तमिलनाडु सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के लिए सोने की अंगूठी देने वाली योजना की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने शुरुआती चरण में करीब 1.28 लाख सोने की अंगूठियों की सप्लाई के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया है। इन अंगूठियों पर लगभग 220 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अंगूठियों की सप्लाई की जिम्मेदारी देश की दो बड़ी ज्वेलरी कंपनियों जॉयअलुक्कास और कल्याण ज्वेलर्स को दी गई है।
सरकार की योजना के मुताबिक, शुरुआती चार महीने के दौरान एक लाख से अधिक नवजात बच्चों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। योजना की औपचारिक शुरुआत 15 सितंबर से किए जाने की तैयारी है। यह तारीख तमिलनाडु के प्रमुख द्रविड़ नेता सीएन अन्नादुरई की जयंती से भी जुड़ी है।
यह योजना चुनावी घोषणापत्र में किए गए उस वादे का हिस्सा है, जिसमें सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को सोने की अंगूठी देने की बात कही गई थी। सरकार का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने और सरकारी अस्पतालों में प्रसव को प्रोत्साहित करना बताया गया है।
22 जून से जन्मे बच्चों को योजना का लाभ
सरकार के अनुसार, योजना के शुरुआती चरण में उन बच्चों को शामिल किया जाएगा, जिनका जन्म 22 जून से सरकारी अस्पतालों में हुआ है। इस तारीख को योजना से जोड़ने के पीछे राजनीतिक और कार्यक्रम से संबंधित कारण बताए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शुरुआती चरण के लिए कुल 1,28,499 सोने की अंगूठियों की व्यवस्था की जा रही है। ये अंगूठियां 22 कैरेट सोने की होंगी। करीब 128.5 किलोग्राम वजन वाले इस शुरुआती बैच की अनुमानित लागत लगभग 220 करोड़ रुपये बताई गई है।
सरकार ने पूरे एक साल के लिए करीब 4,41,667 अंगूठियों की सप्लाई का प्रावधान किया है। इसके लिए लगभग 755.83 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। हालांकि सोने की कीमत बाजार भाव के अनुसार बदलने की वजह से अंतिम लागत में बदलाव संभव है।
1 ग्राम की होगी सोने की अंगूठी
योजना के तहत तैयार की जाने वाली प्रत्येक अंगूठी का वजन करीब 1 ग्राम रखा गया है। सरकार ने सोने की कीमत का भुगतान मौजूदा बाजार दर के आधार पर करने की व्यवस्था की है। इसके अलावा अंगूठियों की प्रोसेसिंग, इंश्योरेंस, ट्रांसपोर्टेशन और BIS हॉलमार्किंग जैसे खर्च भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल किए गए हैं।
तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन यानी TNMSC ने लाभार्थियों के लिए शुरुआती 1,28,499 अंगूठियों की सप्लाई के लिए दो कंपनियों को वर्क ऑर्डर दिया है।
जॉयअलुक्कास को 70%, कल्याण ज्वेलर्स को 30% काम
अंगूठियों की सप्लाई का सबसे बड़ा हिस्सा जॉयअलुक्कास को मिला है। कंपनी को कुल ऑर्डर का 70 फीसदी हिस्सा दिया गया है। वहीं, कल्याण ज्वेलर्स को 30 फीसदी हिस्से की जिम्मेदारी मिली है।
आंकड़ों के मुताबिक, जॉयअलुक्कास को करीब 89,949 अंगूठियां तैयार करनी हैं, जबकि कल्याण ज्वेलर्स करीब 38,550 अंगूठियों की सप्लाई करेगा।
सरकार ने बताया कि शुरुआती बैच के लिए दोनों कंपनियों को 70:30 के अनुपात में काम सौंपा गया है। योजना के आगे बढ़ने के साथ लाभार्थियों की संख्या और अंगूठियों की सप्लाई भी बढ़ सकती है।
टेंडर में सिर्फ 1 पैसे की बोली पर विवाद
इस योजना की सबसे ज्यादा चर्चा इसके टेंडर को लेकर हुई है। विधानसभा में विपक्ष ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इतनी बड़ी खरीद के लिए सफल बोली लगाने वाली कंपनी ने अतिरिक्त शुल्क के तौर पर सिर्फ 1 पैसे की बोली कैसे लगाई।
बताया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में कुल 11 कंपनियों ने हिस्सा लिया था। अन्य बोलीदाताओं की ओर से अतिरिक्त शुल्क के रूप में 410.97 रुपये से लेकर 15,000 रुपये से अधिक तक की राशि बताई गई थी।
