नई दिल्ली: ई-रिक्शा की बैटरियों को अनधिकृत तरीके से रिमोट कंट्रोल करने वाले मोबाइल एप्लिकेशन के दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने ऐसे कुछ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) मोबाइल ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही देश में साइबर सुरक्षा और डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्मार्ट डिवाइस और कनेक्टेड सिस्टम की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए साइबर खतरों से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है।
ई-रिक्शा बैटरी के दुरुपयोग पर कार्रवाई
सरकार के मुताबिक, कुछ मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए ई-रिक्शा की बैटरियों को अनधिकृत रूप से रिमोट कंट्रोल करने की शिकायतें सामने आई थीं। इन रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस तरह के ऐप्स का गलत इस्तेमाल न केवल वाहन मालिकों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है, बल्कि इससे साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं।
साइबर सुरक्षा के लिए तैयार हुआ राष्ट्रीय ढांचा
सरकार ने देशभर में साइबर सुरक्षा और डिजिटल लचीलापन (Digital Resilience) बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी एकीकृत और समन्वित ढांचा तैयार किया है। इस ढांचे के तहत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।
इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक (National Cyber Security Coordinator) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनका कार्य विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में तालमेल स्थापित करना होगा।
CERT-In निभा रहा राष्ट्रीय एजेंसी की भूमिका
सरकार ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70बी के तहत भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) को देश की राष्ट्रीय साइबर घटना प्रतिक्रिया एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।
CERT-In का कार्य साइबर हमलों, डेटा उल्लंघनों और अन्य डिजिटल खतरों की निगरानी करना, उनका विश्लेषण करना और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना है ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
NCCC करता है साइबर खतरों की निगरानी
राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC) लगातार साइबरस्पेस की निगरानी करता है और संभावित साइबर खतरों की पहचान करता है। यह विभिन्न सरकारी संगठनों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करता है ताकि किसी भी साइबर खतरे का समय पर समाधान किया जा सके।
महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा पर जोर
सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70ए के तहत राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) की स्थापना की है। यह संस्था देश की महत्वपूर्ण डिजिटल और तकनीकी अवसंरचना, जैसे बिजली, बैंकिंग, दूरसंचार, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने का कार्य करती है।
उपभोक्ता संरक्षण कानून भी देता है सुरक्षा
सरकार ने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 को डिजिटल युग, ई-कॉमर्स और नई तकनीकों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को तकनीकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिमों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
साइबर जागरूकता पर भी सरकार का फोकस
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (ISEA) परियोजना के माध्यम से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित करने और आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, साइबर स्वच्छता (Cyber Hygiene), सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव से संबंधित जागरूकता सामग्री विभिन्न सरकारी पोर्टलों के माध्यम से लगातार प्रसारित की जा रही है।
क्या है सरकार का संदेश?
सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल और कनेक्टेड डिवाइस इकोसिस्टम में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ई-रिक्शा बैटरियों के अनधिकृत नियंत्रण जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ साइबर सुरक्षा संस्थाओं को मजबूत बनाकर डिजिटल भारत को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।


