FPI Investment in India: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹12,921 करोड़ का निवेश किया है। जुलाई में भी FPI ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी, जिससे लगातार चार महीने की भारी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के संकेत मिले हैं।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, रुपये की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और भारतीय अर्थव्यवस्था के बेहतर मैक्रो संकेतक विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
हालांकि, 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली अभी भी काफी बड़ी है। ऐसे में अगस्त की खरीदारी को भारतीय बाजार में FPI के पूरी तरह लौटने की पुष्टि के बजाय उनके रुख में शुरुआती बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
अगस्त में FPI ने कितना निवेश किया?
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड यानी CDSL के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया।
इससे पहले जुलाई 2026 में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹20,200 करोड़ की खरीदारी की थी। लगातार कई महीनों तक बिकवाली के बाद जुलाई और अगस्त में हुई खरीदारी विदेशी निवेशकों के बदलते रुख की ओर इशारा करती है।
हालांकि, अगस्त के पहले सप्ताह की खरीदारी को व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है, क्योंकि 2026 की शुरुआत से विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली अभी भी काफी अधिक है।
चार महीने लगातार की थी बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने जुलाई से पहले लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली की थी। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने मार्च से जून के बीच कुल मिलाकर लाखों करोड़ रुपये की निकासी की।
| महीना | FPI निवेश/बिकवाली |
|---|---|
| मार्च 2026 | ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली |
| अप्रैल 2026 | ₹60,847 करोड़ की बिकवाली |
| मई 2026 | ₹32,963 करोड़ की बिकवाली |
| जून 2026 | ₹49,340 करोड़ की बिकवाली |
| जुलाई 2026 | ₹20,200 करोड़ का निवेश |
| अगस्त का पहला सप्ताह | ₹12,921 करोड़ का निवेश |
मार्च में FPI की बिकवाली सबसे ज्यादा रही। इसके बाद अप्रैल, मई और जून में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से बड़ी रकम निकाली। जुलाई में जाकर यह सिलसिला बदला और FPI नेट बायर बन गए।
2026 में अब तक ₹2.41 लाख करोड़ की बिकवाली
हालिया खरीदारी के बावजूद 2026 में विदेशी निवेशकों का कुल रुख अभी भी पूरी तरह सकारात्मक नहीं हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक FPI भारतीय शेयर बाजार से करीब ₹2.41 लाख करोड़ की निकासी कर चुके हैं।
वहीं, 2025 में भी विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में लगभग ₹1.66 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।
इसलिए अगस्त और जुलाई की खरीदारी को बाजार के लिए सकारात्मक संकेत जरूर माना जा रहा है, लेकिन विदेशी निवेशकों के लंबे समय के रुख में स्थायी बदलाव के लिए लगातार कई महीनों तक मजबूत खरीदारी जरूरी होगी।
FPI के रुख में बदलाव क्यों आया?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक काम कर रहे हैं।
अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद वैश्विक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कारक है। ब्याज दरों में कमी की संभावना बढ़ने पर अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर से मिलने वाला आकर्षण घट सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशक उभरते बाजारों में ज्यादा जोखिम लेने के लिए तैयार हो सकते हैं।
भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार को इससे फायदा मिल सकता है। विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने पर भारतीय इक्विटी बाजार में लिक्विडिटी भी मजबूत होती है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
कच्चे तेल की कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में नरमी से भारत के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है और चालू खाते की स्थिति को भी समर्थन मिल सकता है।
इसके अलावा, कम तेल कीमतें महंगाई के मोर्चे पर भी राहत दे सकती हैं। यही वजह है कि कच्चे तेल में नरमी को विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार की एक सकारात्मक खूबी माना जा रहा है।
रुपये की स्थिरता भी सकारात्मक संकेत
विदेशी निवेशकों के लिए केवल शेयर बाजार का रिटर्न ही महत्वपूर्ण नहीं होता। रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर भी उनके अंतिम रिटर्न को प्रभावित करती है।
यदि भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए करेंसी से जुड़े जोखिम कम हो सकते हैं। यही कारण है कि रुपये की स्थिरता भी FPI की हालिया खरीदारी के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है।
RBI के अनुमान से भी बढ़ा भरोसा
भारतीय रिजर्व बैंक के बेहतर ग्रोथ और महंगाई संबंधी अनुमानों से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और महंगाई पर नियंत्रण भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माने जाते हैं।
जब वैश्विक निवेशकों को किसी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं, तो वे उस बाजार में लंबी अवधि के निवेश पर विचार कर सकते हैं।
सेकेंडरी मार्केट में भी बढ़ी FPI की दिलचस्पी
इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते के मुताबिक, भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अभी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में आने वाले समय में विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल की FPI खरीदारी का बड़ा हिस्सा सेकेंडरी मार्केट के जरिए आया है। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल नए IPO में ही नहीं, बल्कि पहले से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में भी बनी हुई है।
यह भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि सेकेंडरी मार्केट में लगातार विदेशी खरीदारी से बड़ी और स्थापित कंपनियों के शेयरों में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ सकता है।
किन सेक्टरों में FPI की ज्यादा दिलचस्पी?
जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के अनुसार, विदेशी निवेशकों की हालिया खरीदारी में कुछ खास सेक्टरों पर ध्यान दिखाई दे रहा है।
FPI की प्राथमिकता में मुख्य रूप से:
- ऑटोमोबाइल
- कंज्यूमर ड्यूरेबल्स
- हेल्थकेयर
जैसे सेक्टर शामिल हैं।
इन सेक्टरों में घरेलू मांग, आय में सुधार और लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाएं विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकती हैं।
बॉन्ड बाजार में भी FPI की खरीदारी
विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल भारतीय इक्विटी तक सीमित नहीं है। भारतीय डेट यानी बॉन्ड बाजार में भी FPI निवेश कर रहे हैं।
अगस्त में अब तक विदेशी निवेशकों ने जनरल रूट के तहत भारतीय बॉन्ड बाजार में ₹622 करोड़ का निवेश किया है।
इससे संकेत मिलता है कि विदेशी पूंजी का एक हिस्सा भारतीय डेट मार्केट की ओर भी जा रहा है। इक्विटी के साथ-साथ बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ना भारत की वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रति वैश्विक निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा सकता है।
क्या FPI की खरीदारी आगे भी जारी रहेगी?
अगस्त की शुरुआत में हुई ₹12,921 करोड़ की खरीदारी निश्चित रूप से भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। जुलाई में भी FPI के नेट बायर रहने से उम्मीद बढ़ी है कि विदेशी निवेशकों का रुख धीरे-धीरे बदल रहा है।
लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 2026 में अब तक FPI की कुल बिकवाली करीब ₹2.41 लाख करोड़ रही है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि विदेशी निवेशकों की लंबी अवधि की बिकवाली पूरी तरह खत्म हो गई है।
आने वाले महीनों में अमेरिकी ब्याज दरों का रुख, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे और घरेलू आर्थिक आंकड़े FPI के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
अगर इन मोर्चों पर परिस्थितियां भारतीय बाजार के पक्ष में बनी रहती हैं और कॉरपोरेट कमाई में सुधार जारी रहता है, तो विदेशी निवेशकों की खरीदारी आगे भी बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
FPI की खरीदारी शेयर बाजार में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट दोनों के लिए महत्वपूर्ण होती है। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी से बाजार में तेजी का माहौल मजबूत हो सकता है, जबकि अचानक बड़ी बिकवाली बाजार में तेज गिरावट का कारण भी बन सकती है।
इसलिए मौजूदा स्थिति में घरेलू निवेशकों के लिए केवल FPI के आंकड़ों के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन, सेक्टर की संभावनाएं और बाजार के मौजूदा जोखिमों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
कुल मिलाकर, जुलाई और अगस्त में FPI की खरीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन 2026 में अब तक हुई भारी बिकवाली को देखते हुए विदेशी निवेशकों की वापसी की पुष्टि के लिए आगे के महीनों के आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी होगा।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI-रजिस्टर्ड निवेश विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


