भारत सरकार की Electronics Component Manufacturing Scheme (ECMS) ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतते हुए लक्षित निवेश का लगभग दोगुना निवेश आवेदन प्राप्त किया है। 30 सितंबर 2025 तक स्कीम के तहत ₹1,15,351 करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जबकि योजना का प्रारंभिक लक्ष्य ₹59,350 करोड़ था।
यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
📈 निवेश और उत्पादन का आंकलन

- निवेश आवेदन: ₹1,15,351 करोड़ (लक्ष्य: ₹59,350 करोड़)
- उत्पादन अनुमान: ₹10,34,751 करोड़ (लक्ष्य: ₹4,56,500 करोड़)
- रोजगार सृजन: 1,41,801 नौकरियाँ (लक्ष्य: 91,600)
- प्रोत्साहन व्यय: ₹41,468 करोड़ (लक्ष्य: ₹22,805 करोड़)
ECMS योजना भारत को 2030-31 तक $500 बिलियन के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगी।
🏭 उद्योग की अभूतपूर्व भागीदारी

इस योजना में उद्योग की भागीदारी रिकॉर्ड स्तर की रही।
- एक प्रमुख कंपनी ने ₹22,000 करोड़ का निवेश करने का प्रस्ताव दिया।
- निवेश मुख्य रूप से स्मार्ट पासिव्स, लमिनेट्स, फ्लेक्सिबल पीसीबी, एनोड्स और कैपिटल इक्विपमेंट के क्षेत्रों में किया जा रहा है।
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🔋 महत्वपूर्ण परियोजनाएँ
- लिथियम-आयन बैटरी संयंत्र:
हरियाणा में भारत का पहला उन्नत लिथियम-आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित किया गया है। यह देश की वार्षिक घरेलू मांग का लगभग 40% पूरा करेगा। - सेमीकंडक्टर परियोजनाएँ:
ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पंजाब में ₹4,594 करोड़ की लागत से चार नई सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाएँ मंजूर की गई हैं।
📊 निष्कर्ष

ECMS योजना ने साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन गया है।
- यह “आत्मनिर्भर भारत” (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- देश की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ रही है और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की ओर बढ़ रहा है।
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