प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को देश के बड़े उद्योगपतियों का समर्थन मिलने लगा है। पीएम मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने, गैर-जरूरी सोने की खरीद टालने, विदेशी यात्राओं से बचने और खाद्य तेलों की खपत कम करने की अपील की थी। अब उद्योग जगत के कई बड़े नामों ने इसे भारत की आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी कदम बताया है।
उद्योगपतियों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना और घरेलू संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना बेहद जरूरी है।
किन उद्योगपतियों ने किया समर्थन?
टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने प्रधानमंत्री मोदी की आत्मनिर्भरता और विवेकपूर्ण उपभोग वाली अपील का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत को अपने संसाधनों के उपयोग में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
वहीं भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने भी पीएम मोदी की अपील को सही बताते हुए कहा कि यह समय भारत के लिए आर्थिक अनुशासन और घरेलू ताकत पर ज्यादा ध्यान देने का है।
SBI के आर्थिक सलाहकार ने क्या कहा?
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की अपील किसी तरह की राशनिंग लागू करने के लिए नहीं थी, बल्कि इसका मकसद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा करना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार फिलहाल rising crude oil prices और global uncertainty को लेकर सतर्क है।
पीएम मोदी ने आखिर क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए नागरिकों से कई अहम अपीलें की थीं।
उन्होंने लोगों से ईंधन की बचत करने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, गैर-जरूरी खरीदारी कम करने, विदेश यात्रा टालने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का आग्रह किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि “वर्तमान परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा बचाना देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।”
विदेशी मुद्रा बचाने पर क्यों जोर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, खासकर कच्चा तेल, सोना और खाद्य तेल। इन सभी के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर crude oil महंगा हो, gold imports बढ़ें और विदेशी मुद्रा भंडार घटे, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से सरकार फिलहाल imports को लेकर सतर्क रणनीति अपनाना चाहती है।
वर्क फ्रॉम होम पर फिर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए digital work models को फिर से बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने work from home, virtual meetings और online conferences को फिर से अपनाने की सलाह दी ताकि fuel consumption कम हो, travel expenses घटें और विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
सोने की खरीद टालने की अपील क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील भी की। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े gold importers में शामिल है और देश अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से खरीदता है।
इससे foreign exchange reserves पर दबाव बढ़ता है।
खाद्य तेल पर भी चिंता क्यों?
पीएम मोदी ने खाद्य तेल की खपत कम करने की भी सलाह दी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा edible oil भी आयात करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ज्यादा edible oil imports और महंगे global commodity prices देश के import bill को बढ़ा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे सिर्फ अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि लोगों की सेहत को भी फायदा होगा।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि fuel conservation, lower imports और controlled consumption से भारत का current account pressure कम हो सकता है।
साथ ही इससे forex reserves मजबूत हो सकते हैं, रुपये पर दबाव घट सकता है और economic stability बेहतर हो सकती है।
FAQ
पीएम मोदी ने क्या अपील की?
उन्होंने ईंधन बचाने, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राएं कम करने की अपील की।
किन उद्योगपतियों ने समर्थन किया?
वेणु श्रीनिवासन और सुनील भारती मित्तल समेत कई उद्योगपतियों ने।
सरकार विदेशी मुद्रा को लेकर क्यों चिंतित है?
क्योंकि कच्चे तेल, सोने और खाद्य तेल के आयात से डॉलर पर दबाव बढ़ रहा है।
वर्क फ्रॉम होम पर क्यों जोर दिया गया?
ताकि ईंधन की बचत हो और travel-related खर्च कम हो सकें।
सोने की खरीद टालने का क्या कारण है?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना आयात करता है, जिससे forex reserves पर दबाव पड़ता है।
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