प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद सोमवार को सर्राफा बाजार से लेकर शेयर बाजार तक हलचल मच गई। निवेशकों को डर था कि सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए सोने के आयात पर सख्ती कर सकती है। इसका असर तुरंत ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में दिखाई दिया और कई बड़े स्टॉक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अब सरकार की ओर से गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने बाजार में फैले डर को काफी हद तक शांत कर दिया है।
दरअसल, सोमवार सुबह जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों ने ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में बड़ी बिकवाली शुरू कर दी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह आशंका थी कि सरकार जल्द ही सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है। लेकिन सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। यही बयान अब बाजार के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
पीएम मोदी की अपील के बाद क्यों घबराया बाजार?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की महंगी होती कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव का जिक्र करते हुए लोगों से कुछ समय तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत को इस समय विदेशी मुद्रा बचाने पर ध्यान देना होगा क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का 90 फीसदी से ज्यादा सोना विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब भी गोल्ड इंपोर्ट बढ़ता है, देश से बड़ी मात्रा में डॉलर बाहर जाता है। यही वजह है कि पीएम मोदी की अपील को बाजार ने संभावित policy signal के रूप में लेना शुरू कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को लगा कि सरकार:
- गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है
- सोने के आयात पर अतिरिक्त नियंत्रण लगा सकती है
- या luxury imports पर नई सख्ती ला सकती है
इसी डर की वजह से ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली।
गोल्ड प्राइस में भी आई बड़ी गिरावट
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोने की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने की कीमत गिरकर करीब ₹1,51,857 तक पहुंच गई। बाजार में प्रति 10 ग्राम लगभग ₹673 की गिरावट दर्ज की गई।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों ने short-term demand slowdown की आशंका को देखते हुए profit booking शुरू कर दी। इसके अलावा global market sentiment भी कमजोर बना हुआ था, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा।
ज्वेलरी शेयरों में क्यों मची अफरा-तफरी?
सोमवार को ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों को डर था कि अगर सरकार import duty बढ़ाती है तो इससे:
- gold demand प्रभावित हो सकती है
- jewellery sales धीमी पड़ सकती हैं
- और margins पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से कई बड़े stocks में तेज गिरावट दर्ज की गई।
Senco Gold का शेयर करीब 11% टूट गया।
Kalyan Jewellers में लगभग 10% की गिरावट दर्ज हुई।
Titan Company के शेयर में करीब 8% की कमजोरी देखने को मिली।
इसके अलावा:
- Sky Gold & Diamonds में 12% से ज्यादा गिरावट
- Thangamayil Jewellery में लगभग 10% कमजोरी
- TBZ में करीब 7% गिरावट
- और PC Jeweller में भी तेज बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह reaction काफी हद तक panic selling थी क्योंकि बाजार ने policy tightening की संभावना को तेजी से price-in करना शुरू कर दिया था।
क्या सरकार बढ़ाने जा रही है गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी?
फिलहाल इसका जवाब “नहीं” है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि सरकार की अभी सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। यह स्पष्टीकरण इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि बाजार में लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं कि विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार duty hike कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार अचानक import duty बढ़ाती तो gold smuggling बढ़ने का खतरा रहता, jewellery industry पर दबाव बढ़ता और शादी-ब्याह के सीजन में demand प्रभावित हो सकती थी। इसी वजह से सरकार फिलहाल संतुलित approach अपनाती दिखाई दे रही है।
आखिर सरकार की चिंता क्या है?
भारत की सबसे बड़ी चिंता इस समय विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, डॉलर मजबूत हो रहा है और आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% crude oil आयात करता है। इसके अलावा सोने का भी भारी मात्रा में आयात किया जाता है। इन दोनों के लिए भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। यही वजह है कि सरकार इस समय imports को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल महंगा होता है, रुपया कमजोर पड़ता है और gold imports लगातार बढ़ते हैं तो current account deficit और forex reserves दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत में सोने की मांग क्यों इतनी ज्यादा है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े gold consuming देशों में शामिल है। यहां:
- निवेश
- शादी-ब्याह
- त्योहार
- और पारंपरिक बचत
के रूप में सोने की मांग बेहद मजबूत रहती है। World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल सैकड़ों टन सोने की खपत होती है। ग्रामीण भारत में आज भी सोने को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है। यही वजह है कि सरकार के किसी भी बयान या policy संकेत का असर तुरंत सर्राफा बाजार और ज्वेलरी stocks पर दिखाई देता है।
आगे क्या रहेगा बाजार का फोकस?
अब निवेशकों की नजर:
- global crude prices
- US-Iran tension
- डॉलर इंडेक्स
- और सरकार की अगली economic strategy
पर बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो सोने की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है, रुपया दबाव में रह सकता है और safe-haven buying बढ़ सकती है। हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से import duty बढ़ाने से इनकार के बाद बाजार को कुछ राहत जरूर मिली है।
Disclaimer
शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें।
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