इसके मुकाबले जॉयअलुक्कास ने सोने की कीमत को छोड़कर अतिरिक्त सेवा शुल्क के तौर पर केवल 0.01 रुपये की बोली लगाई। कंपनी के मुताबिक, यह मौजूदा सोने की कीमत से सिर्फ एक पैसे अधिक का सांकेतिक सर्विस चार्ज था।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि करीब 755 करोड़ रुपये की कुल टेंडर वैल्यू में सोने की कीमत सबसे बड़ा हिस्सा है। ऐसे में केवल एक पैसे का सर्विस चार्ज पूरे टेंडर की लागत को नहीं दर्शाता।
कल्याण ज्वेलर्स ने भी लगाई समान बोली
सरकार के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में संबंधित नियमों के तहत अन्य बोलीदाताओं को सफल बोली की जानकारी दी गई थी। इसके बाद कल्याण ज्वेलर्स ने भी उसी कीमत पर बोली लगाई।
इसके आधार पर दोनों कंपनियों को अंगूठियों की सप्लाई का काम 70:30 के अनुपात में बांटा गया।
सरकार का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई और अंगूठियों की खरीद में सोने की बाजार कीमत को मुख्य लागत के रूप में शामिल किया गया है।
सरकार का क्या है योजना के पीछे उद्देश्य?
सरकार के मुताबिक, सोने की अंगूठी देने वाली इस योजना का उद्देश्य सिर्फ नवजात बच्चों को एक उपहार देना नहीं है। इसके पीछे सरकारी अस्पतालों में लोगों का भरोसा बढ़ाने और वहां प्रसव को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य भी है।
सरकार का मानना है कि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चे के जन्म के समय सोने की अंगूठी एक महत्वपूर्ण उपहार हो सकती है। योजना के जरिए बच्चे के जन्म को यादगार बनाने के साथ-साथ सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
चार महीने के शुरुआती चरण में एक लाख से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके बाद पूरे साल के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुसार योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा।
विपक्ष ने उठाए खरीद प्रक्रिया पर सवाल
योजना को लेकर विधानसभा में विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। विपक्ष ने खास तौर पर इस बात पर आपत्ति जताई कि सोने की अंगूठियों की खरीद की जिम्मेदारी तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन को क्यों दी गई।
विपक्ष का तर्क है कि TNMSC का मुख्य काम दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जरूरी सामान की खरीद करना रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में सोने की अंगूठियों की खरीद को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विपक्ष ने टेंडर में सिर्फ एक पैसे की सर्विस फीस को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि सरकार और संबंधित कंपनी ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि सोने की कीमत कुल खरीद लागत का मुख्य हिस्सा है और एक पैसे की बोली केवल अतिरिक्त सर्विस चार्ज से संबंधित है।
योजना को लेकर आगे क्या?
सरकार ने शुरुआती चरण के लिए 1,28,499 अंगूठियों की सप्लाई का आदेश जारी कर दिया है। अब ज्वेलरी कंपनियों की ओर से इन अंगूठियों को तैयार करने और तय प्रक्रिया के तहत लाभार्थियों तक पहुंचाने की तैयारी की जाएगी।
पूरे एक साल के लिए करीब 4.41 लाख अंगूठियों का प्रावधान किए जाने से साफ है कि सरकार इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है। हालांकि योजना के वास्तविक खर्च पर सोने की बाजार कीमत का सीधा असर पड़ेगा।
फिलहाल इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकारी अस्पताल में बच्चे के जन्म पर परिवार को सरकार की ओर से 1 ग्राम की 22 कैरेट सोने की अंगूठी दी जाएगी। वहीं, टेंडर में एक पैसे की सर्विस फीस को लेकर उठा विवाद इस योजना को राजनीतिक बहस का विषय भी बना चुका है।


