Highlights
- LIC ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी 3.16% से बढ़ाकर 6.06% की
- 22 मई को 26.26 करोड़ शेयर खरीदे गए
- बैंक का शेयर 5 साल में करीब 62% उछला
- LIC ने 1:1 बोनस शेयर और ₹10 डिविडेंड का भी ऐलान किया
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने एक बार फिर सरकारी बैंकिंग सेक्टर पर बड़ा दांव लगाया है। एलआईसी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 6.06 प्रतिशत कर ली है। इससे पहले कंपनी की हिस्सेदारी 3.16 प्रतिशत थी।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, एलआईसी ने 22 मई 2026 को ओपन मार्केट के जरिए 26.26 करोड़ शेयर खरीदे। यह बैंक में करीब 2.90 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी के बराबर है। इस खरीद के बाद निवेशकों की नजर अब इस सरकारी बैंक के शेयर पर टिक गई है।
क्यों अहम है LIC की यह खरीद?
भारतीय शेयर बाजार में LIC को लंबे समय का बड़ा संस्थागत निवेशक माना जाता है। जब भी LIC किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती है, तो बाजार इसे भरोसे के संकेत के रूप में देखता है। खासकर सरकारी बैंकों में LIC की बढ़ती हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि संस्थागत निवेशकों को बैंकिंग सेक्टर में आगे बेहतर संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पिछले कुछ सालों में अपनी बैलेंस शीट सुधारने, एनपीए घटाने और डिजिटल बैंकिंग विस्तार पर लगातार काम कर रहा है। यही वजह है कि सरकारी बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की रुचि फिर बढ़ती दिखाई दे रही है।
31 रुपये का शेयर 5 साल में कितना बढ़ा?
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का शेयर शुक्रवार को बीएसई पर मामूली गिरावट के साथ 31.29 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इस शेयर ने शानदार रिटर्न दिया है।
पिछले 5 सालों में बैंक का शेयर करीब 62 प्रतिशत तक उछल चुका है। सरकारी बैंकिंग सेक्टर में सुधार, सरकारी समर्थन और बढ़ती क्रेडिट ग्रोथ ने इस तेजी में अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बैंक अपने एसेट क्वालिटी और मुनाफे में सुधार जारी रखता है, तो आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि निवेशकों को सरकारी बैंकिंग शेयरों में उतार-चढ़ाव के जोखिम को भी ध्यान में रखना चाहिए।
सरकारी बैंकों में क्यों लौट रहा निवेशकों का भरोसा?
पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कई मोर्चों पर सुधार किया है।
- खराब कर्ज (NPA) में कमी
- मुनाफे में सुधार
- डिजिटल बैंकिंग विस्तार
- सरकारी पूंजी समर्थन
- ब्याज दरों में बदलाव का फायदा
इन वजहों से सरकारी बैंकिंग शेयरों में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। LIC की यह खरीद भी इसी ट्रेंड का हिस्सा मानी जा रही है।
LIC ने निवेशकों को दिया बोनस और डिविडेंड का तोहफा
LIC ने अपने निवेशकों के लिए बड़ा ऐलान भी किया है। कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹10 प्रति इक्विटी शेयर फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है।
इसके अलावा कंपनी ने अपने इतिहास का पहला 1:1 बोनस इश्यू घोषित किया है। यानी जिन निवेशकों के पास 1 शेयर होगा, उन्हें 1 अतिरिक्त बोनस शेयर मुफ्त मिलेगा।
बोनस और डिविडेंड की महत्वपूर्ण तारीखें
| विवरण | तारीख |
|---|---|
| बोनस रिकॉर्ड डेट | 29 मई |
| बोनस शेयर क्रेडिट | 1 जून (संभावित) |
| डिविडेंड रिकॉर्ड डेट | 25 जून |
LIC का डिविडेंड इतिहास
| साल | डिविडेंड |
|---|---|
| 2025 | ₹12 प्रति शेयर |
| 2024 | ₹6 + ₹4 अंतरिम डिविडेंड |
| 2023 | ₹3 प्रति शेयर |
| 2022 | ₹1.50 प्रति शेयर |
डिविडेंड इतिहास को देखें तो LIC लगातार अपने शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देने की कोशिश कर रही है। बोनस इश्यू के बाद कंपनी के शेयर में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि LIC जैसी बड़ी संस्थागत कंपनी जब किसी सरकारी बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाती है, तो इससे बाजार में सकारात्मक संदेश जाता है। हालांकि केवल किसी बड़े निवेशक की खरीद देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं माना जाता। निवेशकों को बैंक की वित्तीय स्थिति, मुनाफा, NPA स्तर, भविष्य की ग्रोथ, सरकारी नीतियां जैसे पहलुओं का भी विश्लेषण करना चाहिए।
सरकारी बैंकिंग सेक्टर फिलहाल रिकवरी मोड में दिखाई दे रहा है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव भी काफी रहता है। इसलिए निवेश हमेशा अपने जोखिम और वित्तीय सलाहकार की राय के आधार पर करना चाहिए।
Also Read:


