वैश्विक बाजार में इस समय सोना और चांदी बिल्कुल अलग दिशा में चलते दिखाई दे रहे हैं। सोमवार को जहां सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं चांदी में जोरदार तेजी देखने को मिली। इससे निवेशकों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है कि आखिर दोनों कीमती धातुओं का रुख अलग-अलग क्यों है और क्या आने वाले दिनों में गोल्ड-सिल्वर मार्केट में और बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय precious metals market पर एक साथ कई बड़े फैक्टर्स असर डाल रहे हैं। इनमें पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और वैश्विक महंगाई की चिंता सबसे अहम मानी जा रही है। यही वजह है कि सोना और चांदी दोनों अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को स्पॉट गोल्ड करीब 0.5 फीसदी गिर गया जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। Platinum और Palladium जैसी दूसरी कीमती धातुएं भी मजबूती के साथ कारोबार करती दिखीं।
आखिर सोने की कीमत में गिरावट क्यों आई?
सोने की कीमतों में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें मानी जा रही हैं। कुछ महीने पहले तक बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल कई बार ब्याज दरों में कटौती करेगा। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जब crude oil महंगा होता है तो ट्रांसपोर्टेशन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक लगभग हर सेक्टर की लागत बढ़ने लगती है। इससे inflation यानी महंगाई पर दबाव बढ़ता है।
अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। यही बात सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है।
दरअसल, सोना ऐसा asset है जो ब्याज नहीं देता। जब interest rates ऊंचे रहते हैं तो निवेशक अपना पैसा bonds, fixed income products और दूसरे interest earning assets में लगाना ज्यादा पसंद करते हैं। इससे gold की demand कमजोर पड़ने लगती है।
अमेरिका-ईरान तनाव ने कैसे बढ़ाई बेचैनी?
बाजार में हलचल उस समय और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने से जुड़े कुछ प्रस्ताव दिए थे, लेकिन अमेरिका ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद बाजार में यह डर बढ़ गया कि पश्चिम एशिया संकट और लंबा खिंच सकता है। खासकर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil shipping routes में गिना जाता है और वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अगर यहां किसी भी तरह का व्यवधान बढ़ता है तो crude oil की कीमतों में और तेजी आ सकती है। यही वजह है कि निवेशकों के बीच inflation और global slowdown दोनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
फिर चांदी में तेजी क्यों आई?
यहीं पर silver और gold के behavior में सबसे बड़ा अंतर दिखाई देता है।
सोना मुख्य रूप से safe haven asset माना जाता है। यानी जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षा के लिए gold की ओर जाते हैं। लेकिन silver सिर्फ निवेश धातु नहीं बल्कि एक industrial metal भी है।
चांदी का इस्तेमाल:
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- सोलर पैनल
- इलेक्ट्रिक व्हीकल
- सेमीकंडक्टर
- और ग्रीन एनर्जी सेक्टर
में बड़े पैमाने पर होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर clean energy transition और technology manufacturing की वजह से silver की industrial demand लगातार मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि जब निवेशकों को आर्थिक गतिविधियों में मजबूती की उम्मीद दिखती है तो silver में buying बढ़ जाती है।
सोमवार को silver की कीमतों में आई तेज उछाल को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
Platinum और Palladium में भी तेजी क्यों?
सिर्फ चांदी ही नहीं बल्कि Platinum और Palladium में भी मजबूती देखने को मिली। इन दोनों धातुओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से automobile industry और industrial manufacturing में होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि industrial precious metals में तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार फिलहाल global manufacturing demand को लेकर पूरी तरह निराश नहीं है।
हालांकि अगर geopolitical tensions और बढ़ते हैं या global recession की आशंका गहराती है, तो इन धातुओं में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अब बाजार की नजर किन फैक्टर्स पर?
आने वाले दिनों में precious metals market की दिशा कुछ बड़े फैक्टर्स तय करेंगे।
सबसे पहले निवेशकों की नजर अमेरिकी inflation data पर रहेगी। अगर inflation उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहती है तो Federal Reserve ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है। इससे gold पर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ अगर inflation कमजोर आती है तो बाजार फिर rate cuts की उम्मीद बढ़ा सकता है, जिससे सोने को सपोर्ट मिल सकता है।
इसके अलावा:
- अमेरिकी रोजगार आंकड़े
- डॉलर इंडेक्स
- चीन-अमेरिका बातचीत
- पश्चिम एशिया संकट
- और crude oil prices
भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
डॉलर इंडेक्स क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
Precious metals market में डॉलर इंडेक्स का असर बेहद अहम माना जाता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में gold और silver comparatively महंगे हो जाते हैं। इससे उनकी मांग कमजोर पड़ सकती है।
हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली है, जिसने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डॉलर और मजबूत होता है तो gold की recovery सीमित रह सकती है।
भारत और चीन की मांग भी तय करेगी दिशा
भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े precious metals consuming markets में गिने जाते हैं। भारत में शादी-ब्याह, त्योहार और निवेश की वजह से सोने की मांग हमेशा मजबूत रहती है।
वहीं चीन industrial demand और manufacturing activity के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर चीन की फैक्ट्रियां और industrial activity मजबूत रहती है तो silver की मांग को बड़ा सपोर्ट मिल सकता है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल precious metals market बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- short-term में gold interest rates के प्रति sensitive रहेगा
- जबकि silver industrial demand की वजह से comparatively मजबूत रह सकता है।
कई analysts diversified approach अपनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि volatility के दौरान risk balance किया जा सके।
क्या आने वाले दिनों में बड़ा उतार-चढ़ाव संभव है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल global market में uncertainty बहुत ज्यादा है। ऐसे में:
- geopolitical developments
- inflation trends
- central bank policies
- और global growth signals
की वजह से gold और silver दोनों में बड़े swings देखने को मिल सकते हैं।
अगर पश्चिम एशिया संकट बढ़ता है तो gold safe haven buying की वजह से फिर उछल सकता है। वहीं अगर industrial demand मजबूत रहती है तो silver outperform कर सकता है।
यानी आने वाले हफ्तों में precious metals market में volatility और बढ़ने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।
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