भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से दबाव देखने को मिला है, लेकिन अब बाजार के लिए तस्वीर धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स के राजेश कोठारी का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों में शेयर बाजार को कई सकारात्मक संकेतों से सपोर्ट मिल सकता है। उनके मुताबिक क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेजी भारतीय कंपनियों की कमाई को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कोठारी के अनुसार, अगर ये तीनों फैक्टर एक साथ मजबूत होते हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में सुधार देखने को मिलता है। पिछले एक-दो वर्षों में कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ बाजार पर दबाव की प्रमुख वजह रही है। हालांकि, जून तिमाही के नतीजों में कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत मिले हैं।
तेजी के लिए तीनों फैक्टर का मजबूत होना जरूरी
सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में राजेश कोठारी ने कहा कि जब क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ बढ़ती है तो इसका सीधा असर कंपनियों की अर्निंग्स पर पड़ता है। इससे बाजार में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।
उनका मानना है कि आने वाले महीनों में इन तीनों क्षेत्रों में सुधार बाजार के लिए सकारात्मक ट्रिगर साबित हो सकता है। हालांकि, बाजार की दिशा केवल इन संकेतकों पर निर्भर नहीं करेगी। ग्लोबल मार्केट, ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
क्रेडिट ग्रोथ में आया बड़ा सुधार
कोठारी के मुताबिक पिछले एक साल में बाजार पर दबाव डालने वाली कुछ स्थितियों में बदलाव आया है। इसके साथ ही भारतीय बाजार का वैल्यूएशन भी पहले की तुलना में अधिक सहज स्तर पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने बताया कि क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल करीब 9-10 फीसदी के आसपास थी, जो अब बढ़कर लगभग 18 फीसदी हो गई है। यह संकेत देता है कि देश में क्रेडिट साइकिल धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है।
बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज की मांग बढ़ने का असर आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। अगर यह रफ्तार बनी रहती है तो इससे कंपनियों की बिक्री और कमाई को भी सपोर्ट मिल सकता है।
कंजम्प्शन में सुधार से कंपनियों को फायदा
दूसरा बड़ा फैक्टर कंजम्प्शन है। कोठारी के अनुसार कोविड के बाद से करीब चार वर्षों तक कंजम्प्शन पर दबाव देखने को मिला। अब इसमें धीरे-धीरे सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं।
कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे बेहतर रहे हैं। अगर लोगों का खर्च बढ़ता है तो इसका सीधा फायदा एफएमसीजी, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और अन्य खपत आधारित कंपनियों को मिल सकता है।
कंजम्प्शन में लगातार सुधार कंपनियों की अर्निंग्स साइकिल को मजबूत कर सकता है। यही वजह है कि बाजार के लिए यह एक अहम सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कैपेक्स से इन सेक्टर्स को मिल सकता है फायदा
तीसरा महत्वपूर्ण फैक्टर कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी कैपेक्स है। कोठारी का मानना है कि देश में कैपेक्स गतिविधियां बढ़ रही हैं और इसका फायदा खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स से जुड़ी कंपनियों को मिल सकता है।
हालांकि, उन्होंने रियल एस्टेट को लेकर अभी भी सावधानी बरतने की बात कही है। दूसरी ओर, अगले दो से तीन वर्षों में टाइल्स, सैनिटरीवेयर, वायर और केबल्स जैसे क्षेत्रों में मांग मजबूत रहने की उम्मीद जताई गई है।
पिछले कुछ वर्षों में शुरू हुए कई रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट अब पूरा होने के करीब हैं। ऐसे में इनके निर्माण और फिनिशिंग से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।
एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का प्रदर्शन कमजोर
पिछले एक साल में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। इस अवधि में निफ्टी में करीब 2.49 फीसदी और सेंसेक्स में करीब 4.63 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार को इस दौरान कई बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जबकि बाद में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
हालांकि, अब अगर क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपेक्स में सुधार जारी रहता है तो कंपनियों की अर्निंग्स में मजबूती आने की संभावना बढ़ सकती है। यही बाजार के लिए अगले 6 से 12 महीनों में सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत बन सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट की राय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत जरूर देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार में बिना जोखिम के तेजी आएगी। निवेशकों को कंपनी की अर्निंग्स, वैल्यूएशन, सेक्टर की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या सेक्टर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश की सलाह न माना जाए।


