नई दिल्ली: दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ताजा घटनाक्रम में ओमान की ओर से इस जलडमरूमध्य के पास पहुंचे कम से कम 8 जहाजों ने अचानक यू-टर्न ले लिया, जिससे यह संकेत मिला कि क्षेत्र में समुद्री आवाजाही अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट और शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इन जहाजों में तेल टैंकर, बल्क कैरियर और कमोडिटी ले जाने वाले पोत शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल समुद्री सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।
ओमान के तट के पास पहुंचते ही बदला जहाजों का रास्ता
शुक्रवार और शनिवार के बीच फारस की खाड़ी से बाहर निकल रहे कई जहाज होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार तक पहुंचे। इनमें से कुछ जहाज मुसंडम प्रायद्वीप के निकट तक पहुंच गए थे, लेकिन अचानक दिशा बदलकर वापस लौट गए।
बाद में इनमें से चार जहाज ईरान द्वारा बताए गए समुद्री मार्ग से आगे बढ़े, जबकि अन्य ने फिलहाल अपनी यात्रा रोक दी। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने शिपिंग कंपनियों और तेल कारोबारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आखिर जहाजों ने यू-टर्न क्यों लिया?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जहाजों ने वापस लौटने का फैसला किस कारण लिया। हालांकि, पिछले कुछ समय से ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को उसके निर्धारित मार्ग का पालन करना चाहिए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने हाल के महीनों में बताया कि उन्हें ईरानी सुरक्षा बलों की ओर से रेडियो संदेश भेजकर चेतावनी दी गई कि तेहरान की अनुमति के बिना आगे बढ़ना उचित नहीं होगा।
यही कारण है कि कई शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं और जोखिम वाले मार्गों से बचने की कोशिश कर रही हैं।
कुछ जहाजों पर पहले भी हो चुके हैं हमले
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले और जब्ती की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की चिंता और बढ़ा दी है।
जहाजों के चालक दल की सुरक्षा, बीमा लागत और माल ढुलाई का जोखिम बढ़ने से समुद्री परिवहन महंगा हो सकता है। यदि ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर भी दिखाई दे सकता है।
युद्ध से बेहतर, लेकिन सामान्य नहीं हुआ ट्रैफिक
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार से अब तक औसतन प्रतिदिन लगभग 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं। यह संख्या संघर्ष के दौरान दर्ज औसत से अधिक है, लेकिन युद्ध शुरू होने से पहले के सामान्य स्तर से अब भी काफी कम मानी जा रही है।
संयुक्त समुद्री सूचना केंद्र (Joint Maritime Information Center) के अनुसार, 30 जून और 1 जुलाई के बीच 65 जहाज ओमान की दिशा से गुजरे, जिनमें से 59 जहाजों को अमेरिका समर्थित समुद्री सुरक्षा व्यवस्था का सहयोग प्राप्त था।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी है रणनीतिक खींचतान
हालांकि जून के मध्य में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री आवाजाही को लेकर तनाव कम करने की कोशिश हुई थी, लेकिन दोनों देशों के रुख में अब भी स्पष्ट मतभेद दिखाई देते हैं।
- ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपने प्रभाव और नियंत्रण का दावा करता है।
- अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और यहां निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण शिपिंग कंपनियां किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
क्यों पूरी दुनिया की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर रहती है?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापारिक मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
यदि यहां लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो—
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- एशिया और यूरोप तक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
- शिपिंग और बीमा लागत में वृद्धि हो सकती है।
- वैश्विक महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन 8 जहाजों का एक साथ यू-टर्न लेना यह दिखाता है कि समुद्री कंपनियां अब भी जोखिम को लेकर सतर्क हैं। आने वाले दिनों में यदि सुरक्षा स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।


