बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से कंपनी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर सफाई दी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने उस पर कोई जुर्माना या पेनल्टी नहीं लगाई है, बल्कि एनटीपीसी गैस आपूर्ति मामले से जुड़ी एक अपील खारिज होने के बाद अदालत ने 10 लाख रुपये की लागत (Costs) निर्धारित की है।
10 लाख रुपये जुर्माने की खबर पर RIL ने क्या कहा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 18 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंज को भेजी फाइलिंग में 17 अगस्त को सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी के मुताबिक, कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया था कि एनटीपीसी गैस आपूर्ति मामले में देरी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने RIL पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
कंपनी ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि अदालत का आदेश किसी दंड या पेनल्टी से संबंधित नहीं है। यह राशि अदालत द्वारा निर्धारित ‘कॉस्ट’ है, जो अपील खारिज होने के बाद लगाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी सफाई में 14 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के संबंधित हिस्से का भी उल्लेख किया है। आदेश के मुताबिक, एनटीपीसी गैस आपूर्ति मामले से जुड़ी रिलायंस इंडस्ट्रीज की अपील को खारिज कर दिया गया।
इसके साथ ही अदालत ने कंपनी पर 10 लाख रुपये की लागत निर्धारित की है। यह रकम सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन को दी जानी है। कंपनी को इस भुगतान के लिए पांच सप्ताह का समय दिया गया है।
इसलिए 10 लाख रुपये को सीधे तौर पर ‘जुर्माना’ कहना सही नहीं होगा। पेनल्टी और लीगल कॉस्ट में अंतर होता है। इस मामले में अदालत ने अपील खारिज होने के बाद लागत का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
सेबी को अलग से खुलासा क्यों नहीं किया?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने यह भी बताया कि चूंकि अदालत की ओर से निर्धारित राशि जुर्माना या पेनल्टी नहीं बल्कि लागत है, इसलिए सेबी के संबंधित नियमों के तहत इसके बारे में अलग से खुलासा करना आवश्यक नहीं था।
कंपनी ने बाजार में सामने आई खबरों के बाद निवेशकों के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण दिया।
शेयर बाजार में RIL का प्रदर्शन कैसा रहा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने यह सफाई 18 अगस्त को बाजार बंद होने के बाद रात करीब 8 बजे दी। मंगलवार को कंपनी का शेयर मामूली बढ़त के साथ करीब 1,322 रुपये के स्तर पर बंद हुआ।
हालांकि, इस साल रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर पर दबाव देखने को मिला है। मई से इसमें लगातार गिरावट रही और शेयर करीब 1,426 रुपये के स्तर से फिसलकर लगभग 1,253 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया।
कंपनी के शेयर ने इस साल अब तक करीब 15 फीसदी का नकारात्मक रिटर्न दिया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ी ‘जुर्माने’ की खबर के बाद RIL की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पूरा विवाद एनटीपीसी को गैस आपूर्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की अपील को खारिज करते हुए 10 लाख रुपये की लागत निर्धारित की।
इसलिए इस मामले को समझने का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 10 लाख रुपये की पेनल्टी नहीं लगाई गई है। अदालत ने अपील खारिज होने के बाद 10 लाख रुपये की लागत का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
निष्कर्ष
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने साफ कर दिया है कि ’10 लाख रुपये का जुर्माना’ वाली खबर को कंपनी की स्थिति के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 10 लाख रुपये की राशि को Costs के रूप में निर्धारित किया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन को देना है। कंपनी के अनुसार, यह कोई नियामकीय पेनल्टी नहीं है।


