SEBI F&O Study: शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग का आकर्षण रिटेल निवेशकों के लिए भारी पड़ रहा है। SEBI की ताजा स्टडी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 88% इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ। यानी करीब 10 में से 9 ट्रेडर्स पैसा गंवा बैठे। खास बात यह है कि कुल नुकसान का लगभग 92% हिस्सा ऑप्शन ट्रेडिंग से आया।
हाइलाइट्स
- FY26 में 88% इंडिविजुअल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ।
- इंडिविजुअल ट्रेडर्स के कुल नुकसान का करीब 92% हिस्सा ऑप्शन ट्रेडिंग से आया।
- FY26 में ट्रेडर्स का कुल नेट नुकसान करीब ₹91,685 करोड़ रहा।
- एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या करीब 20% घटकर 78.6 लाख रह गई।
- सरकार ने F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ाकर सट्टेबाजी कम करने की कोशिश की है।
F&O में 10 में से 9 ट्रेडर्स क्यों हार रहे हैं?
SEBI की स्टडी से पता चलता है कि डेरिवेटिव्स मार्केट में रिटेल निवेशकों के लिए जोखिम काफी ज्यादा है। FY26 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स को कुल मिलाकर करीब ₹91,685 करोड़ का नेट नुकसान हुआ। हालांकि, यह नुकसान FY25 के करीब ₹1.12 लाख करोड़ की तुलना में कम है।
इस दौरान एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या भी घटी। FY25 में करीब 98.1 लाख एक्टिव ट्रेडर्स थे, जो FY26 में लगभग 20% घटकर 78.6 लाख रह गए। नए ट्रेडर्स के बाजार में आने की संख्या में भी करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई।
इसके बावजूद प्रति ट्रेडर औसत नुकसान मामूली रूप से बढ़कर करीब ₹1.17 लाख हो गया।
ऑप्शन ट्रेडिंग बनी सबसे बड़ी वजह
F&O सेगमेंट में नुकसान की सबसे बड़ी वजह ऑप्शन ट्रेडिंग रही। SEBI के अनुसार, इंडिविजुअल ट्रेडर्स को हुए कुल नुकसान में करीब 92% हिस्सा ऑप्शन ट्रेडिंग का था।
ऑप्शन ट्रेडिंग में कम पूंजी से बड़े पोजिशन लेने की सुविधा होने के कारण इसमें मुनाफे की संभावना आकर्षक दिखाई देती है। लेकिन बाजार विपरीत दिशा में जाने पर नुकसान भी तेजी से बढ़ सकता है। यही वजह है कि SEBI लंबे समय से रिटेल निवेशकों को डेरिवेटिव्स में सावधानी बरतने की सलाह देता रहा है।
बफे ने डेरिवेटिव्स को बताया था ‘टाइम बम’
दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे भी डेरिवेटिव्स को लेकर लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं। 2002 में बर्कशायर हैथवे के शेयरधारकों को लिखे अपने पत्र में बफे ने डेरिवेटिव्स को बेहद जोखिम भरा बताया था।
उनका तर्क था कि डेरिवेटिव्स में ऐसे जोखिम छिपे हो सकते हैं जो सामान्य परिस्थितियों में दिखाई नहीं देते, लेकिन बाजार में बड़ा झटका आने पर गंभीर नुकसान का कारण बन सकते हैं।
2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान जटिल डेरिवेटिव्स और मॉर्गेज से जुड़े वित्तीय उत्पादों ने कई वित्तीय संस्थानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। इसी वजह से बफे की पुरानी चेतावनी को आज भी अक्सर याद किया जाता है।
हाल के वर्षों में भी बफे ने बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी और निवेश के बजाय जुए जैसी मानसिकता पर चिंता जताई है।
सरकार ने भी बढ़ाई F&O पर निगरानी
रिटेल निवेशकों के लगातार नुकसान को देखते हुए सरकार ने भी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते समय रिटेल निवेशकों के डेरिवेटिव्स में बढ़ते नुकसान पर चिंता जताई थी।
सरकार ने F&O ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का फैसला किया। इसका उद्देश्य डेरिवेटिव्स में अत्यधिक ट्रेडिंग और सट्टेबाजी को हतोत्साहित करना था। इसके बाद F&O ट्रेडिंग वॉल्यूम में कुछ कमी भी देखी गई।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या है सबक?
SEBI के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि F&O में लगातार ट्रेडिंग को आसान कमाई का जरिया समझना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर ऑप्शन ट्रेडिंग में लीवरेज और तेजी से बदलती कीमतों के कारण नुकसान बहुत जल्दी बढ़ सकता है।
इसलिए केवल मुनाफे के उदाहरण देखकर F&O में पैसा लगाना उचित नहीं है। ट्रेडर्स को अपनी जोखिम क्षमता, ट्रेडिंग रणनीति और संभावित नुकसान को समझकर ही कोई फैसला लेना चाहिए।
निष्कर्ष: SEBI के ताजा आंकड़े, सरकार की चिंता और वॉरेन बफे की वर्षों पुरानी चेतावनी एक ही बात की ओर इशारा करती हैं—F&O, खासकर ऑप्शन ट्रेडिंग, में तेज मुनाफे के साथ तेज और बड़ा नुकसान भी संभव है।


