भारत में सोने की खरीदारी सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा, सामाजिक प्रतिष्ठा और भावनाओं से भी जुड़ी होती है। लेकिन अब तेजी से बढ़ती कीमतों और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच गोल्ड खरीदने का ट्रेंड बदलता नजर आ रहा है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में लोग भारी और हाई-कैरेट ज्वेलरी की बजाय हल्के, कम कैरेट और एक्सचेंज आधारित खरीदारी की तरफ ज्यादा झुक सकते हैं।
यह बदलाव ऐसे समय सामने आ रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील की है। इसके बाद ज्वेलरी इंडस्ट्री को उम्मीद है कि ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अब पुराने गहनों को एक्सचेंज करेंगे, रीसाइक्लिंग पर जोर देंगे, कम वजन वाले गहने खरीदेंगे, कम कैरेट गोल्ड की तरफ बढ़ेंगे और सिल्वर व लाइटवेट डायमंड ज्वेलरी अपनाएंगे। यानी “कम लागत में ज्यादा वैल्यू” वाला ट्रेंड तेजी पकड़ सकता है।
क्यों बदल रहा है गोल्ड खरीदने का ट्रेंड?
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय तनाव, डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण गोल्ड लगातार महंगा होता गया। भारत में 24 कैरेट सोना रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंच चुका है। शादी-ब्याह की ज्वेलरी बेहद महंगी हो गई है और मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है।
ऐसे में ग्राहक अब “स्मार्ट खरीदारी” का रास्ता चुन रहे हैं। यानी लोग अब ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिनमें डिजाइन बना रहे, वजन कम हो, लागत नियंत्रित रहे और पुराना सोना इस्तेमाल हो सके। इसी वजह से गोल्ड एक्सचेंज और रीसाइक्लिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।
पीएम मोदी की अपील का कितना असर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि वे एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें। उनका फोकस विदेशी मुद्रा बचाने और आयात बिल कम करने पर था। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड आयातक देशों में शामिल है। जब देश ज्यादा सोना आयात करता है तो डॉलर की मांग बढ़ती है, चालू खाते का घाटा बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आता है।
इसी वजह से सरकार लंबे समय से गोल्ड आयात कम करने की कोशिश करती रही है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीएम की अपील के बाद लोग जरूरत आधारित खरीदारी करेंगे। हाई-वैल्यू ज्वेलरी की मांग धीमी पड़ सकती है और एक्सचेंज मॉडल और मजबूत हो सकता है।
कम कैरेट ज्वेलरी क्यों हो रही लोकप्रिय?
कैरटलेन के एमडी सौमेन भौमिक के मुताबिक ग्राहकों के बीच गोल्ड एक्सचेंज में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि मार्च तिमाही में कंपनी में एक्सचेंज सामान्य स्तर से 15-20 फीसदी ज्यादा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में लोग कम कैरेट वाले गहनों की तरफ ज्यादा बढ़ सकते हैं।
कम कैरेट ज्वेलरी लोकप्रिय होने की बड़ी वजहें हैं क्योंकि इसकी कीमत कम होती है, डिजाइन मॉडर्न होते हैं, रोजाना इस्तेमाल आसान होता है और हल्के वजन के कारण बजट भी कंट्रोल में रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा ग्राहक अब भारी पारंपरिक गहनों की बजाय स्टाइलिश और हल्के विकल्प ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
सिल्वर और लाइटवेट डायमंड ज्वेलरी की मांग भी बढ़ सकती है
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि गोल्ड महंगा होने के कारण अब ग्राहक सिल्वर ज्वेलरी, रोजाना पहनने वाले हल्के गहने और छोटे डायमंड डिजाइन की तरफ ज्यादा झुक सकते हैं। यह बदलाव खासकर शहरी युवाओं और कामकाजी महिलाओं के बीच तेजी से देखने को मिल सकता है।
गोल्ड एक्सचेंज और रीसाइक्लिंग में आई तेजी
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक अब बड़ी संख्या में ग्राहक पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नए डिजाइन खरीद रहे हैं। इस मॉडल में पुराने सोने की वैल्यू तय होती है। उसे नए गहनों की कीमत में एडजस्ट किया जाता है और ग्राहक सिर्फ बची हुई रकम चुकाता है।
इससे नई खरीदारी का खर्च कम हो जाता है, पुराने गहनों का बेहतर उपयोग हो जाता है और नए गोल्ड आयात की जरूरत भी घटती है।
कंपनियों के आंकड़े क्या बता रहे हैं?
पीएन गाडगिल ज्वेलर्स के COO और CFO आदित्य मोदक ने बताया कि हाल की तिमाहियों में गोल्ड एक्सचेंज और रीसाइक्लिंग का हिस्सा बढ़कर 50-60 फीसदी तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2024-25 तक यह हिस्सा सिर्फ 25-30 फीसदी था। उन्होंने कहा कि ग्राम के हिसाब से नए सोने की खरीदारी में करीब 30 फीसदी गिरावट आई है।
यह संकेत देता है कि ग्राहक अब पुराना सोना इस्तेमाल कर रहे हैं, कम मात्रा में नया सोना खरीद रहे हैं और लागत बचाने पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
तनिष्क और बड़े ब्रांड भी बदल रहे रणनीति
टाइटन कंपनी अपने ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क के जरिए गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम्स को लगातार बढ़ावा दे रही है।कंपनी के मुताबिक उसके एक्सचेंज प्रोग्राम्स से ज्वेलरी बिक्री में 35 फीसदी तक ग्रोथ मिली है। 30 लाख से ज्यादा भारतीयों ने एक्सचेंज प्रोग्राम का इस्तेमाल किया है और करीब 1.7 लाख किलो सोने की रीसाइक्लिंग की गई है। यह दिखाता है कि अब गोल्ड एक्सचेंज सिर्फ मजबूरी नहीं बल्कि नया उपभोक्ता ट्रेंड बनता जा रहा है।
ब्लूस्टोन और अन्य कंपनियां भी एक्टिव
ब्लूस्टोन के संस्थापक गौरव सिंह कुशवाहा ने बताया कि कंपनी में गोल्ड एक्सचेंज साल-दर-साल दोगुना बढ़ा है। कंपनी ऐसे ग्राहकों को अतिरिक्त लाभ भी दे रही है जो पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नई खरीदारी करते हैं।
वहीं अंगारा के सह-संस्थापक अंकुर डागा के मुताबिक अब ग्राहक पुराने गहनों को सिर्फ “सेविंग” नहीं बल्कि “रीडिजाइन करने योग्य एसेट” के रूप में देखने लगे हैं।
आयात बढ़ना सरकार के लिए क्यों चिंता?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट करीब 58 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 72 अरब डॉलर पहुंच गया।
यह बढ़ोतरी सरकार के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है क्योंकि इससे डॉलर आउटफ्लो बढ़ता है, ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और रुपये पर दबाव आता है। इसी वजह से सरकार अब गोल्ड खरीदारी के व्यवहार में बदलाव चाहती है।
क्या पूरी तरह बदल जाएगी भारतीयों की गोल्ड खरीदारी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीयों का सोने के प्रति आकर्षण खत्म नहीं होगा। लेकिन खरीदारी का तरीका जरूर बदल सकता है। आने वाले समय में हल्की ज्वेलरी, कम कैरेट डिजाइन, एक्सचेंज आधारित खरीदारी, रीसाइक्लिंग और मल्टी-यूज गहने ज्यादा लोकप्रिय हो सकते हैं। यानी अब “कम खर्च में स्मार्ट गोल्ड खरीदारी” नया ट्रेंड बन सकता है।
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