भारत और नेपाल के बीच आर्थिक और लोगों के आपसी संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान को आसान बनाने के लिए UPI-NPI क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म शुरू किया गया है। इस पहल के बाद भारत और नेपाल के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में भुगतान करने या पैसे भेजने के लिए पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अब भारतीय पर्यटक नेपाल में और नेपाली नागरिक भारत में डिजिटल माध्यम से आसानी से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि सीमा पार व्यापार, रेमिटेंस और आम लोगों के दैनिक लेन-देन में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या है UPI-NPI क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम?
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) दुनिया के सबसे सफल डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में से एक माना जाता है। दूसरी ओर नेपाल नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) नेपाल की डिजिटल भुगतान प्रणाली है।
दोनों प्लेटफॉर्म के आपस में जुड़ने के बाद अब दोनों देशों के बैंकिंग और डिजिटल भुगतान नेटवर्क के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो गया है। इससे रियल-टाइम में पैसे भेजना और प्राप्त करना संभव होगा।
इस व्यवस्था के तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप, डिजिटल वॉलेट या UPI आधारित एप्लिकेशन की मदद से सुरक्षित और तेज भुगतान कर सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लेन-देन के लिए लंबी बैंकिंग प्रक्रिया या पारंपरिक मनी ट्रांसफर एजेंसियों पर निर्भरता कम हो जाएगी।
नेपाल और भारत के नागरिकों को क्या होगा फायदा?
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के लाखों नागरिक नियमित रूप से एक-दूसरे के देश में आते-जाते हैं। बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत में काम करते हैं जबकि भारतीय कारोबारी और पर्यटक नेपाल का दौरा करते हैं।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पैसे भेजने और प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। अब उपयोगकर्ताओं को बैंक खाता संख्या, IFSC कोड या अन्य जटिल विवरण साझा करने की जरूरत नहीं होगी। केवल मोबाइल नंबर, UPI ID या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के जरिए भुगतान संभव होगा।
इससे समय की बचत होगी और गलत खाते में पैसा जाने का जोखिम भी कम होगा।
घर पैसे भेजना हुआ आसान
भारत में काम कर रहे नेपाली नागरिकों के लिए यह सुविधा सबसे अधिक उपयोगी मानी जा रही है। पहले उन्हें बैंक ट्रांसफर या मनी ट्रांसफर एजेंसियों का सहारा लेना पड़ता था, जिसमें समय और अतिरिक्त शुल्क दोनों लगते थे।
अब वे सीधे अपने मोबाइल फोन से परिवार के सदस्यों को पैसे भेज सकेंगे। इसी तरह नेपाल में काम करने वाले भारतीय नागरिक भी अपने देश में आसानी से राशि ट्रांसफर कर पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच होने वाले छोटे और मध्यम स्तर के रेमिटेंस ट्रांजेक्शन में तेजी आ सकती है।
पर्यटकों को नहीं ले जाना पड़ेगा ज्यादा कैश
नेपाल घूमने जाने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत आने वाले नेपाली यात्रियों को अब बड़ी मात्रा में नकदी रखने की आवश्यकता कम हो जाएगी।
पहले विदेशी मुद्रा बदलने, एक्सचेंज रेट देखने और नकद रखने की परेशानी होती थी। कई बार यात्रियों को स्थानीय मुद्रा प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ता था।
डिजिटल भुगतान सुविधा शुरू होने के बाद पर्यटक सीधे अपने मोबाइल से होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और दुकानों पर भुगतान कर सकेंगे। इससे यात्रा का अनुभव अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनेगा।
स्थानीय व्यापारियों को मिलेगा लाभ
नेपाल के स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों और छोटे व्यापारियों के लिए भी यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारतीय पर्यटकों की संख्या नेपाल में बड़ी है। अब उन्हें नकद लेने या करेंसी एक्सचेंज कराने की आवश्यकता नहीं होगी। सीधे डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से कारोबार की पारदर्शिता बढ़ेगी और भुगतान तुरंत खाते में पहुंच जाएगा।
इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से छोटे व्यवसायों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने में भी मदद मिल सकती है।
कम लागत और अधिक पारदर्शिता
पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर सेवाओं में कई बार सेवा शुल्क और मुद्रा विनिमय शुल्क अधिक होता है। डिजिटल भुगतान प्रणाली इन लागतों को कम करने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार UPI आधारित ट्रांजेक्शन कम लागत, तेज गति और बेहतर पारदर्शिता प्रदान करते हैं। यही वजह है कि कई देश भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक में रुचि दिखा रहे हैं।
भारत की डिजिटल ताकत का बढ़ता प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की रणनीति अपनाई है। NPCI International की पहल के तहत कई देशों में UPI आधारित भुगतान सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं।
नेपाल के इस नेटवर्क से जुड़ने के बाद भारत की डिजिटल भुगतान पहुंच और मजबूत हुई है। इससे भारत की फिनटेक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के साथ-साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
इन देशों में पहले से काम कर रहा है UPI
नेपाल के शामिल होने के बाद उन देशों की संख्या और बढ़ गई है जहां भारतीय यात्री UPI आधारित भुगतान का उपयोग कर सकते हैं। इनमें सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, मॉरीशस, भूटान, कतर, श्रीलंका और कंबोडिया जैसे देश शामिल हैं।
भारत सरकार और NPCI आने वाले समय में अन्य देशों के साथ भी इसी तरह की साझेदारी पर काम कर रहे हैं, जिससे भारतीय नागरिकों के लिए विदेशों में डिजिटल भुगतान और आसान हो सके।
निष्कर्ष
भारत और नेपाल के बीच शुरू हुई UPI-NPI डिजिटल भुगतान व्यवस्था दोनों देशों के नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। इससे पैसे भेजने की प्रक्रिया आसान होगी, नकदी पर निर्भरता घटेगी और सीमा पार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे के साथ भारत की फिनटेक ताकत का वैश्विक प्रभाव भी लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है।


