पश्चिम एशिया संकट के बीच रेलवे कैटरिंग पर दबाव, इंडक्शन स्टोव के जरिए तैयार होगा खाना
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब भारत के रेलवे नेटवर्क तक पहुंच गया है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित होने के बाद इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने एक ऐसा फैसला लिया है जो कुछ साल पहले तक असंभव माना जा रहा था। कंपनी ने चुनिंदा ट्रेनों की पैंट्री कारों में फिर से खाना पकाने की अनुमति दे दी है।
हालांकि इस बार व्यवस्था पहले जैसी नहीं होगी। एलपीजी गैस की जगह इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव का इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कदम यात्रियों को भोजन सेवा प्रभावित होने से बचाने और बढ़ती ईंधन चुनौतियों से निपटने के लिए उठाया गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब देशभर में रेलवे की कैटरिंग सेवाओं को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी की जरूरत पड़ रही है और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
कई साल पहले क्यों बंद कर दिया गया था चलती ट्रेन में खाना बनाना?
भारतीय रेलवे ने पिछले एक दशक में सुरक्षा कारणों से चलती ट्रेनों में गैस सिलेंडर आधारित खाना पकाने की व्यवस्था को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया था। रेलवे का मानना था कि चलती ट्रेन में एलपीजी सिलेंडर का उपयोग आग और दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकता है।
इसके बाद रेलवे ने बेस किचन मॉडल अपनाया। इस व्यवस्था के तहत बड़े रेलवे स्टेशनों या केंद्रीय रसोईघरों में भोजन तैयार किया जाता है और फिर उसे ट्रेनों तक पहुंचाया जाता है। राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में लंबे समय से यही व्यवस्था लागू रही है।
लेकिन मौजूदा ऊर्जा संकट ने रेलवे को वैकल्पिक समाधान तलाशने पर मजबूर कर दिया है। यही वजह है कि अब पैंट्री कारों को फिर से उपयोग में लाया जा रहा है, हालांकि सुरक्षा के लिहाज से गैस के बजाय बिजली आधारित खाना पकाने की तकनीक अपनाई गई है।
LHB पैंट्री कारें बनीं रेलवे की नई ताकत
Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार IRCTC ने आधुनिक LHB पैंट्री कारों में इंडक्शन आधारित कुकिंग सिस्टम लागू करना शुरू कर दिया है। LHB कोच पहले से ही बेहतर सुरक्षा मानकों और आधुनिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम के लिए जाने जाते हैं।
IRCTC के सीएमडी संजय कुमार जैन ने कहा कि जिन पैंट्री कारों में पर्याप्त सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हैं, उनमें वेंडर्स को फिर से खाना बनाने की अनुमति दी गई है। उन्होंने बताया कि अब LHB पैंट्री कारें चलती ट्रेन में बिजली के माध्यम से सुरक्षित तरीके से भोजन तैयार कर सकती हैं।
रेलवे ने बड़े स्टेशनों पर भी इंडक्शन कुकिंग की व्यवस्था मजबूत की है ताकि भोजन उत्पादन प्रभावित न हो।
रोजाना 17 लाख यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराती है IRCTC
IRCTC का कैटरिंग नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े रेल फूड सर्विस सिस्टम में से एक माना जाता है। कंपनी लगभग 1,400 ट्रेनों में खानपान सेवाओं का प्रबंधन करती है।
आंकड़ों के अनुसार:
- लगभग 1,400 ट्रेनों में भोजन सेवा
- सालाना करीब 58 करोड़ यात्रियों तक पहुंच
- प्रतिदिन लगभग 17 लाख यात्रियों को भोजन
- रोजाना करीब 1,000 कमर्शियल LPG सिलेंडरों की आवश्यकता
इतने बड़े नेटवर्क को लगातार संचालित रखने के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि एलपीजी संकट का असर सीधे रेलवे कैटरिंग संचालन पर दिखाई दे रहा है।
IOCL, BPCL और HPCL से किया गया समझौता
संकट से निपटने के लिए IRCTC ने देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के साथ समन्वय बढ़ाया है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार रेलवे कैटरिंग सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई गई है। इसके बावजूद कंपनी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से निर्भरता बढ़ा रही है।
इसी रणनीति के तहत स्टेशनों पर संचालित फूड प्लाजा, जन आहार और रिफ्रेशमेंट रूम संचालकों को भी इंडक्शन कुकर तथा माइक्रोवेव आधारित कुकिंग अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
अब 60 फीसदी खाना बिजली से पक रहा
ऊर्जा संकट के बीच रेलवे ने अपने कैटरिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। अधिकारियों के अनुसार रेलवे नेटवर्क में तैयार होने वाले लगभग 60 प्रतिशत भोजन को अब बिजली आधारित उपकरणों के जरिए पकाया जा रहा है।
यह बदलाव केवल अस्थायी समाधान नहीं माना जा रहा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में रेलवे धीरे-धीरे गैस आधारित किचन से पूरी तरह इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम की ओर बढ़ सकता है।
इससे सुरक्षा बढ़ेगी, संचालन लागत पर नियंत्रण मिलेगा और ईंधन आपूर्ति संकट का प्रभाव भी कम होगा।
IRCTC के मुनाफे पर भी पड़ा असर
एलपीजी संकट और बढ़ती परिचालन लागत का असर IRCTC के वित्तीय प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी के कैटरिंग कारोबार का EBIT मार्जिन 10.4 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत पर आ गया। इसका प्रमुख कारण बढ़ती इनपुट लागत और ईंधन संबंधी खर्च बताया जा रहा है।
मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो IRCTC के लिए मार्जिन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि यात्रियों को सेवा देने में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
क्या बढ़ सकते हैं ट्रेनों में खाने के दाम?
विश्लेषकों का मानना है कि कैटरिंग सेवाओं की कीमतों में आखिरी बड़ा संशोधन 2019 में हुआ था। उसके बाद महंगाई, ईंधन लागत और श्रम खर्च में काफी वृद्धि हो चुकी है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रेलवे भविष्य में भोजन की कीमतों में बदलाव कर सकता है।
हालांकि IRCTC प्रबंधन ने इस विषय पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। कंपनी का कहना है कि ट्रेनों में भोजन की कीमतों का अंतिम निर्णय रेलवे मंत्रालय द्वारा लिया जाता है।
पश्चिम एशिया संकट ने उजागर की रेलवे की चुनौतियां
ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं ने रेलवे कैटरिंग प्रणाली की कई कमजोरियों को भी सामने ला दिया है। संसदीय आंकड़ों के अनुसार देश की 341 लंबी दूरी की ट्रेनों में अभी भी नियमित पैंट्री कार सुविधा उपलब्ध नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रेलवे को भोजन आपूर्ति, ऊर्जा प्रबंधन और ऑनबोर्ड कैटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करना होगा।
मौजूदा संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रेलवे जैसी विशाल सेवा प्रणाली को केवल एक ईंधन स्रोत पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल भविष्य में रेलवे कैटरिंग की नई दिशा बन सकता है।
निष्कर्ष
एलपीजी संकट के बीच IRCTC का चलती ट्रेनों में फिर से खाना पकाने का फैसला केवल एक आपातकालीन कदम नहीं बल्कि रेलवे कैटरिंग के बदलते स्वरूप का संकेत भी है। गैस आधारित व्यवस्था से इलेक्ट्रिक कुकिंग की ओर बढ़ता रेलवे नेटवर्क आने वाले समय में अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल मॉडल बन सकता है। फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि बढ़ती ईंधन चुनौतियों के बावजूद ट्रेनों में भोजन सेवा जारी रहेगी।


