वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत की प्रशासनिक व्यवस्था और बिजनेस माहौल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब “भरोसे पर आधारित सिस्टम” की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन जरूरत से ज्यादा सरकारी नोटिस और लाल फीताशाही अभी भी उद्योग जगत के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
अनिल अग्रवाल ने कहा कि अगर दूसरे देशों में किसी मामले में 100 नोटिस जारी किए जाते हैं, तो भारत में वही संख्या 800 तक पहुंच जाती है, जबकि हमारा उत्पादन स्तर उनसे काफी कम है। उन्होंने इसे कारोबार और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ के रास्ते में बड़ी रुकावट बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” और “Ease of Doing Business” पर लगातार जोर दे रही है।
भारत ‘Trust-Based System’ की तरफ बढ़ रहा है
अनिल अग्रवाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की तारीफ करते हुए कहा कि देश अब “Trust-Based Governance System” की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि पहले भारतीय एयरपोर्ट्स पर कस्टम क्लियरेंस में घंटों लग जाते थे। यात्रियों को लंबी जांच और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
उनके मुताबिक आज 99.9 फीसदी यात्री बिना किसी लंबी जांच या देरी के आसानी से एयरपोर्ट से बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भी भारत के इस बदलाव की तारीफ कर रही है।
टैक्स सिस्टम में भी आया बड़ा बदलाव
अनिल अग्रवाल ने इनकम टैक्स सिस्टम में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले टैक्स भरने के लिए अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठना पड़ता था। इससे समय बर्बाद होता था, अनिश्चितता बनी रहती थी और कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता था।
लेकिन अब अधिकांश प्रक्रियाएं डिजिटल हो चुकी हैं। फेसलेस टैक्स सिस्टम ने पारदर्शिता बढ़ाई है और सरकार के “जनता पर भरोसा” करने वाले मॉडल को मजबूत किया है।
‘100 के बदले 800 नोटिस’ पर क्यों भड़के?
हालांकि सरकार की तारीफ के साथ-साथ अनिल अग्रवाल ने सिस्टम की बड़ी कमजोरी की तरफ भी इशारा किया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा का हवाला देते हुए कहा कि भारत में जरूरत से ज्यादा नोटिस जारी किए जाते हैं। उनके मुताबिक दूसरे देशों में जहां 100 नोटिस जारी होते हैं, भारत में वही संख्या 800 तक पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि इतनी ज्यादा नोटिसबाजी से अधिकारियों का ध्यान भटकता है, कंपनियों का समय बर्बाद होता है और मैनेजमेंट असली बिजनेस से हटकर कागजी काम में उलझ जाता है। उन्होंने साफ कहा कि इस पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
‘जन विश्वास बिल’ की जमकर तारीफ
अनिल अग्रवाल ने हाल ही में पारित “जन विश्वास बिल” का समर्थन भी किया। उन्होंने कहा कि जब तक मामला हथियारों की तस्करी, ड्रग्स या मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा न हो, तब तक सरकार को “भरोसे पर आधारित रेगुलेशन” अपनाना चाहिए।
उनका मानना है कि कारोबारियों और उद्यमियों को शक की नजर से देखने की बजाय उन्हें सम्मान और प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक “जन विश्वास बिल” का उद्देश्य छोटे-मोटे नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना है।
बिजनेस के लिए ‘स्पीड ब्रेकर फ्री रोड’ की मांग
अनिल अग्रवाल ने अपनी बात समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जैसे आज नेशनल हाईवे पर FASTag और ऑटोमेटेड टोल सिस्टम की वजह से गाड़ियों को बार-बार रुकना नहीं पड़ता, वैसे ही बिजनेस सिस्टम भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यापार के लिए ऐसी सड़क होनी चाहिए जिसमें स्पीड ब्रेकर न हों।उनका इशारा जटिल नियमों, लगातार मंजूरियों और बार-बार आने वाले सरकारी नोटिसों की तरफ था।
मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी तो बदलेगी अर्थव्यवस्था
अनिल अग्रवाल ने कहा कि अगर भारत को विकसित देश बनना है तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को तेजी से बढ़ाना होगा। उनके मुताबिक ज्यादा फैक्ट्रियां लगेंगी, रोजगार बढ़ेगा, GDP मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।
उन्होंने कहा कि भारत के पास युवा आबादी, बड़ा बाजार, संसाधन और टेक्नोलॉजी क्षमता जैसी तमाम ताकतें मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ बिजनेस माहौल को और आसान बनाने की है।
उद्योग जगत लंबे समय से क्या मांग कर रहा है?
भारत में उद्योग जगत लंबे समय से कम रेगुलेशन, तेज मंजूरी प्रक्रिया, डिजिटल क्लीयरेंस और कम कंप्लायंस बोझ की मांग करता रहा है। कई कंपनियों का कहना है कि भारत में बिजनेस शुरू करने और चलाने में लाइसेंस, निरीक्षण, टैक्स नोटिस और पर्यावरण मंजूरी जैसी प्रक्रियाएं अभी भी काफी जटिल हैं।
हालांकि सरकार पिछले कुछ वर्षों में GST, फेसलेस टैक्सेशन, सिंगल विंडो सिस्टम और डिजिटल अप्रूवल जैसे कई सुधार लागू कर चुकी है।
क्यों महत्वपूर्ण है अनिल अग्रवाल का बयान?
अनिल अग्रवाल भारत के बड़े उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और उनकी कंपनी वेदांता खनन, धातु, तेल और गैस जैसे कई बड़े सेक्टर्स में सक्रिय है। ऐसे में उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सिर्फ एक कंपनी की शिकायत नहीं बल्कि भारत के व्यापक बिजनेस माहौल को लेकर उद्योग जगत की चिंता को भी दिखाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत रेगुलेटरी प्रक्रियाएं आसान करता है, भरोसे पर आधारित सिस्टम मजबूत करता है और मैन्युफैक्चरिंग को तेज गति देता है, तो आने वाले वर्षों में देश वैश्विक सप्लाई चेन में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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