, विशेष रूप से अमेरिका में बड़ी मौजूदगी रखने वाली कंपनियों जैसे डॉ रेड्डीज, सन फार्मा और सिप्ला के निर्यात और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या देखेंगे निवेशक?
अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी सेमाग्लूटाइड उत्पादन कब दोबारा शुरू कर पाती है, नॉर्थ अमेरिका में बिक्री कब सुधरती है और आगामी तिमाहियों में मुनाफे की रिकवरी कितनी तेज होती है। फिलहाल कमजोर तिमाही नतीजों और वैश्विक चुनौतियों ने कंपनी के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं।


