नई दिल्ली: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने देश में विकसित तीन महत्वपूर्ण बायोमेडिकल तकनीकों के विकास, निर्माण और व्यावसायिक उपयोग (कमर्शियलाइजेशन) के लिए प्रमुख फार्मा और वैक्सीन कंपनियों को लाइसेंस प्रदान किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, यह कदम सरकारी फंड से विकसित शोध को आम लोगों तक किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे भारत के बायोमेडिकल इनोवेशन इकोसिस्टम को भी नई मजबूती मिलेगी।
कैंसर के इलाज के लिए ‘शेटा-2’ तकनीक का लाइसेंस एमक्योर को
आईसीएमआर द्वारा हस्तांतरित तकनीकों में सबसे प्रमुख ‘शेटा-2’ (CheTA-2) है। यह मानव पैपिलोमा वायरस (HPV) से होने वाली गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) की कैंसर-पूर्व अवस्था (CIN) के उपचार के लिए विकसित एक नई लक्षित दवा है। इसके विकास, निर्माण और व्यावसायिक उपयोग का लाइसेंस एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को दिया गया है।
इस तकनीक को आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (ICMR-NICPR) के वैज्ञानिक डॉ. शौकत हुसैन ने अमेरिका के ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी के स्टीफेंसन कैंसर सेंटर की डॉ. डोरिस एम. बेनब्रुक के सहयोग से विकसित किया है।
स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना करेगी इलाज
विशेषज्ञों के अनुसार, शेटा-2 अपनी तरह की पहली लक्षित उपचार तकनीक है, जो स्वस्थ कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हुए केवल HPV संक्रमित कैंसर-पूर्व और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करती है।
इस तकनीक के जरिए भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के मरीजों को कम सर्जरी, कम दुष्प्रभाव और अधिक किफायती इलाज का विकल्प मिल सकता है। भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, इसलिए यह तकनीक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संक्रमण से बचाव के लिए दो नई वैक्सीन तकनीकें
आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस (ICMR-NIRBI), कोलकाता द्वारा विकसित आंतों के बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों के खिलाफ दो अगली पीढ़ी की वैक्सीन तकनीकों का लाइसेंस बायोलॉजिकल ई लिमिटेड को दिया गया है।
इनमें शामिल हैं:
- फ्यूजन तकनीक आधारित टाइफाइड वैक्सीन, जिसमें साल्मोनेला टाइफी का बाहरी झिल्ली प्रोटीन (Outer Membrane Protein) शामिल है। यह भविष्य की अधिक प्रभावी टाइफाइड वैक्सीन के रूप में विकसित की जा रही है।
- रिकॉम्बिनेंट (Recombinant) मल्टी-बैक्टीरियल वैक्सीन, जो साल्मोनेला टाइफी, साल्मोनेला पैराटाइफी और शिगेला जैसे बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
भारत के बायोमेडिकल सेक्टर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इन तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीकों को बाजार तक पहुंचाकर आम मरीजों के लिए सुलभ और किफायती उपचार उपलब्ध कराना है।
सरकार का मानना है कि इससे भारत में अगली पीढ़ी की दवाओं और वैक्सीन के विकास को गति मिलेगी तथा देश वैश्विक बायोमेडिकल अनुसंधान और स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
ICMR ने विकसित किया मजबूत इनोवेशन इकोसिस्टम
मंत्रालय ने बताया कि आईसीएमआर ने एक एकीकृत हेल्थ इनोवेशन इकोसिस्टम तैयार किया है, जो किसी भी नई स्वास्थ्य तकनीक के विकास की पूरी प्रक्रिया में सहायता करता है। इसमें शामिल हैं:
- नई तकनीकों की खोज और अनुसंधान
- बौद्धिक संपदा (IP) की सुरक्षा
- प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल परीक्षण
- नियामकीय (Regulatory) सहायता
- उद्योगों को तकनीक हस्तांतरण
- व्यावसायिक उपयोग और बड़े स्तर पर निर्माण
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें तेजी से मरीजों तक पहुंच सकें।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत में कैंसर और संक्रामक रोगों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में स्वदेशी तकनीकों के आधार पर विकसित दवाएं और वैक्सीन न केवल इलाज को अधिक सुलभ बनाएंगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योगों के बीच इस तरह का सहयोग भविष्य में भारत को वैश्विक बायोटेक और वैक्सीन निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


