Market Trend Today: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत बेहद अहम रहने वाली है। लगातार छह कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या घरेलू बाजार दबाव से बाहर निकलकर रिकवरी की राह पकड़ेगा या खराब ग्लोबल संकेतों के चलते बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। शुरुआती संकेतों की बात करें तो GIFT निफ्टी में मामूली बढ़त दिखाई दे रही है, लेकिन एशियाई बाजारों में तेज गिरावट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचा ब्रेंट क्रूड भारतीय बाजार के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
सुबह करीब 8:20 बजे GIFT निफ्टी 31 अंक या 0.13% की बढ़त के साथ 24,210 के आसपास कारोबार कर रहा था। यह संकेत दे रहा था कि निफ्टी 50 की शुरुआत लगभग सपाट से हल्की बढ़त के साथ हो सकती है। हालांकि, शुरुआती संकेतों के बावजूद दिन के कारोबार में ग्लोबल मार्केट का रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
लगातार छठे दिन गिरा बाजार
मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बार फिर निराशाजनक रहा। सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63% गिरकर 77,235.46 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 132.75 अंक यानी 0.55% की गिरावट के साथ 24,154.90 पर बंद हुआ।
इसके साथ ही निफ्टी में लगातार छठे कारोबारी सत्र गिरावट दर्ज की गई। लगातार कमजोरी के बाद अब बाजार में यह सवाल उठ रहा है कि क्या मौजूदा स्तरों से शॉर्ट टर्म में बाउंसबैक देखने को मिलेगा या फिर इंडेक्स नई कमजोरी की ओर बढ़ सकता है।
बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि घरेलू स्तर पर कुछ खरीदारी के बावजूद ग्लोबल मार्केट से मजबूत सपोर्ट नहीं मिल रहा है। ऐसे में निवेशकों को बुधवार के कारोबार में खास तौर पर शुरुआती तेजी में जल्दबाजी से खरीदारी करने से बचने की जरूरत हो सकती है।
GIFT Nifty से क्या संकेत मिल रहे हैं?
GIFT निफ्टी को भारतीय बाजार की शुरुआती दिशा का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है। बुधवार सुबह इसमें करीब 31 अंकों की बढ़त दिखाई दी। हालांकि यह बढ़त बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए इससे बाजार में बड़ी तेजी के संकेत नहीं मिलते।
GIFT निफ्टी की चाल फिलहाल यही संकेत दे रही है कि भारतीय बाजार सपाट से हल्की बढ़त के साथ खुल सकता है, लेकिन ओपनिंग के बाद ग्लोबल सेंटीमेंट का असर हावी हो सकता है।
विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर होगी कि निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,150 के आसपास के सपोर्ट को बचा पाता है या नहीं। यदि यह स्तर कायम रहता है तो शॉर्ट टर्म में रिकवरी की कोशिश देखने को मिल सकती है। इसके उलट 24,150 के नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। ग्लोबल सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जारी बिकवाली और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
AI सेक्टर में कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर भी बाजार में सवाल उठ रहे हैं। बढ़ती ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड के बीच निवेशक हाई-वैल्यूएशन वाले टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों में जोखिम कम करते नजर आए।
MSCI एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में करीब 1.6% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 6.8% तक टूट गया। Samsung Electronics और SK Hynix जैसे प्रमुख सेमीकंडक्टर शेयरों में 7% से ज्यादा की गिरावट ने दक्षिण कोरियाई बाजार पर खास दबाव बनाया।
जापान में भी कमजोरी रही। Topix करीब 2.3% गिरा, जबकि Nikkei 225 Futures में करीब 2.5% की गिरावट दिखाई दी। Hang Seng Futures भी लाल निशान में रहा।
एशियाई बाजारों में इतनी तेज गिरावट भारतीय निवेशकों के लिए भी चिंता का संकेत है, क्योंकि ग्लोबल रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट का असर घरेलू इक्विटी पर पड़ सकता है।
अमेरिकी बाजार भी दबाव में
मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में भी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र गिरावट देखने को मिली। सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव रहा।
Nasdaq Composite करीब 1.33% गिरा, जबकि S&P 500 में 0.69% की गिरावट दर्ज की गई। Dow Jones Industrial Average भी करीब 0.22% नीचे बंद हुआ।
अमेरिकी बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगाई को लेकर बनी चिंताएं हैं। इसके अलावा मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों और महंगाई पर दोबारा दबाव बढ़ने की आशंका भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही है।
खास बात यह है कि अमेरिकी 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब दो दशकों के उच्च स्तर के आसपास पहुंच गई है। बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी शेयर बाजार के लिए आम तौर पर नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे इक्विटी की तुलना में बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं।
ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के ऊपर
भारतीय शेयर बाजार के लिए एक और चिंता कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड लगातार चौथे सत्र बढ़त में रहा और 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।
ब्रेंट क्रूड करीब 0.29% बढ़कर 91.28 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 85.31 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई तथा रुपये पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। इसका असर कॉरपोरेट लागत और बाजार के व्यापक सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है।
निफ्टी के लिए कौन से लेवल अहम?
