डिजिटल पेमेंट की दुनिया में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जिस रफ्तार से बदलाव देखा है, उसमें यूपीआई (UPI) सबसे बड़ा गेम चेंजर बनकर सामने आया है। अब स्थिति यह हो गई है कि सब्जी खरीदने से लेकर ऑटो रिक्शा का किराया देने तक, हर जगह लोग मोबाइल निकालकर स्कैन करते हैं और कुछ सेकंड में पेमेंट पूरा हो जाता है। इस डिजिटल क्रांति के केंद्र में मौजूद है भीम यूपीआई ऐप, जिसने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की है।
NPCI BHIM Services Limited के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भीम ऐप के ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में पिछले वित्त वर्ष के दौरान 301 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि अब भारत में डिजिटल भुगतान लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
छोटे भुगतान से लेकर बड़ी खरीदारी तक बढ़ा इस्तेमाल
कुछ साल पहले तक छोटी दुकानों पर डिजिटल पेमेंट करना मुश्किल माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अगर आप किसी शेयर ऑटो में बैठते हैं और छुट्टे पैसे नहीं होते, तो ड्राइवर तुरंत कहता है — “BHIM कर दीजिए।” यही बदलाव भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की असली ताकत है।
किराने की दुकान, दूध-दही की दुकान, चाय का ठेला, पंक्चर बनाने वाला, फूड स्टॉल, मेडिकल स्टोर और यहां तक कि ग्रामीण इलाकों के छोटे व्यापारियों तक भी BHIM UPI पहुंच चुका है। यही वजह है कि पिछले एक साल में इसके उपयोग में विस्फोटक तेजी देखने को मिली है।
एक साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़े मंथली ट्रांजेक्शन
NPCI BHIM Services Limited के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2025 में BHIM ऐप पर 5.93 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए थे। वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 21.6 करोड़ पहुंच गया। यानी सिर्फ एक साल में ट्रांजेक्शन की संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई।
अगर अप्रैल 2026 के आंकड़ों को देखें तो इस महीने में: 22.49 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए, कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू 26,040 करोड़ रुपये रही यह दिखाता है कि अब लोग सिर्फ छोटे भुगतान ही नहीं बल्कि बड़े ट्रांजेक्शन के लिए भी BHIM ऐप का उपयोग कर रहे हैं।
रोजमर्रा की जरूरतों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल
भीम ऐप के उपयोग का सबसे बड़ा कारण इसकी सरलता और भरोसा है। लोग इसे रोजमर्रा की जरूरतों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। मर्चेंट ट्रांजेक्शन डेटा के अनुसार: सबसे ज्यादा उपयोग किराना खरीदारी में हुआ, कुल ट्रांजेक्शन में ग्रोसरी सेक्टर की हिस्सेदारी 22.5% रही, फूड आउटलेट और रेस्टोरेंट का हिस्सा 18.7% रहा
इसके अलावा: क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी 6.4%, ई-कॉमर्स की हिस्सेदारी 3.9%, फ्यूल स्टेशन का योगदान 3.4% रहा
यह आंकड़े साफ बताते हैं कि अब डिजिटल पेमेंट केवल ऑनलाइन शॉपिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी की बुनियादी जरूरत बन चुका है।
पश्चिम बंगाल बना सबसे तेजी से बढ़ता बाजार
BHIM UPI ऐप के लिए पश्चिम बंगाल तेजी से उभरते बाजारों में शामिल हो गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में Peer-to-Merchant (P2M) ट्रांजेक्शन का हिस्सा 71 फीसदी रहा।
इसका मतलब यह है कि लोग दुकानों, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यापारिक सेवाओं में तेजी से BHIM UPI का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे व्यापारियों के बीच QR कोड पेमेंट की बढ़ती स्वीकार्यता इसकी सबसे बड़ी वजह है।
लोगों का डिजिटल पेमेंट पर बढ़ रहा भरोसा
NPCI BHIM Services Limited की एमडी और सीईओ ललिता नटराज के अनुसार, BHIM ऐप की यह तेजी लोगों के बढ़ते भरोसे का संकेत है। उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट अब भारत के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में लोग: किराना खरीदारी, खाना-पीना, यात्रा किराया, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल पेमेंट जैसी जरूरतों के लिए BHIM ऐप का लगातार उपयोग कर रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि कोविड महामारी के बाद डिजिटल भुगतान को जो गति मिली थी, वह अब स्थायी व्यवहार में बदल चुकी है। अब लोग नकद रखने की बजाय मोबाइल से भुगतान करना ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं।
रुपे क्रेडिट कार्ड और नए फीचर्स से बढ़ रही लोकप्रियता
BHIM ऐप की लोकप्रियता बढ़ने का एक बड़ा कारण नए फीचर्स भी हैं। अब यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इससे लोगों को बिना नकद या डेबिट कार्ड के भी आसान भुगतान की सुविधा मिल रही है।
इसके अलावा BHIM ऐप: 15 से अधिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, आसान इंटरफेस देता है, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रहा है. डिजिटल इंडिया अभियान और सरकार की कैशलेस इकोनॉमी नीति का भी इसमें बड़ा योगदान माना जा रहा है।
Google Pay और PhonePe के बीच BHIM की अलग पहचान
हालांकि भारत के यूपीआई बाजार में Google Pay और PhonePe का बड़ा दबदबा है, लेकिन BHIM ऐप की खास बात इसका सरकारी और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म होना है। कई यूजर्स इसे सुरक्षित और सरल विकल्प मानते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में: सरकारी सेवाओं, सब्सिडी भुगतान, छोटे व्यापारियों, ग्रामीण बाजार में BHIM ऐप की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिल रही नई ताकत
भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट बाजारों में शामिल हो चुका है। यूपीआई ट्रांजेक्शन हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। ऐसे में BHIM ऐप की यह 300 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दिखाती है कि देश तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है।
डिजिटल पेमेंट की यह लहर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों तक पहुंच चुकी है। आने वाले वर्षों में BHIM UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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