Hindustan Copper Mega Plan: हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद अपनी माइनिंग क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना पेश की है। सरकारी कंपनी अगले 5-6 वर्षों में ₹7,000 करोड़ से अधिक का निवेश कर अपनी खनन क्षमता को मौजूदा 4 MTPA से बढ़ाकर 12.20 MTPA करने की तैयारी में है। यानी कंपनी की क्षमता करीब तीन गुना हो जाएगी।
HighLights
- HCL का टैक्स से पहले मुनाफा ₹1,232.73 करोड़ रहा, जो पिछले साल से लगभग दोगुना है।
- कंपनी ₹7,000 करोड़ से ज्यादा CAPEX के जरिए माइनिंग क्षमता 4 MTPA से बढ़ाकर 12.20 MTPA करेगी।
- भारत में कॉपर की मांग बढ़ने के बीच HCL घरेलू उत्पादन और रणनीतिक साझेदारियों पर फोकस कर रही है।
नई दिल्ली। भारत में कॉपर की बढ़ती मांग के बीच देश की प्रमुख सरकारी कॉपर माइनिंग कंपनी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) ने अपने विस्तार को लेकर बड़ा प्लान सामने रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड वित्तीय प्रदर्शन के बाद कंपनी अब आने वाले वर्षों में खनन क्षमता को लगभग तीन गुना करने की तैयारी कर रही है।
HCL भारत की एकमात्र वर्टिकली इंटीग्रेटेड कॉपर उत्पादक कंपनी है। कंपनी के पास देश के कॉपर अयस्क संसाधनों का करीब 45 फीसदी हिस्सा है। इसके प्रमुख खनन क्षेत्रों में मध्य प्रदेश का मलांजखंड, राजस्थान का खेतड़ी और झारखंड का घाटशिला शामिल हैं।
मुनाफा लगभग दोगुना
वित्त वर्ष 2025-26 HCL के लिए मजबूत रहा। कंपनी का टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) ₹1,232.73 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹633.51 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर PBT लगभग दोगुना हुआ।
कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू भी बढ़कर ₹3,077.92 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि कॉपर की मांग और कंपनी की परिचालन क्षमता दोनों में मजबूती आई है।
कॉपर ओर प्रोडक्शन में भी बढ़ोतरी
HCL ने उत्पादन के मोर्चे पर भी बेहतर प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने करीब 3.67 मिलियन टन कॉपर ओर का उत्पादन किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 6 फीसदी अधिक है।
वहीं, मेटल-इन-कंसंट्रेट (MIC) उत्पादन में करीब 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी के मुताबिक यह पिछले सात वर्षों में MIC उत्पादन का सबसे मजबूत प्रदर्शन रहा।
₹7,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश
अब कंपनी का सबसे बड़ा फोकस अपनी खनन क्षमता बढ़ाने पर है। HCL मौजूदा 4 MTPA की माइनिंग क्षमता को बढ़ाकर 12.20 MTPA करना चाहती है।
इसके लिए अगले 5-6 वर्षों में ₹7,000 करोड़ से अधिक का CAPEX करने की योजना है। इस निवेश का इस्तेमाल मौजूदा खदानों के विस्तार, बंद या निष्क्रिय खदानों को दोबारा शुरू करने और नई खनन संभावनाओं को विकसित करने में किया जा सकता है।
अगर योजना तय समय के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो HCL भारत के बढ़ते कॉपर बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकती है।
वेदांता, हिंडाल्को और अदाणी से अलग है HCL की भूमिका
भारत के कॉपर सेक्टर में कई बड़ी निजी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें अनिल अग्रवाल की वेदांता, कुमार मंगलम बिड़ला की हिंडाल्को और गौतम अदाणी की कच्छ कॉपर जैसी कंपनियां शामिल हैं।
हालांकि HCL की खासियत यह है कि यह घरेलू स्तर पर कॉपर माइनिंग से जुड़ी प्रमुख सरकारी कंपनी है। भारत में घरेलू कॉपर अयस्क उत्पादन सीमित होने के कारण देश को अपनी कॉपर जरूरतों के एक हिस्से के लिए आयात पर भी निर्भर रहना पड़ता है।
यही वजह है कि HCL की माइनिंग क्षमता बढ़ाने की योजना को भारत की कॉपर सप्लाई सिक्योरिटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेशी कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी
HCL सिर्फ घरेलू खदानों के विस्तार पर निर्भर नहीं रहना चाहती। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर चिली की दिग्गज कॉपर कंपनी CODELCO के साथ भी साझेदारी की है।
इसके अलावा घरेलू स्तर पर HCL ने NTPC Mining, RITES, IOCL और Coal India जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। इन साझेदारियों का उद्देश्य खनिज संसाधनों की खोज, तकनीकी सहयोग और भारत की दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा को मजबूत करना है।
भारत में कॉपर की मांग क्यों बढ़ रही है?
कॉपर को आधुनिक अर्थव्यवस्था की सबसे अहम औद्योगिक धातुओं में गिना जाता है। बिजली के तारों से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ग्रिड, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर तक इसकी व्यापक जरूरत होती है।
भारत में प्रति व्यक्ति कॉपर की खपत अभी करीब 0.6 किलोग्राम बताई जाती है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 3.2 किलोग्राम है। इसका मतलब है कि भारत में आर्थिक विकास और औद्योगिकीकरण बढ़ने के साथ कॉपर की खपत में आगे काफी गुंजाइश मौजूद है।
सरकार के Make in India, स्मार्ट सिटी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे अभियानों से भी कॉपर की मांग को लंबी अवधि में सपोर्ट मिल सकता है।
EV और ग्रीन एनर्जी से बढ़ेगी मांग
इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में अधिक कॉपर का इस्तेमाल होता है। इसी तरह सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भी बिजली ट्रांसमिशन और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कॉपर की जरूरत होती है।
ऐसे में भारत अगर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, EV उत्पादन और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाता है, तो कॉपर की घरेलू मांग में भी तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।
HCL के लिए क्यों अहम है यह विस्तार?
HCL की 12.20 MTPA क्षमता तक पहुंचने की योजना केवल कंपनी के उत्पादन को बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध भारत की कॉपर सप्लाई चेन और आयात निर्भरता से भी है।
अगर कंपनी नई खदानों को समय पर विकसित करने और मौजूदा प्रोजेक्ट्स का विस्तार करने में सफल रहती है, तो घरेलू स्तर पर कॉपर अयस्क की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे भारत के कॉपर उद्योग को लंबी अवधि में फायदा मिल सकता है।
हालांकि ₹7,000 करोड़ से अधिक का निवेश और बड़े पैमाने पर माइनिंग विस्तार अपने साथ प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन, पर्यावरणीय मंजूरियों, जमीन, तकनीकी क्षमता और कमोडिटी कीमतों से जुड़े जोखिम भी लेकर आता है। इसलिए आने वाले वर्षों में कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी विस्तार योजनाओं को कितनी तेजी और कुशलता से लागू करती है।
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड मुनाफे के बाद HCL का ₹7,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश प्लान कंपनी को भारत के तेजी से बढ़ते कॉपर बाजार में और मजबूत स्थिति दिला सकता है। माइनिंग क्षमता 4 MTPA से बढ़ाकर 12.20 MTPA करने का लक्ष्य पूरा हुआ तो HCL की उत्पादन क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और भारत की घरेलू कॉपर सप्लाई को भी मजबूती मिल सकती है।