मौजूदा तकनीकी स्थिति को देखते हुए निफ्टी के लिए 24,150 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। मंगलवार को निफ्टी 24,154.90 पर बंद हुआ था, इसलिए बुधवार के कारोबार में यह स्तर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, निफ्टी का शॉर्ट टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर फिलहाल सतर्क से मंदी की ओर बना हुआ है।
ऊपर की तरफ अहम स्तर
- 24,250-24,300: तत्काल रेजिस्टेंस जोन
- 24,400: महत्वपूर्ण ब्रेकआउट लेवल
- 24,500-24,600: 24,400 के ऊपर टिकने पर अगला संभावित जोन
अगर निफ्टी 24,250-24,300 के ऊपर मजबूती से टिकता है तो बाजार में रिकवरी की कोशिश दिखाई दे सकती है। वहीं 24,400 के ऊपर लगातार टिकाव आने पर शॉर्ट टर्म सेंटीमेंट में सुधार की संभावना बढ़ सकती है और इंडेक्स 24,500-24,600 की तरफ बढ़ सकता है।
नीचे की तरफ अहम स्तर
- 24,150: तत्काल सपोर्ट
- 24,000: अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट
- 23,800: कमजोरी बढ़ने पर अगला प्रमुख स्तर
यदि निफ्टी 24,150 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में 24,000 और फिर 23,800 के स्तरों की तरफ गिरावट देखने को मिल सकती है।
आज बाजार में क्या रणनीति रखें?
मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में आक्रामक दांव लगाने के बजाय सावधानी बरतना बेहतर हो सकता है। एक तरफ GIFT निफ्टी मामूली बढ़त का संकेत दे रहा है, लेकिन दूसरी तरफ एशियाई बाजारों की तेज गिरावट, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें जोखिम बढ़ा रही हैं।
ऐसे में ट्रेडर्स को निफ्टी के 24,150-24,300 जोन पर विशेष नजर रखनी चाहिए। 24,300 के ऊपर मजबूती आने पर तेजी की स्थिति बन सकती है, जबकि 24,150 के नीचे फिसलने पर कमजोरी बढ़ने की आशंका रहेगी।
कुल मिलाकर बुधवार को भारतीय बाजार की शुरुआत भले ही GIFT निफ्टी के संकेतों के आधार पर बहुत कमजोर न हो, लेकिन ग्लोबल संकेत बाजार की तेजी को सीमित कर सकते हैं। लगातार छह दिनों की गिरावट के बाद किसी भी रिकवरी को टिकाऊ तेजी मानने से पहले निफ्टी के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल के ऊपर मजबूती देखना जरूरी होगा।
निवेशकों के लिए संदेश: बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच बिना सोचे-समझे ट्रेड लेने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस के स्तरों को ध्यान में रखकर जोखिम प्रबंधन पर फोकस करना जरूरी है।
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