मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। लेकिन अब इसकी प्राइसिंग और स्ट्रक्चर को लेकर नई जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक जियो IPO की कीमत को लेकर रिलायंस और मौजूदा निवेशकों के बीच मतभेद चल रहा है। इसी वजह से अब IPO के स्ट्रक्चर में बदलाव की तैयारी की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक पहले Jio IPO में Offer For Sale (OFS) और Fresh Issue दोनों शामिल होने थे। लेकिन अब चर्चा है कि IPO को पूरी तरह fresh issue बनाया जा सकता है। यानी मौजूदा निवेशक अपने शेयर नहीं बेचेंगे और पूरा पैसा सीधे कंपनी के पास जाएगा।
क्यों हुआ विवाद?
सूत्रों के मुताबिक मौजूदा global investors चाहते हैं कि IPO की कीमत ज्यादा रखी जाए ताकि उन्हें अपने निवेश पर अधिक रिटर्न मिल सके।
दूसरी तरफ रिलायंस का मानना है कि बहुत ज्यादा valuation रखने से listing कमजोर हो सकती है और retail investors को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कंपनी का फोकस long-term investor confidence बनाए रखने पर बताया जा रहा है।
रिटेल निवेशकों को लेकर क्यों चिंतित है रिलायंस?
विशेषज्ञों का कहना है कि Jio IPO का साइज बेहद बड़ा हो सकता है। ऐसे में अगर issue price बहुत ज्यादा रखा गया तो बाजार के लिए इसे absorb करना मुश्किल हो सकता है।
एक सूत्र के मुताबिक रिलायंस चाहती है कि listing के बाद market खुद valuation तय करे और investors बाद में open market में अपनी हिस्सेदारी बेचें। यानी कंपनी aggressive pricing से बचना चाहती है।
अगर पूरा Fresh Issue हुआ तो क्या बदलेगा?
अगर IPO पूरी तरह fresh issue बनता है तो पूरा पैसा कंपनी के पास जाएगा, मौजूदा shareholders की हिस्सेदारी dilute होगी और कंपनी को debt reduction में मदद मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब ₹25,000 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज कम करने में किया जा सकता है, जबकि बाकी रकम expansion और दूसरे business purposes में लग सकती है।
जियो का valuation कितना माना जा रहा?
पहले Jio Platforms का valuation करीब 133-134 अरब डॉलर आंका जा रहा था। हालांकि fresh issue structure आने पर valuation में कुछ बदलाव संभव माना जा रहा है। इससे रिलायंस इंडस्ट्रीज की मौजूदा 67% हिस्सेदारी भी कुछ कम हो सकती है।
अगले कदम क्या हो सकते हैं?
सूत्रों के मुताबिक रिलायंस अगले कुछ दिनों में SEBI के पास draft papers दाखिल कर सकती है। IPO structure और pricing को लेकर पिछले एक महीने से global tech firms, sovereign wealth funds और private equity investors के साथ बातचीत चल रही है।
पहले क्या योजना थी?
मार्च में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक जियो में निवेश करने वाले 14 निवेशकों में से हर एक को लगभग 8-8.5% हिस्सेदारी बेचनी थी। लेकिन अब OFS plan कमजोर पड़ता दिख रहा है।
किन-किन कंपनियों ने Jio में निवेश किया था?
साल 2020 में Jio Platforms ने करीब ₹1.5 लाख करोड़ जुटाए थे।
उस समय जिन बड़े global investors ने निवेश किया था, उनमें Google, Meta, KKR, Silver Lake, Vista Equity, General Atlantic, Abu Dhabi Investment Authority, Qualcomm Ventures, Intel Capital और Saudi Arabia का Public Investment Fund शामिल थे।
बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Jio IPO?
विशेषज्ञों का मानना है कि Jio IPO भारतीय बाजार का सबसे बड़ा public issue बन सकता है, telecom और digital sector valuation को प्रभावित कर सकता है और retail participation का नया रिकॉर्ड बना सकता है।
इसके अलावा इसका असर Reliance Industries के valuation, telecom competition और Indian equity market liquidity पर भी पड़ सकता है।
FAQ
क्या Jio IPO आने वाला है?
हां, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की तैयारी कर रही है।
IPO में क्या बदलाव हो सकता है?
IPO को OFS की जगह पूरी तरह fresh issue बनाया जा सकता है।
विवाद किस बात पर है?
Issue pricing और valuation को लेकर promoters और investors के बीच मतभेद है।
IPO से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कहां होगा?
कर्ज कम करने और business expansion में।
जियो का अनुमानित valuation कितना है?
करीब 133-134 अरब डॉलर।
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