High-Powered Committee on Banking: भारतीय बैंकिंग सेक्टर में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार बैंकिंग क्षेत्र को विकसित भारत के लक्ष्य का प्रमुख इंजन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 17 अगस्त को संकेत दिया कि सरकार बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित करने की तैयारी में है। यह समिति भविष्य के भारतीय बैंकिंग सिस्टम की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर व्यापक रोडमैप तैयार कर सकती है।
वित्त मंत्री ने यह बात दो दिवसीय ‘पीएसबी मंथन/संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में होने वाली चर्चा और सामने आने वाले सुझाव प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेंगे।
विकसित भारत के लिए बैंकिंग सेक्टर का नया रोडमैप
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी का मुख्य उद्देश्य यह आकलन करना होगा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समिति बैंकिंग सिस्टम की मौजूदा स्थिति, भविष्य की वित्तीय जरूरतों और अर्थव्यवस्था की बदलती मांगों को ध्यान में रखते हुए सुधारों की दिशा तय कर सकती है। सरकार का फोकस ऐसे सुझावों पर है, जिन्हें बैंकिंग सेक्टर में व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सके।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि बैंकिंग सुधारों के लिए यह सही समय है, क्योंकि भारतीय बैंक इस समय अपनी वित्तीय स्थिति के लिहाज से काफी मजबूत स्थिति में हैं।
सात प्रमुख मुद्दों पर हो रही चर्चा
दो दिवसीय सम्मेलन में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इन चर्चाओं का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम के लिए ऐसे सुझाव तैयार करना है, जो आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास को गति देने में मदद कर सकें।
इन सुझावों को प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी के व्यापक रोडमैप में शामिल किया जा सकता है। खास तौर पर बैंकिंग सेक्टर की पहुंच बढ़ाने, ग्राहकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने और गुणवत्तापूर्ण कर्ज वृद्धि को बढ़ावा देने पर जोर रहने की उम्मीद है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा NPA
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पिछले एक दशक के दौरान सबसे बड़ा बदलाव खराब कर्ज यानी NPA में आई भारी गिरावट के रूप में सामने आया है।
वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के सचिव संजय लोहिया के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारतीय बैंकों के पैमाने, स्थिरता और पहुंच में बड़ा बदलाव आया है। मजबूत बैलेंस शीट के कारण पब्लिक सेक्टर बैंक अब आर्थिक विकास को ज्यादा मजबूती से सपोर्ट करने की स्थिति में हैं।
इसका फायदा कृषि, MSME सेक्टर और समाज के उन वर्गों तक कर्ज पहुंचाने में भी मिल सकता है, जिन्हें पहले वित्तीय सेवाओं तक पहुंच हासिल करने में ज्यादा मुश्किल होती थी।
10 साल में बैंकिंग सेक्टर कितना बदला?
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2015 से मार्च 2026 के बीच भारतीय बैंकिंग सेक्टर के प्रमुख वित्तीय आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
कुल बैंकिंग कारोबार
मार्च 2015 में बैंकों का कुल कारोबार करीब ₹128 लाख करोड़ था। मार्च 2026 तक यह बढ़कर लगभग ₹283 लाख करोड़ हो गया। यानी एक दशक से थोड़ा अधिक समय में बैंकिंग कारोबार दोगुने से भी ज्यादा हो गया।
जमा राशि
बैंकों में ग्राहकों की कुल जमा राशि भी तेजी से बढ़ी है। मार्च 2015 में यह करीब ₹72 लाख करोड़ थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर ₹156 लाख करोड़ हो गई।
कुल लोन
बैंकों द्वारा दिए गए कुल कर्ज में भी बड़ा इजाफा हुआ है। मार्च 2015 में कुल बैंक क्रेडिट करीब ₹36 लाख करोड़ था। मार्च 2026 तक यह बढ़कर लगभग ₹127 लाख करोड़ हो गया।
बैंकों का मुनाफा
भारतीय बैंकिंग सेक्टर की कमाई में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। FY15 में बैंकों का कुल नेट प्रॉफिट करीब ₹45,000 करोड़ था, जो FY26 में बढ़कर लगभग ₹1.9 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
यानी इस अवधि में बैंकों के शुद्ध मुनाफे में चार गुना से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई।
Gross NPA में बड़ी गिरावट
बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत होने का एक बड़ा संकेत NPA के आंकड़ों से भी मिलता है। मार्च 2018 में भारतीय बैंकों का Gross NPA करीब 14.6% के शिखर पर पहुंच गया था।
मार्च 2026 तक इसमें भारी गिरावट आई और Gross NPA घटकर करीब 1.93% रह गया। इसी अवधि में Net NPA भी लगभग 8% से घटकर 2.39% रह गया।
NPA में यह गिरावट बैंकों की बैलेंस शीट को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण रही है और इससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता में भी सुधार हुआ है।
अब बैंकों का फोकस सिर्फ कर्ज बढ़ाने पर नहीं
बैंकिंग सेक्टर की अगली चुनौती सिर्फ ज्यादा कर्ज देना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बिजनेस ग्रोथ हासिल करना है। DFS सचिव संजय लोहिया के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर बैंकों को अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति का इस्तेमाल बेहतर और टिकाऊ कारोबार बढ़ाने के लिए करना होगा।
इसके साथ ही ग्राहकों की वित्तीय जरूरतें भी तेजी से बदल रही हैं। डिजिटल बैंकिंग, नए वित्तीय उत्पाद, MSME फाइनेंस, कृषि ऋण और व्यक्तिगत वित्त जैसी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बैंकों को अपनी सेवाओं में लगातार बदलाव करना होगा।
2047 तक विकसित भारत में बैंकों की बड़ी भूमिका
सरकार का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत बैंकिंग सिस्टम बेहद जरूरी है। बैंकों के जरिए अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों तक पूंजी पहुंचाने, निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार तथा कारोबार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ऐसे में प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी ऑन बैंकिंग आने वाले वर्षों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। समिति के सुझावों के आधार पर बैंकिंग सेक्टर में नए सुधार, बेहतर ग्राहक सेवाएं, मजबूत जोखिम प्रबंधन और गुणवत्तापूर्ण क्रेडिट ग्रोथ को लेकर नई रणनीति तैयार की जा सकती है।
कुल मिलाकर, पिछले एक दशक में NPA में कमी, मुनाफे में बढ़ोतरी, जमा और कर्ज में विस्तार के बाद भारतीय बैंकिंग सेक्टर अब अगले चरण की तैयारी कर रहा है। सरकार की नजर 2047 तक ऐसे बैंकिंग सिस्टम पर है, जो भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में मजबूत आधार की भूमिका निभाए।


