Gold Price: सोने की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड ने 4,600 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार कर लिया है, जबकि घरेलू वायदा बाजार में भी इसकी कीमत 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई है। कमजोर डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, बढ़ते राजकोषीय जोखिम और सुरक्षित निवेश की मांग ने सोने की कीमतों को मजबूती दी है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने में अभी भी निवेश का मौका है या फिर इतनी तेज तेजी के बाद नए निवेशकों को इंतजार करना चाहिए? एक्सपर्ट्स की राय है कि मौजूदा निवेशक अपनी होल्डिंग बनाए रख सकते हैं, लेकिन नए निवेशकों को मौजूदा ऊंचे स्तर पर एकमुश्त और आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,600 डॉलर के पार पहुंचा सोना
21 अगस्त को शुरुआती कारोबार में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत 1.07 फीसदी की बढ़त के साथ 4,620.10 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। यह 14 मई 2026 के बाद सोने का सबसे ऊंचा स्तर है। 14 मई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 4,659 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा था।
घरेलू बाजार की बात करें तो MCX पर अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड वायदा भी 0.85 फीसदी की तेजी के साथ 1,60,784 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारतीय बाजार में भी सोने की खरीदारी मजबूत बनी हुई है।
ऑगमॉन्ट बुलियन की 21 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सप्ताह प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में 5 फीसदी से अधिक की तेजी आई है। सोने ने अपनी पिछली ट्रेडिंग रेंज को तोड़ते हुए तेजी का नया आधार बनाया है।
आखिर सोने में इतनी तेजी क्यों आई?
सोने की मौजूदा तेजी के पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं। इनमें सबसे अहम अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में कमजोरी, अमेरिका की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता तथा सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग है।
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की लॉन्ग-टर्म डेट बायबैक योजना में बढ़ोतरी की खबर के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर में कमजोरी देखने को मिली। आमतौर पर जब डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है तो सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट की मांग को फायदा मिलता है।
सोने को किसी कंपनी या सरकार की कमाई पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यही वजह है कि जब निवेशकों को अर्थव्यवस्था, महंगाई, ब्याज दरों या सरकारी कर्ज को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई देती है, तो वे अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड का हिस्सा बढ़ाना पसंद करते हैं।
सोने ने 4,500 डॉलर का लक्ष्य हासिल किया
ऑगमॉन्ट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, सोने ने 4,340-4,440 डॉलर प्रति औंस की पिछली रेंज को निर्णायक रूप से पार कर लिया है। इसके बाद गोल्ड ने 4,500 डॉलर का लक्ष्य हासिल किया।
रिपोर्ट में अब सोने के लिए अगला महत्वपूर्ण स्तर 4,600 डॉलर प्रति औंस बताया गया है। मौजूदा तेजी को देखते हुए यह स्तर भी बाजार के लिए अहम बन गया है।
हालांकि, किसी भी एसेट में लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए केवल तेजी देखकर बाजार में प्रवेश करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
सोने को कहां से मिल रहा है तेजी का ईंधन?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, सोने की कीमतें ढाई महीने से अधिक समय के हाई के आसपास कारोबार कर रही हैं। कम बॉन्ड यील्ड से मिलने वाले सपोर्ट के साथ-साथ महंगाई और बढ़ते फिस्कल रिस्क को लेकर निवेशकों की चिंता ने भी गोल्ड को मजबूती दी है।
अमेरिकी सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ना भी सोने के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अमेरिका का फेडरल कर्ज 40 लाख करोड़ डॉलर से अधिक होने के बाद सरकारी वित्तीय स्थिति की स्थिरता को लेकर सवाल फिर उठे हैं।
इसके साथ ही 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव भी सोने की दिशा के लिए महत्वपूर्ण है। लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और ब्याज खर्च निवेशकों को सॉवरेन डेट रिस्क से बचाव के विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित कर सकता है।
ऐसे माहौल में गोल्ड को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर फायदा मिल सकता है।
डॉलर और ट्रेजरी यील्ड पर रहेगी नजर
आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा तय करने में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड की भूमिका बेहद अहम रहेगी।
अगर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमजोरी जारी रहती है तो सोने को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके विपरीत डॉलर और यील्ड में तेज उछाल आने पर गोल्ड में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
यही वजह है कि निवेशकों को केवल घरेलू MCX गोल्ड की कीमत देखने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की चाल पर भी नजर रखनी चाहिए।
फेड के ब्याज दर फैसले का क्या होगा असर?
सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति हमेशा से एक महत्वपूर्ण फैक्टर रही है। ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर आमतौर पर गोल्ड को फायदा मिलता है, क्योंकि बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की आकर्षकता घट सकती है।
इसके उलट अगर महंगाई को देखते हुए फेड लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचा रखने के संकेत देता है, तो सोने पर दबाव बन सकता है।
इसलिए आने वाले समय में निवेशकों को फेड के ब्याज दर संबंधी संकेतों के साथ-साथ महंगाई, रोजगार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों पर भी नजर रखनी चाहिए।
भू-राजनीतिक तनाव भी सोने के लिए अहम
गोल्ड की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक अन्य बड़ा फैक्टर भू-राजनीतिक तनाव है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव बढ़ने पर निवेशक अक्सर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों की तरफ रुख करते हैं।
मिडिल ईस्ट से जुड़ी घटनाओं का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ता है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जबकि तनाव कम होने और तेल की कीमतों में नरमी आने पर महंगाई संबंधी चिंताएं कुछ कम हो सकती हैं।
हालांकि, अगर भू-राजनीतिक जोखिम घटते हैं और निवेशकों का रिस्क सेंटीमेंट मजबूत होता है, तो सेफ-हेवन एसेट के तौर पर गोल्ड की मांग में कुछ कमी आ सकती है।
क्या अभी सोने में निवेश करना चाहिए?
सोने में तेजी के बावजूद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। VT Markets के रुचित ठाकुर के मुताबिक, महंगे स्तर पर चल रही रैली का पीछा करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
जिन निवेशकों के पास पहले से गोल्ड है, वे अपनी होल्डिंग को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, नए निवेशकों के लिए मौजूदा स्तरों पर पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है।
यानी अगर सोने की कीमत में आगे किसी गिरावट या करेक्शन का मौका मिलता है तो निवेशक किस्तों में खरीदारी कर सकते हैं। इससे एक ही ऊंचे स्तर पर पूरी पूंजी लगाने का जोखिम कम किया जा सकता है।
नए निवेशकों के लिए SIP जैसी रणनीति बेहतर
अगर किसी निवेशक का नजरिया लंबी अवधि का है तो वह गोल्ड में निवेश के लिए नियमित और चरणबद्ध रणनीति अपना सकता है। उदाहरण के लिए, पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय उसे कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग स्तरों पर निवेश किया जा सकता है।
इस रणनीति का फायदा यह है कि अगर कीमत आगे बढ़ती है तो निवेशक बाजार में पूरी तरह से बाहर नहीं रहता और अगर कीमत में गिरावट आती है तो कम स्तर पर अतिरिक्त खरीदारी का मौका मिल जाता है।
हालांकि, निवेश का तरीका व्यक्ति की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और कुल पोर्टफोलियो पर निर्भर होना चाहिए।
मौजूदा गोल्ड निवेशकों को क्या करना चाहिए?
जिन लोगों ने सोने में काफी पहले निवेश किया हुआ है, उनके लिए मौजूदा तेजी मुनाफे को सुरक्षित करने का मौका भी हो सकती है। लेकिन केवल कीमत बढ़ने के आधार पर पूरी होल्डिंग बेच देना भी जरूरी नहीं है।
लंबी अवधि के निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड का उचित आवंटन बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो में पहले से ही गोल्ड का हिस्सा काफी ज्यादा हो गया है, वे जोखिम और एसेट एलोकेशन की समीक्षा कर सकते हैं।
निष्कर्ष
सोने की कीमतों में इस सप्ताह 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी ने निवेशकों का ध्यान फिर से गोल्ड की तरफ खींचा है। कमजोर डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बदलाव, बढ़ते फिस्कल रिस्क और सुरक्षित निवेश की मांग गोल्ड के लिए फिलहाल सकारात्मक फैक्टर हैं।
तकनीकी तौर पर भी सोना 4,500 डॉलर का स्तर पार कर चुका है और अब 4,600 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, इतनी तेज तेजी के बाद किसी भी समय मुनाफावसूली या करेक्शन देखने को मिल सकता है।
ऐसे में मौजूदा निवेशक अपनी होल्डिंग बनाए रख सकते हैं, जबकि नए निवेशकों को ऊंचे स्तर पर आक्रामक खरीदारी से बचकर गिरावट में चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार करना चाहिए। निवेशकों को आगे फेड की नीति, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर लगातार नजर रखनी होगी।
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