Success Story of Gaurav Mehta: जयपुर के गौरव मेहता ने एक अलग सोच के साथ अपने शौक को बिजनेस में बदलने का फैसला किया। उन्होंने अपनी BMW कार बेचकर करीब 30 लाख रुपये जुटाए और साल 2013 में Jaipur Watch Company की शुरुआत की। आज उनकी कंपनी की कस्टमाइज्ड घड़ियां भारत के साथ-साथ दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में पहुंच चुकी हैं और कंपनी ने करीब 25 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार दर्ज किया है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कलाई पर भी उनकी कंपनी की घड़ी नजर आ चुकी है।
किसी बिजनेस को शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी पूंजी या किसी बड़े कारोबारी परिवार का बैकग्राउंड होना जरूरी नहीं होता। कई बार एक अलग विचार, उस पर भरोसा और जोखिम उठाने की हिम्मत ही सफलता की शुरुआत बन जाती है। गौरव मेहता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
घड़ियों के शौक से आया बिजनेस का आइडिया
जयपुर के गौरव मेहता को घड़ियों का काफी शौक था। उन्होंने सोचा कि जब लोग अपने कपड़े, ज्वेलरी और दूसरी चीजें अपनी पसंद के हिसाब से कस्टमाइज करवा सकते हैं, तो घड़ी को भी व्यक्तिगत पसंद और कहानी से क्यों नहीं जोड़ा जा सकता?
इसी विचार ने उन्हें एक ऐसा ब्रांड बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें घड़ी सिर्फ समय बताने वाला उपकरण न होकर एक कलेक्टिबल और विरासत से जुड़ी कलाकृति बने।
साल 2013 में उन्होंने Jaipur Watch Company की नींव रखी। कंपनी ने शुरुआत से ही सामान्य घड़ियों से अलग रास्ता चुना। पुराने सिक्कों, डाक टिकटों, पेंटिंग, कॉलिग्राफी और भारतीय कला से प्रेरित डिजाइनों को घड़ियों के डायल में इस्तेमाल किया गया।
उस समय भारत में लग्जरी और प्रीमियम घड़ियों के बाजार में विदेशी ब्रांडों की मजबूत पकड़ थी। भारतीय ग्राहकों के एक वर्ग के बीच यह धारणा भी थी कि महंगी और प्रीमियम क्वालिटी की घड़ियां विदेशी कंपनियों से ही मिल सकती हैं। ऐसे माहौल में भारतीय लग्जरी वॉच ब्रांड खड़ा करना आसान नहीं था।
BMW कार बेचकर लगाए 30 लाख रुपये
गौरव मेहता ने अपने आइडिया पर इतना भरोसा किया कि बिजनेस शुरू करने के लिए अपनी BMW कार तक बेच दी। इससे करीब 30 लाख रुपये जुटाए गए। इसके अलावा उन्होंने दोस्तों से भी पैसे उधार लिए।
यह रकम उनके लिए सिर्फ शुरुआती निवेश नहीं थी, बल्कि उनके बिजनेस आइडिया पर भरोसे का बड़ा उदाहरण भी थी। गौरव ने शुरुआत में जल्दबाजी करने के बजाय घड़ी बनाने की पूरी प्रक्रिया को समझने पर ध्यान दिया।
उन्होंने पुराने सिक्कों के विशेषज्ञों से संपर्क किया और घड़ी बनाने की तकनीक को समझने के लिए विशेषज्ञों के साथ काम किया। उनका लक्ष्य ऐसी घड़ियां तैयार करना था, जिनमें भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा जा सके।
Facebook से मिली पहली बड़ी कामयाबी
किसी नए लग्जरी ब्रांड के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि ग्राहक उस पर भरोसा कैसे करें। गौरव मेहता ने इस चुनौती का सामना डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किया।
साल 2013 में उन्होंने Jaipur Watch Company का Facebook पेज बनाया और पेड विज्ञापन के जरिए अपने प्रोडक्ट्स को लोगों तक पहुंचाना शुरू किया।
इसी दौरान दिल्ली के एक ग्राहक ने उनकी घड़ियों में दिलचस्पी दिखाई। खास बात यह थी कि ग्राहक ने घड़ी को सामने से देखे बिना ही तीन घड़ियां खरीद लीं। यह कंपनी के लिए शुरुआती दौर में बड़ा भरोसा देने वाला अनुभव था।
