नई दिल्ली: भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) ने एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा फैक्टशीट के अनुसार देश में जन धन खातों की संख्या बढ़कर 58.15 करोड़ हो गई है, जबकि इन खातों में जमा कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर चुकी है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत हुई थी तब देश की बड़ी आबादी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी। ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी। पिछले 12 वर्षों में यह योजना दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय समावेशन अभियान के रूप में उभरी है।
2014 में क्यों शुरू की गई थी जन धन योजना?
प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत अगस्त 2014 में की गई थी। उस समय सरकार का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था जिनके पास कोई बैंक खाता नहीं था।
योजना के तहत शून्य बैलेंस (Zero Balance) खाते खोलने की सुविधा दी गई। इसके साथ रुपे डेबिट कार्ड, दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट सुविधा और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसे लाभ भी जोड़े गए।
सरकार का मानना था कि जब तक गरीब परिवारों के पास बैंक खाते नहीं होंगे तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके पास नहीं पहुंच सकेगा। इसी सोच के साथ जन धन योजना को आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी से जोड़ा गया, जिसे बाद में JAM (Jan Dhan-Aadhaar-Mobile) ट्रिनिटी कहा गया।
58.15 करोड़ खातों का क्या मतलब है?
58.15 करोड़ खातों का आंकड़ा केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है। यह दर्शाता है कि देश की बड़ी आबादी अब औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार इन खातों में जमा राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। इसका मतलब यह है कि केवल खाते खोलने का लक्ष्य ही पूरा नहीं हुआ बल्कि लोग इन खातों का सक्रिय रूप से उपयोग भी कर रहे हैं।
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वित्तीय समावेशन कार्यक्रम की सफलता का आकलन खातों की संख्या से ज्यादा उनमें मौजूद जमा राशि और लेनदेन की सक्रियता से किया जाता है। इस दृष्टि से जन धन योजना ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
महिलाओं की भागीदारी सबसे बड़ी उपलब्धि
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार कुल जन धन खातों में लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं।
यह आंकड़ा महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं का पहले बैंकिंग प्रणाली से सीधा जुड़ाव नहीं था। जन धन योजना ने महिलाओं को न केवल बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा बल्कि सरकारी सहायता सीधे उनके खातों में पहुंचाने का रास्ता भी आसान बनाया।
विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं के नाम पर खातों की बढ़ती संख्या परिवारों की आर्थिक भागीदारी और वित्तीय सशक्तिकरण का संकेत देती है।
JAM ट्रिनिटी ने कैसे बदली सरकारी योजनाओं की तस्वीर?
जन धन योजना की सफलता के पीछे JAM ट्रिनिटी को सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक माना जाता है।
JAM का अर्थ है:
- Jan Dhan Account
- Aadhaar
- Mobile
इन तीनों को जोड़कर सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) प्रणाली को मजबूत किया।
इस व्यवस्था के जरिए गैस सब्सिडी, किसान सम्मान निधि, छात्रवृत्ति, वृद्धावस्था पेंशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जाने लगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और फर्जी लाभार्थियों पर भी काफी हद तक रोक लगी।
आयुष्मान भारत योजना का भी हुआ विस्तार
वित्त मंत्रालय की फैक्टशीट में केवल जन धन योजना ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया है।
सरकार के अनुसार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत जारी कार्डों की संख्या 44 करोड़ तक पहुंच गई है।
यह योजना पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करती है। वर्तमान में यह देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को कवर करती है।
सरकार ने मार्च 2024 में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के परिवारों को भी योजना में शामिल किया था। इसके बाद 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को भी योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया।
उज्ज्वला और आवास योजनाओं का असर
फैक्टशीट के अनुसार गरीब परिवारों के लिए 10 करोड़ एलपीजी कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना और महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ से अधिक पक्के मकानों का निर्माण भी किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे करोड़ों लोगों को बेहतर आवास सुविधाएं मिली हैं।
क्या चुनौतियां अब भी बाकी हैं?
हालांकि जन धन योजना को बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बैंक खाता खोलना पर्याप्त नहीं है। खातों का नियमित उपयोग, डिजिटल बैंकिंग की समझ और वित्तीय साक्षरता बढ़ाना अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई खाताधारक अभी भी सीमित बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान, बीमा, पेंशन और छोटे ऋणों तक पहुंच बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
निष्कर्ष
58.15 करोड़ जन धन खाते और 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा राशि इस बात का संकेत हैं कि भारत का वित्तीय समावेशन अभियान अब केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव का बड़ा माध्यम बन चुका है। जन धन योजना, आधार और मोबाइल आधारित JAM ट्रिनिटी ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है। आने वाले वर्षों में यदि वित्तीय साक्षरता और डिजिटल सेवाओं का विस्तार इसी गति से जारी रहता है तो यह योजना भारत की आर्थिक संरचना को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


