Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के धवलेश्वरम की 14 वर्षीय छात्रा कंदुला जेसी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक साधारण परिवार से आने वाली जेसी का चयन दुनिया के पहले ‘All-Girls Lunar Mission’ यानी मिशन शक्तिसैट (Mission ShaktiSat) के लिए हुआ है। खास बात यह है कि उनके पिता एक कारपेंटर (बढ़ई) हैं और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को उड़ान देने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
यह उपलब्धि सिर्फ कंदुला जेसी के परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन लाखों बेटियों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।
दुनिया का पहला ‘ऑल-गर्ल्स लूनर मिशन’ क्या है?
मिशन शक्तिसैट एक अंतरराष्ट्रीय STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) पहल है, जिसका उद्देश्य दुनिया भर की लड़कियों को अंतरिक्ष विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
इस मिशन के तहत छात्राएं एक लूनर क्यूबसैट (Lunar CubeSat) के डिजाइन, निर्माण और संचालन की प्रक्रिया में हिस्सा लेंगी। यह छोटा उपग्रह भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए विकसित किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, मिशन प्लानिंग, स्पेस रिसर्च, प्रणोदन (Propulsion) और अन्य तकनीकी विषयों की व्यावहारिक ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
23 अगस्त से शुरू होगी ट्रेनिंग
मिशन शक्तिसैट की आधिकारिक ट्रेनिंग 23 अगस्त से नई दिल्ली में शुरू होगी। इसके बाद छात्रों द्वारा तैयार किया गया लूनर क्यूबसैट 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए जाने की योजना है।
इस मिशन में शामिल छात्राओं को उम्मीद है कि यह अनुभव उनके लिए भविष्य में ISRO, अंतरराष्ट्रीय स्पेस एजेंसियों और लूनर एक्सप्लोरेशन से जुड़े करियर का मजबूत आधार बनेगा।
कौन हैं 14 साल की कंदुला जेसी?
The Moon doesn't know who is rich, poor, famous or forgotten. It only respects physics. And physics has just invited a carpenter's daughter from #AndhraPradesh . That's the most beautiful form of equality.
Kudos #KandulaJessie pic.twitter.com/P83oScgfL5
— DSiN (@SINCORLEONE) July 23, 2026 कंदुला जेसी आंध्र प्रदेश के धवलेश्वरम स्थित जिला परिषद गर्ल्स हाई स्कूल की छात्रा हैं। बचपन से ही उन्हें विज्ञान और तकनीक में गहरी रुचि थी। स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब (ATL) में उनके शिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
मिशन शक्तिसैट के चयन की तैयारी के दौरान जेसी ने करीब 550 ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र पूरे किए। उन्होंने उपग्रह प्रणाली (Satellite Systems), थर्मोडायनेमिक्स (Thermodynamics), प्रणोदन (Propulsion) और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े कई विषयों का अध्ययन किया।
सिर्फ तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उन्होंने अपनी अंग्रेजी भाषा कौशल पर भी विशेष मेहनत की।
108 देशों के 12,000 आवेदकों में बनाई जगह
#PMModiInAustralia |
Sukruti Narayanan, Global Head of Partnerships for Mission ShakthiSAT, and Founder & President of the AIMERS Foundation proudly says taking inspiration from the #BetiBachaoBetiPadhao campaign, she aims to empower young women worldwide.
Welcoming Prime… pic.twitter.com/XcxHZn9F7U
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 9, 2026 मिशन शक्तिसैट के लिए दुनिया के 108 देशों से करीब 12,000 छात्रों ने आवेदन किया था। इनमें से केवल 20 भारतीय प्रतिभागियों का चयन हुआ और कंदुला जेसी उनमें शामिल हैं।
सबसे खास बात यह है कि वह आंध्र प्रदेश से अंतिम सूची में जगह बनाने वाली एकमात्र छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह सफलता उनकी लगन और मेहनत का परिणाम है।
आर्थिक चुनौतियों के बीच नहीं छोड़ा सपना
कंदुला जेसी के पिता एक बढ़ई हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही। आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्हें बाद में सरकारी स्कूल में दाखिला लेना पड़ा।
हालांकि, सीमित संसाधनों ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं किया। परिवार, शिक्षकों और स्कूल के सहयोग से उन्होंने लगातार मेहनत की और आज दुनिया के सबसे अनोखे स्पेस मिशनों में जगह बनाकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती।
कौन कर रहा है मिशन का संचालन?
मिशन शक्तिसैट का संचालन STEM शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष पेशेवरों के समूह द्वारा किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर लड़कियों की भागीदारी को अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में बढ़ाना है।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को वास्तविक स्पेस मिशन के अनुभव के साथ आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक की जानकारी दी जाती है, जिससे वे भविष्य में वैज्ञानिक और अंतरिक्ष इंजीनियर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
परिवार और पूरे समुदाय के लिए गर्व का पल
कंदुला जेसी का चयन उनके माता-पिता, शिक्षकों और पूरे समुदाय के लिए गर्व का विषय बन गया है। एक कारपेंटर की बेटी का दुनिया के पहले All-Girls Lunar Mission तक पहुंचना यह संदेश देता है कि अगर मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन मिले तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।
उनकी कहानी देशभर की लाखों छात्राओं के लिए प्रेरणा है, जो विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।