इसके बाद मुंबई के एक बड़े कलेक्टिबल्स स्टोर ने भी उनकी घड़ियों को बेचना शुरू किया। करीब 23,000 रुपये कीमत वाली कंपनी की शुरुआती कलेक्शन को महज दो महीने में ग्राहकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और यह कलेक्शन बिक गई।
यहीं से गौरव को संकेत मिल गया कि भारत में कस्टमाइज्ड और कहानी बताने वाली प्रीमियम घड़ियों के लिए एक खास बाजार मौजूद है।
ताज और ओबेरॉय जैसे लग्जरी होटल तक पहुंचा ब्रांड
शुरुआती सफलता के बाद कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया। जयपुर वॉच कंपनी की घड़ियां देश के प्रमुख लग्जरी होटल समूहों तक पहुंचीं।
कंपनी ने Taj और Oberoi Group के कुछ होटलों में भी अपने प्रोडक्ट्स की बिक्री शुरू की। इससे ब्रांड को ऐसे ग्राहकों तक पहुंचने में मदद मिली, जो प्रीमियम और लग्जरी प्रोडक्ट्स खरीदने में रुचि रखते थे।
हालांकि, सिर्फ डिजाइन और मार्केटिंग के भरोसे लंबे समय तक कारोबार नहीं चलाया जा सकता था। कंपनी को अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी मजबूत करनी थी।
2015 में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लगाया 1.2 करोड़ रुपये
गौरव मेहता ने साल 2015 में बेंगलुरु में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए करीब 1.2 करोड़ रुपये का निवेश किया।
मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ने के साथ कंपनी के लिए ज्यादा डिजाइन तैयार करना और अपने प्रोडक्ट की क्वालिटी पर नियंत्रण रखना आसान हुआ।
शुरुआती वर्षों में कंपनी को कारोबार को स्थिर करने और अपने ब्रांड को स्थापित करने में समय लगा। आखिरकार साल 2017 में Jaipur Watch Company ब्रेक-ईवन पर पहुंच गई।
यह गौरव के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, क्योंकि इसका मतलब था कि शुरुआती निवेश और कई वर्षों की मेहनत के बाद कंपनी अपने खर्चों को कवर करने की स्थिति में पहुंच चुकी थी।
15 हजार से 24 लाख रुपये तक की घड़ियां
Jaipur Watch Company की सबसे बड़ी पहचान उसकी कस्टमाइज्ड और अलग डिजाइन वाली घड़ियां हैं।
कंपनी के डायल में पुराने सिक्कों, डाक टिकटों, हाथ से बनाई गई पेंटिंग, कॉलिग्राफी, देवी-देवताओं से जुड़े चित्र और कीमती पत्थरों जैसे तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है।
इन घड़ियों की कीमत भी डिजाइन और इस्तेमाल की गई सामग्री के आधार पर काफी अलग होती है। कंपनी की घड़ियां करीब 15,000 रुपये से लेकर 24 लाख रुपये तक की कीमत में बिक चुकी हैं।
कंपनी ने एक ग्राहक के लिए करीब 24 लाख रुपये की खास घड़ी भी तैयार की थी। इस घड़ी में सोने और हीरे का इस्तेमाल करते हुए फूल जैसा डिजाइन तैयार किया गया था।
यानी कंपनी ने सिर्फ घड़ी बेचने के बजाय ग्राहक के लिए एक ऐसा प्रोडक्ट तैयार करने पर जोर दिया, जो व्यक्तिगत पसंद और स्टेटस दोनों को दर्शाता हो।
पुराने सिक्कों से बनाई खास कलेक्शन
Jaipur Watch Company के कई कलेक्शन इतिहास और विरासत से जुड़े हुए हैं।
कंपनी ने King George VI के पुराने सिक्कों का इस्तेमाल करते हुए 35 घड़ियों का एक विशेष कलेक्शन तैयार किया। इसी तरह जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह II के पुराने सिक्कों से भी 50 घड़ियों का कलेक्शन बनाया गया।
इस तरह के डिजाइन कंपनी को सामान्य वॉच ब्रांड से अलग पहचान देते हैं। एक तरफ घड़ी आधुनिक तकनीक और डिजाइन को दर्शाती है, वहीं दूसरी तरफ उसमें ऐतिहासिक वस्तु या भारतीय विरासत का हिस्सा शामिल होता है।
यही कॉन्सेप्ट कंपनी के प्रीमियम ग्राहकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाता है।
पीएम मोदी की कलाई पर दिखी Jaipur Watch Company की घड़ी
गौरव मेहता के बिजनेस के लिए सबसे चर्चित घटनाओं में से एक साल 2025 के आखिर में सामने आई।
