Asian Market Today: 19 अगस्त को एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली। सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी शेयरों में जोरदार बिकवाली ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया। इसके अलावा बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी अमेरिकी टेक शेयरों में हुई भारी बिकवाली के बाद देखने को मिली।
दक्षिण कोरिया का बाजार सबसे ज्यादा दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में कोस्पी (Kospi) करीब 5.89% तक टूट गया, जबकि स्मॉल-कैप इंडेक्स कोस्डैक (Kosdaq) 3.62% गिर गया। तेज गिरावट के कारण कोस्डैक में कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी।
कोस्पी में भारी गिरावट, Samsung और SK Hynix टूटे
दक्षिण कोरिया के प्रमुख टेक शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। Samsung Electronics करीब 7% और SK Hynix 8% से ज्यादा गिर गया। सेमीकंडक्टर कंपनियों में बिकवाली बढ़ने से पूरे कोरियाई बाजार पर दबाव देखने को मिला।
सेमीकंडक्टर शेयरों में हाल के कारोबारी सत्रों में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। निवेशक अब टेक कंपनियों के वैल्यूएशन, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक ब्याज दरों के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
जापान और ऑस्ट्रेलिया के बाजार भी कमजोर
एशिया के दूसरे प्रमुख बाजारों में भी गिरावट रही। जापान का Nikkei 225 करीब 1.04% नीचे आया, जबकि व्यापक Topix में 1.01% की गिरावट दर्ज की गई।
ऑस्ट्रेलिया का बेंचमार्क S&P/ASX 200 भी करीब 0.50% गिरकर खुला। ग्लोबल टेक शेयरों में बिकवाली और बॉन्ड मार्केट में कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया।
एशियाई टेक शेयरों में भारी बिकवाली
बुधवार को एशियाई टेक्नोलॉजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। अमेरिका में टेक कंपनियों की कमजोरी के बाद जापान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों में भी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की।
जापान में SoftBank Group 5.44%, जबकि चिप उपकरण बनाने वाली कंपनी Tokyo Electron 3.85% नीचे आई। Advantest में 3.93% और Kioxia में 9.13% की गिरावट दर्ज की गई।
दक्षिण कोरिया में SK Hynix 8.66% और Samsung Electronics 7.08% गिरा। वहीं Seoul Semiconductor में भी करीब 4.33% की गिरावट देखने को मिली।
सेमीकंडक्टर शेयरों में इतनी बड़ी गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये कंपनियां वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन की प्रमुख कड़ी हैं। ऐसे में इन शेयरों में बिकवाली का असर दूसरे एशियाई बाजारों पर भी पड़ सकता है।
वॉल स्ट्रीट में भी टेक शेयरों पर दबाव
एशियाई बाजारों की कमजोरी की एक बड़ी वजह अमेरिकी शेयर बाजार में पिछली रात हुई गिरावट भी रही। अमेरिकी बाजार में प्रमुख इंडेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुए।
Dow Jones करीब 116 अंक यानी 0.2% गिरा, जबकि S&P 500 में 0.7% की गिरावट रही। टेक्नोलॉजी शेयरों के दबाव के कारण Nasdaq Composite करीब 1.3% टूट गया।
अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में बुधवार को ज्यादा हलचल नहीं रही। Dow Jones futures में मामूली बढ़त रही, S&P 500 futures लगभग स्थिर रहे, जबकि Nasdaq 100 futures करीब 0.2% नीचे कारोबार कर रहे थे।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
एशियाई बाजारों पर कच्चे तेल की कीमतों का दबाव भी बना हुआ है। बुधवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली।
Brent crude futures करीब 0.29% बढ़कर 91.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI crude करीब 0.37 डॉलर बढ़कर 85.31 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सप्लाई को लेकर चिंता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कारण हैं। निवेशक यह भी देख रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई पर किसी तरह का असर पड़ता है या नहीं।
US-Iran तनाव पर बाजार की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने भी वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत नहीं हो रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इसे लेकर अलग दावा किया गया।
ऐसे विरोधाभासी बयानों के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। अगर तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर महंगाई और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
आज सोने की कीमत में भी तेजी
एशियाई बाजारों में गिरावट के बीच सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया ऊंचाई से कुछ नरमी आने के बाद सोने को सहारा मिला।
पिछले सत्र में करीब 2% की गिरावट के बाद स्पॉट गोल्ड करीब 0.2% बढ़कर 4,342.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 0.6% की गिरावट रही और यह 4,396.30 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा।
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर भी है। इससे ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति के संकेत मिल सकते हैं।
भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है असर
एशियाई बाजारों में इतनी बड़ी गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है। खासकर सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी, ऑटो और ग्लोबल मार्केट से जुड़े शेयरों में निवेशकों की नजर रहेगी।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी महत्वपूर्ण है। तेल महंगा होने पर महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल निवेशकों की नजर एशियाई बाजारों के अगले कारोबार, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बाजार के संकेतों पर रहेगी। बाजार में बढ़ी हुई अस्थिरता के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।
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