दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 97.47 लाख लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए हैं। ऐसे में करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन मतदाताओं का नाम हमेशा के लिए वोटर लिस्ट से हट गया है। ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका मिलेगा।
Delhi SIR: राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR का पहला चरण पूरा हो चुका है। बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) के जरिए मतदाताओं को दिए गए एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 17 अगस्त थी। अब चुनाव अधिकारियों की ओर से जमा किए गए फॉर्म के आधार पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार की जाएगी।
दिल्ली में कुल करीब 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 97.47 लाख यानी 67.18 प्रतिशत मतदाताओं ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा कर दिए हैं। इसका सीधा मतलब है कि करीब 47 लाख मतदाताओं के फॉर्म इस चरण में जमा नहीं हुए हैं। ऐसे मतदाताओं के नाम 24 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं दिख सकते हैं।
हालांकि, इसे अंतिम रूप से नाम कटना नहीं माना जाना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।
क्या 47 लाख वोटरों के नाम सच में कट जाएंगे?
SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या करीब 47 लाख लोगों के नाम सीधे वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। दरअसल, अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा। 47 लाख का आंकड़ा उन मतदाताओं से जुड़ा है जिनके एन्यूमरेशन फॉर्म 17 अगस्त तक जमा या संबंधित प्रक्रिया में दर्ज नहीं हो पाए।
इन मतदाताओं के नाम 24 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट सूची में शामिल न होने की संभावना है। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि कोई पात्र मतदाता ड्राफ्ट सूची में अपना नाम नहीं पाता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकता है।
इसलिए SIR के इस चरण को अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम वास्तव में सूची से बाहर रहे।
97.47 लाख एन्यूमरेशन फॉर्म जमा
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख लोगों ने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए। यह कुल मतदाता संख्या का 67.18 प्रतिशत है।
चुनाव अधिकारियों के स्तर पर जमा हुए फॉर्म को डिजिटाइज करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। SIR के तहत एन्यूमरेशन फॉर्म के जरिए मतदाता से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड और सत्यापित किया जा रहा है।
यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्राफ्ट मतदाता सूची तैयार करने में इन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। जिन मतदाताओं के फॉर्म रिकॉर्ड में नहीं हैं, उनके नाम को लेकर आगे दावा और आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दक्षिण दिल्ली में सबसे कम फॉर्म जमा
दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में एन्यूमरेशन फॉर्म जमा होने की दर में काफी अंतर देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण दिल्ली में फॉर्म जमा होने की दर सबसे कम रही।
दक्षिण दिल्ली में सिर्फ 56.32 प्रतिशत मतदाताओं से एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त हुए। यानी यहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के फॉर्म इस चरण में जमा नहीं हो सके।
दूसरी तरफ उत्तर दिल्ली में एन्यूमरेशन फॉर्म जमा होने की दर सबसे ज्यादा रही। यहां 75.68 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म जमा हुए।
इस अंतर से साफ है कि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों और जिलों में SIR प्रक्रिया की प्रगति एक जैसी नहीं रही।
रोहिणी में सबसे ज्यादा डिजिटाइजेशन
विधानसभा क्षेत्रों की बात करें तो रोहिणी में एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन की दर सबसे अधिक दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रोहिणी में कुल 1,50,398 मतदाता हैं।
इनमें से 1,25,478 फॉर्म यानी 83.43 प्रतिशत डिजिटाइज किए गए। वहीं 24,920 फॉर्म ऐसे बताए गए जिन्हें इकट्ठा नहीं किया जा सका।
डिजिटाइजेशन के मामले में रोहिणी के अलावा कई अन्य विधानसभा क्षेत्र भी आगे रहे। इनमें शकूर बस्ती, राजौरी गार्डन, मंगोलपुरी और उत्तम नगर प्रमुख हैं।
शकूर बस्ती में डिजिटाइजेशन की दर 81.26 प्रतिशत, राजौरी गार्डन में 79.14 प्रतिशत, मंगोलपुरी में 78.76 प्रतिशत और उत्तम नगर में 77.76 प्रतिशत रही।
तुगलकाबाद में सबसे कम डिजिटाइजेशन
दूसरी तरफ तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र में एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन की दर सबसे कम रही। यहां सिर्फ 52.15 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज किए गए।
तुगलकाबाद में करीब 47.85 प्रतिशत फॉर्म ऐसे रहे जिन्हें इकट्ठा नहीं किया जा सका। यही वजह है कि इस विधानसभा क्षेत्र में SIR की प्रक्रिया को लेकर आगे की दावा-आपत्ति प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि किसी पात्र मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आता है, तो उसे अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा प्रस्तुत करना होगा।
अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में क्या स्थिति रही?
