IND vs SL: भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन ने आखिरकार टीम इंडिया के लिए टेस्ट डेब्यू कर लिया। 33 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले सारांश ने डेब्यू के साथ ही एक खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह 21वीं सदी में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं।
सारांश जैन को भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में कुलदीप यादव की जगह शामिल किया गया है। कुलदीप वायरल इंफेक्शन से पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं, जिसके कारण वह दूसरे टेस्ट के लिए चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, जरूरत पड़ने पर उन्हें कनकशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
33 साल 145 दिन की उम्र में टेस्ट डेब्यू
सारांश जैन ने 33 साल 145 दिन की उम्र में अपना पहला टेस्ट मैच खेला। इसके साथ ही उन्होंने 21वीं सदी में भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यू करने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
इससे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व भारतीय विकेटकीपर सबा करीम के नाम था, जिन्होंने साल 2000 में बांग्लादेश के खिलाफ 32 साल 362 दिन की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया था। सारांश ने अब उनसे आगे निकलकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
हालांकि, भारत के लिए सबसे ज्यादा उम्र में टेस्ट डेब्यू करने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड सारांश जैन के नाम नहीं है। यह रिकॉर्ड रुस्तमजी जामशेदजी के नाम है। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ 41 साल 27 दिन की उम्र में भारत के लिए अपना पहला और एकमात्र टेस्ट मैच खेला था।
वहीं, टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा उम्र में डेब्यू करने का विश्व रिकॉर्ड इंग्लैंड के जेम्स साउथर्टन के नाम है। उन्होंने 1877 में 49 साल 119 दिन की उम्र में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था।
कौन हैं सारांश जैन?
सारांश जैन मध्य प्रदेश के अनुभवी ऑलराउंडर हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत दाएं हाथ की ऑफ-स्पिन गेंदबाजी है, जबकि वह निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी भी कर सकते हैं।
सारांश ने करीब एक दशक पहले फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा था। लगातार घरेलू क्रिकेट खेलने और प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली है।
उनका फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली है। 54 मैचों में सारांश ने 2,223 रन बनाए हैं और 188 विकेट हासिल किए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 31.75 और गेंदबाजी औसत 27.30 रहा है। गेंदबाजी में वह 10 बार एक पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट भी ले चुके हैं।
रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन ने बदली किस्मत
सारांश जैन के लिए 2025-26 रणजी ट्रॉफी सीजन बेहद खास रहा। उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए बल्ले और गेंद दोनों से शानदार योगदान दिया।
सीजन में सारांश ने 518 रन बनाए और 30 विकेट हासिल किए। उनके प्रदर्शन ने उन्हें घरेलू क्रिकेट के प्रमुख ऑलराउंडरों में शामिल कर दिया और यहीं से राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान उनकी ओर गया।
इसके बाद उन्होंने दलीप ट्रॉफी और इंडिया ए के लिए भी अपने प्रदर्शन से दावेदारी मजबूत की। घरेलू क्रिकेट में लगातार बेहतर प्रदर्शन का फायदा उन्हें आखिरकार भारतीय टेस्ट टीम में मिला।
इंडिया ए के लिए भी दिखाया दम
भारतीय टीम में जगह बनाने से पहले सारांश जैन ने इंडिया ए के लिए भी शानदार प्रदर्शन किया था। श्रीलंका के खिलाफ अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज में उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से प्रभावित किया।
दूसरे अनऑफिशियल टेस्ट में सारांश ने छह विकेट लेने के साथ नाबाद 70 रन की पारी खेली थी। इस प्रदर्शन ने उनके ऑलराउंड कौशल को एक बार फिर सामने रखा और भारतीय टीम के दरवाजे उनके लिए खुल गए।
IPL में भी नहीं मिली थी जगह
सारांश जैन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने आईपीएल खेले बिना ही भारतीय टेस्ट टीम तक का सफर तय किया है। वह आईपीएल 2024, 2025 और 2026 के ऑक्शन में अपना नाम दर्ज करा चुके थे, लेकिन किसी फ्रेंचाइजी ने उन्हें नहीं खरीदा।
इसके बावजूद उन्होंने घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में अपना प्रदर्शन जारी रखा और अंततः टीम इंडिया की टेस्ट कैप हासिल कर ली।
कुलदीप यादव की जगह क्यों चुने गए सारांश?
दूसरे टेस्ट में कुलदीप यादव वायरल इंफेक्शन से पूरी तरह उबर नहीं पाए, जिसके चलते उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना पड़ा। ऐसे में टीम मैनेजमेंट ने सारांश जैन को मौका दिया।
सारांश की ऑफ-स्पिन गेंदबाजी के साथ उनकी बल्लेबाजी टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प भी देती है। भारत ने उन्हें श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में मौका देकर उनके लंबे घरेलू करियर को इंटरनेशनल स्तर पर आजमाने का फैसला किया है।
33 की उम्र में मिला सबसे बड़ा मौका
सारांश जैन का टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर युवा खिलाड़ियों की तरह तेज नहीं रहा। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वर्षों तक मेहनत की, लगातार प्रदर्शन किया और 30 की उम्र पार करने के बाद अपनी पहचान को और मजबूत किया।
अब 33 साल की उम्र में मिली भारत की टेस्ट कैप उनके लंबे इंतजार का इनाम है। डेब्यू के साथ 21वीं सदी के सबसे उम्रदराज भारतीय टेस्ट डेब्यूटेंट का रिकॉर्ड बनाना उनके करियर को और खास बना देता है।


