भारत में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले वर्षों में देश के कई छोटे एयर रूट्स पर हवाई यात्रा लगभग खत्म हो सकती है। उनका कहना है कि हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन नेटवर्क इतना तेज और सुविधाजनक होगा कि लोग फ्लाइट छोड़कर ट्रेन से सफर करना ज्यादा पसंद करेंगे।
रेल मंत्री ने CII बिजनेस समिट में कहा कि जिस तरह जापान, चीन और दक्षिण कोरिया में हाई-स्पीड रेल ने घरेलू उड़ानों के बाजार को बदल दिया, उसी तरह भारत में भी ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
किन रूट्स पर सबसे बड़ा असर पड़ सकता है?
रेल मंत्री के मुताबिक मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे रूट्स पर बुलेट ट्रेन हवाई यात्रा को बड़ी चुनौती दे सकती है। उन्होंने कहा कि मुंबई से पुणे की दूरी केवल 48 मिनट में पूरी होगी। पुणे से हैदराबाद का सफर 1 घंटा 55 मिनट में होगा। हैदराबाद से बेंगलुरु 2 घंटे 8 मिनट में पहुंचा जा सकेगा और बेंगलुरु से चेन्नई की यात्रा सिर्फ 78 मिनट में पूरी होगी।
इतना कम यात्रा समय होने के बाद लोग एयरपोर्ट पर लंबी चेकिंग, ट्रैफिक, देरी और बोर्डिंग झंझट से बचने के लिए ट्रेन को प्राथमिकता दे सकते हैं।
“99% यात्रा रेलवे के कब्जे में होगी”
अश्विनी वैष्णव ने दावा किया कि भविष्य में इन छोटे और मिड-डिस्टेंस रूट्स पर 99 फीसदी यात्रा रेलवे के हिस्से में जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्टेशन शहर के भीतर हों, यात्रा समय कम हो और टिकट कीमत प्रतिस्पर्धी हो, तो बुलेट ट्रेन short-haul aviation market को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है।
सरकार कितना निवेश करने जा रही है?
रेल मंत्री ने बताया कि भारत सरकार बुलेट ट्रेन कॉरिडोर नेटवर्क पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों और घरेलू सप्लायर्स को मिलेगा। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री और रोजगार को बड़ा फायदा मिल सकता है।
जमीन अधिग्रहण पर क्या तैयारी है?
सरकार अब नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए तेजी से जमीन अधिग्रहण की तैयारी कर रही है। रेल मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रोजेक्ट्स को पहले की तुलना में ज्यादा तेज गति से पूरा करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि land acquisition और funding इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल रहेंगी।
एयरलाइंस कंपनियों पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क सफल होता है तो short-distance flights की मांग घट सकती है, एयरलाइंस की regional profitability प्रभावित हो सकती है और low-cost carriers पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में कई एयरलाइंस कंपनियां छोटे रूट्स से अच्छी कमाई करती हैं। ऐसे में बुलेट ट्रेन उनके लिए बड़ी प्रतिस्पर्धा बन सकती है।
दुनिया में क्या हुआ था?
जापान की Shinkansen, चीन की High-Speed Rail और दक्षिण कोरिया की KTX सेवाओं ने कई घरेलू एयर रूट्स पर बड़ा असर डाला था। कई routes पर फ्लाइट यात्रियों की संख्या घटी, ट्रेन यात्रियों की संख्या बढ़ी और एयरलाइंस को routes restructure करने पड़े।
भारत सरकार भी उसी मॉडल को अपनाने की कोशिश कर रही है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों के मुताबिक हाई-स्पीड रेल से यात्रा समय कम होगा, शहर से शहर connectivity बेहतर होगी, fuel consumption घटेगी और carbon emissions कम हो सकते हैं। इसके अलावा यात्रियों को airport check-in, baggage delays और traffic congestion जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
क्या चुनौतियां भी हैं?
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के सामने कई चुनौतियां भी हैं। इनमें भारी लागत, जमीन अधिग्रहण, टिकट प्राइसिंग और लंबे construction timelines सबसे बड़ी बाधाएं मानी जा रही हैं।
भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट कौन सा है?
भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है। यह प्रोजेक्ट जापान की तकनीकी और वित्तीय सहायता से तैयार किया जा रहा है।
FAQ
रेल मंत्री ने क्या दावा किया?
उन्होंने कहा कि छोटे रूट्स पर भविष्य में 99% यात्रा रेलवे के हिस्से में जा सकती है।
किन रूट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है?
मुंबई-पुणे, हैदराबाद-बेंगलुरु और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे रूट्स पर।
सरकार कितना निवेश करेगी?
करीब 16 लाख करोड़ रुपये।
एयरलाइंस पर क्या असर होगा?
Short-haul routes पर उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है।
भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट कौन सा है?
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर।
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