उन्हें जानकारी मिली कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कलाई पर Jaipur Watch Company की घड़ी नजर आई है। शुरुआत में गौरव और उनकी टीम को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ।
इसके बाद टीम ने प्रधानमंत्री से जुड़ी आधिकारिक तस्वीरों को चेक किया। तस्वीरों की जांच के बाद कंपनी को पता चला कि घड़ी वास्तव में उसी के ब्रांड की थी।
कंपनी के लिए यह इसलिए भी खास था क्योंकि इसके लिए किसी पेड सेलिब्रिटी कैंपेन या विज्ञापन का सहारा नहीं लिया गया था।
प्रधानमंत्री की कलाई पर घड़ी दिखाई देने के बाद कंपनी के प्रोडक्ट्स को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी और ऑनलाइन डिमांड में तेजी देखने को मिली।
ऑनलाइन बिक्री ने ऑफलाइन रिटेल को छोड़ा पीछे
इस घटना के बाद कंपनी के डिजिटल कारोबार को भी बड़ा फायदा मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, आज कंपनी के कुल कारोबार में करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी ऑनलाइन बिक्री की है।
यह बदलाव गौरव मेहता के शुरुआती डिजिटल मार्केटिंग फैसले को भी महत्वपूर्ण बनाता है। जहां कंपनी ने शुरुआत में Facebook के जरिए अपना पहला ग्राहक हासिल किया था, वहीं आगे चलकर ऑनलाइन चैनल उसके कारोबार का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया।
इससे यह भी पता चलता है कि प्रीमियम और लग्जरी प्रोडक्ट्स के लिए भी डिजिटल प्लेटफॉर्म तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
40 से ज्यादा देशों में पहुंचा ब्रांड
आज Jaipur Watch Company सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कंपनी को 40 से ज्यादा देशों से ऑर्डर मिल रहे हैं।
इन देशों में स्विट्जरलैंड और जापान जैसे बाजार भी शामिल हैं, जिन्हें घड़ियों और प्रीमियम टाइमपीस के लिए दुनिया के महत्वपूर्ण बाजारों में गिना जाता है।
एक भारतीय कंपनी का ऐसे बाजारों तक पहुंचना गौरव मेहता के बिजनेस मॉडल की अंतरराष्ट्रीय क्षमता को दिखाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने पिछले साल करीब 25 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया। अब कंपनी का लक्ष्य इस साल अपने कारोबार को बढ़ाकर करीब 75 से 80 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
कार बेचने से लेकर करोड़ों के कारोबार तक का सफर
गौरव मेहता की कहानी सिर्फ एक वॉच ब्रांड की सफलता की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि किसी अलग आइडिया पर भरोसा करके जोखिम उठाने से बिजनेस की नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।
साल 2013 में अपनी BMW बेचकर करीब 30 लाख रुपये से शुरुआत करने वाले गौरव ने एक ऐसे बाजार में कदम रखा, जहां विदेशी ब्रांडों का दबदबा था। उन्होंने कीमत के बजाय डिजाइन, भारतीय विरासत, कस्टमाइजेशन और कहानी को अपनी ब्रांड पहचान बनाया।
पहली बिक्री Facebook से हुई, फिर लग्जरी होटल और कलेक्टिबल्स स्टोर जुड़े, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ी और धीरे-धीरे कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच गई।
आज 40 से ज्यादा देशों में ऑर्डर, करीब 25 करोड़ रुपये का कारोबार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कलाई पर नजर आई घड़ी—ये सभी उपलब्धियां गौरव मेहता के उस फैसले की कहानी बताती हैं, जिसमें उन्होंने अपनी कार बेचकर एक अनिश्चित लेकिन अलग बिजनेस आइडिया पर दांव लगाया था।
डिस्क्लेमर: यह सफलता की कहानी उपलब्ध रिपोर्टों में दी गई जानकारी पर आधारित है। कारोबार, रेवेन्यू, बिक्री और कंपनी के लक्ष्य से जुड़े आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।


