प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का समझदारी से इस्तेमाल करने और गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील की थी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह भारत का बढ़ता आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव है।
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कीमती धातुओं जैसी कई जरूरतों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल आयात 774.97 अरब डॉलर यानी करीब 68.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
कच्चे तेल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान और सोने तक, कई ऐसी वस्तुएं हैं जिन पर भारत हर साल लाखों करोड़ रुपये खर्च करता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट, डॉलर की मजबूती या कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
आइए जानते हैं भारत किन 10 चीजों पर सबसे ज्यादा आयात खर्च करता है और ये देश की अर्थव्यवस्था पर कितना बोझ डाल रही हैं।
1. पेट्रोलियम और कच्चा तेल

भारत का सबसे बड़ा आयात खर्च पेट्रोलियम और कच्चे तेल पर होता है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसकी आयात वैल्यू करीब ₹15,33,402 करोड़ रही।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। देश में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश पेट्रोल, डीजल और गैस आयातित कच्चे तेल पर आधारित है। यही वजह है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ते ही भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की ऊर्जा सुरक्षा अभी भी काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है।
2. इलेक्ट्रॉनिक सामान

भारत ने पिछले वित्त वर्ष में करीब ₹8,34,831 करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक सामान आयात किए।
इसमें स्मार्टफोन, कंप्यूटर, चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे और उपभोक्ता उपकरण शामिल हैं।
हालांकि भारत में मोबाइल निर्माण तेजी से बढ़ा है, लेकिन सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उपकरणों के लिए अभी भी चीन समेत कई देशों पर निर्भरता बनी हुई है।
3. मशीनरी और औद्योगिक उपकरण

इलेक्ट्रिकल और नॉन-इलेक्ट्रिकल मशीनरी का आयात मूल्य ₹5,46,149 करोड़ रहा।
भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, बिजली उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग और भारी उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारी मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों की मांग लगातार बढ़ रही है।
4. सोना

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब ₹4,89,749 करोड़ का सोना आयात किया।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। यहां सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि परंपरा, शादी-विवाह और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब सोने का आयात बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव बढ़ जाता है क्योंकि इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है।
5. ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट

वाहन, विमान कलपुर्जे और अन्य परिवहन उपकरणों का आयात मूल्य ₹2,89,680 करोड़ रहा।
भारत में एविएशन, लॉजिस्टिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी वजह से एयरक्राफ्ट पार्ट्स, हाई-टेक ट्रांसपोर्ट सिस्टम और कई विशेष उपकरण विदेशों से आयात किए जाते हैं।
6. कोयला और कोक

भारत ने पिछले वित्त वर्ष में ₹2,62,566 करोड़ का कोयला, कोक और ब्रिकेट आयात किया।
हालांकि भारत के पास खुद बड़े कोयला भंडार मौजूद हैं, लेकिन बिजली उत्पादन और स्टील उद्योग की भारी मांग को पूरा करने के लिए आयात जरूरी हो जाता है।
भारत रूस, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया समेत कई देशों से कोयला खरीदता है।
7. ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिकल

कार्बनिक और अकार्बनिक रसायनों का आयात मूल्य ₹2,46,359 करोड़ रहा।
इन रसायनों का इस्तेमाल दवा उद्योग, कृषि, रसायन निर्माण और औद्योगिक उत्पादन में बड़े पैमाने पर होता है।
भारत दुनिया का बड़ा फार्मा हब जरूर है, लेकिन कई महत्वपूर्ण रसायनों और कच्चे माल के लिए अभी भी आयात पर निर्भर है।
8. नॉन-फेरस मेटल्स

अलौह धातुओं का आयात मूल्य ₹2,15,299 करोड़ दर्ज किया गया।
इस श्रेणी में तांबा, एल्युमीनियम और जस्ता जैसी धातुएं शामिल हैं।
इनका इस्तेमाल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली उपकरण और औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है।
9. आर्टिफिशियल रेजिन और प्लास्टिक मटीरियल

आर्टिफिशियल रेजिन और प्लास्टिक सामग्री का आयात मूल्य ₹1,90,212 करोड़ रहा।
इनका इस्तेमाल पैकेजिंग, निर्माण, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
10. मोती और कीमती पत्थर

मोती, कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों का आयात मूल्य ₹1,89,586 करोड़ रहा।
भारत कच्चे रत्न और मोती आयात करता है, जिन्हें बाद में प्रोसेस करके ज्वेलरी के रूप में दोबारा निर्यात किया जाता है।
सूरत जैसे शहर दुनिया के बड़े डायमंड प्रोसेसिंग केंद्रों में शामिल हैं।
पीएम मोदी की अपील क्यों अहम है?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का आयात बिल जितना बढ़ता है, विदेशी मुद्रा भंडार पर उतना ही दबाव बढ़ता है।
अगर कच्चा तेल महंगा होता है, डॉलर मजबूत होता है या वैश्विक संकट बढ़ता है, तो भारत के लिए आयात लागत और बढ़ जाती है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन बचाने, गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने और विदेशी मुद्रा की बचत पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल उत्पादन बढ़ाकर ही भारत लंबे समय में आयात निर्भरता कम कर सकता है।
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