दिल्ली के कई अल्पसंख्यक-बहुल विधानसभा क्षेत्रों में भी एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन की स्थिति अलग-अलग रही।
चांदनी चौक में डिजिटाइजेशन की दर 61.02 प्रतिशत दर्ज की गई, जो इन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम रही। वहीं दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म डिजिटाइजेशन का प्रतिशत इससे अधिक रहा।
आंकड़ों के अनुसार:
- मुस्तफाबाद: 71.91 प्रतिशत
- मटिया महल: 75.50 प्रतिशत
- सीलमपुर: 76.63 प्रतिशत
- बाबरपुर: 73 प्रतिशत
- बल्लीमारान: 67.35 प्रतिशत
इन आंकड़ों से पता चलता है कि एक ही श्रेणी के विधानसभा क्षेत्रों में भी फॉर्म जमा और डिजिटाइजेशन की स्थिति अलग-अलग रही है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट कब आएगी?
दिल्ली में SIR के तहत तैयार की जा रही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 24 अगस्त को प्रकाशित की जानी है। यह सूची आने के बाद मतदाता अपने नाम की स्थिति जांच सकेंगे।
यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो उसे दावा दाखिल करने का अवसर मिलेगा। इसी तरह किसी ऐसे व्यक्ति के नाम को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकती है, जिसे मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
इसलिए 24 अगस्त के बाद मतदाताओं के लिए अपने नाम की जांच करना बेहद जरूरी होगा।
27 अक्टूबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
SIR की पूरी प्रक्रिया के बाद दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को जारी की जाएगी। यानी 24 अगस्त की ड्राफ्ट सूची और 27 अक्टूबर की अंतिम सूची के बीच मतदाताओं को अपने नाम से जुड़ी किसी भी समस्या को दूर कराने का मौका मिलेगा।
खास तौर पर उन लोगों के लिए यह चरण अहम होगा जिनका एन्यूमरेशन फॉर्म समयसीमा के भीतर जमा नहीं हो पाया है या जिनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है।
ASDD कैटेगरी में आने वाले मतदाताओं को मिलेगा नोटिस
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होंगे, उन्हें कुछ मामलों में ASDD कैटेगरी से जुड़ी जानकारी या नोटिस मिल सकता है। ASDD का संबंध Absent, Shifted, Dead और Duplicate यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं से है।
इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि इसमें ऐसे नाम न रहें जो वास्तविक मतदाता से संबंधित नहीं हैं।
हालांकि, यदि किसी जीवित और पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर हो जाता है, तो उसके लिए दावा-आपत्ति की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी।
दिल्ली के मतदाताओं के लिए अब क्या जरूरी है?
SIR का पहला चरण पूरा होने के बाद अब दिल्ली के मतदाताओं को अगले चरण पर नजर रखनी होगी। 24 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अपना नाम जरूर चेक करें।
अगर नाम नहीं मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। पात्र मतदाताओं को दावा दाखिल करने का अवसर मिलेगा। इसके लिए चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना होगा।
कुल मिलाकर, दिल्ली में SIR के पहले चरण में करीब 67.18 प्रतिशत मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म जमा हुए हैं, जबकि करीब 33 प्रतिशत मतदाताओं के फॉर्म इस चरण में जमा नहीं हुए। यही करीब 47 लाख मतदाताओं की संख्या है, जिनके नाम ड्राफ्ट सूची में प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन 47 लाख नामों का ड्राफ्ट सूची से बाहर होना और स्थायी रूप से वोटर लिस्ट से हट जाना एक ही बात नहीं है। अंतिम स्थिति 27 अक्टूबर को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट और उससे पहले पूरी होने वाली दावा-आपत्ति प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।


