रायपुर कंज्यूमर कोर्ट द्वारा E20 पेट्रोल विवाद में नई कार देने के आदेश को Maruti Suzuki चुनौती देगी। कंपनी का दावा है कि संबंधित Grand Vitara Hybrid पहले से E20-कम्पैटिबल थी और ईंधन में मिलावट के सबूत मिले हैं।
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में शामिल Maruti Suzuki India ने रायपुर के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के उस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें कंपनी को एक ग्राहक की Grand Vitara Hybrid को नई E20-कम्पैटिबल कार से बदलने या करीब 20.5 लाख रुपये का रिफंड देने का निर्देश दिया गया था।
यह मामला E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद कार में आई तकनीकी खराबी से जुड़ा है। हालांकि, मारुति सुजुकी का कहना है कि संबंधित वाहन पहले से ही E20 ईंधन के लिए पूरी तरह उपयुक्त था और मामले में कई अहम तथ्यों को आयोग ने अपने आदेश में शामिल नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद छत्तीसगढ़ के एक Grand Vitara Hybrid मालिक से जुड़ा है। ग्राहक ने कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी कि E20 पेट्रोल भरवाने के बाद उनकी कार में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे वाहन की कार्यक्षमता प्रभावित हुई।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए रायपुर के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने 14 जुलाई को आदेश दिया कि कंपनी:
- 45 दिनों के भीतर ग्राहक को नई E20-कम्पैटिबल कार उपलब्ध कराए, या
- RTO शुल्क, बीमा खर्च और अन्य लागत सहित लगभग 20.5 लाख रुपये की पूरी राशि वापस करे।
इस फैसले के बाद यह मामला ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया है।
Maruti Suzuki ने फैसले पर क्या कहा?
मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया कि वह इस आदेश के खिलाफ उच्च मंच पर कानूनी चुनौती देगी।
कंपनी के अनुसार:
- विवादित Grand Vitara Hybrid पहले से E20-कम्पैटिबल वाहन थी।
- वाहन को ओनर मैनुअल में दिए गए निर्देशों के अनुसार E20 ईंधन पर सुरक्षित रूप से चलाने के लिए डिजाइन किया गया था।
- संबंधित कार का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था, जबकि इसकी बिक्री जून 2024 में की गई थी।
कंपनी का कहना है कि आयोग के आदेश में इन तथ्यों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
ईंधन में मिलावट का भी दावा
मारुति सुजुकी ने अपने बयान में दावा किया कि ग्राहक की कार से लिए गए ईंधन के नमूनों की जांच में फ्यूल में मिलावट के संकेत मिले हैं।
कंपनी के मुताबिक, यदि ईंधन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं था, तो वाहन में आई समस्या के लिए केवल कार निर्माता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
मारुति का यह भी कहना है कि आयोग ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और तथ्यात्मक पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
क्या होता है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। भारत सरकार तेल आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से E20 ईंधन को चरणबद्ध तरीके से बढ़ावा दे रही है।
हालांकि, E20 ईंधन का सुरक्षित उपयोग उन्हीं वाहनों में संभव है जो इसके लिए प्रमाणित (E20 Compatible) हों।
E20 कम्पैटिबल वाहन क्या होते हैं?
ऑटोमोबाइल कंपनियों के अनुसार E20 कम्पैटिबल वाहनों में:
- इंजन और फ्यूल सिस्टम को इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप तैयार किया जाता है।
- रबर, पाइप, सील और अन्य पार्ट्स ऐसे बनाए जाते हैं जो इथेनॉल के प्रभाव को सहन कर सकें।
- वाहन को निर्धारित गुणवत्ता वाले E20 ईंधन पर सुरक्षित रूप से चलाने के लिए टेस्ट किया जाता है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईंधन की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न हो या उसमें मिलावट हो, तो किसी भी वाहन में तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में E20 पेट्रोल का विस्तार किया जा रहा है। यदि उच्च अदालत में इस मामले पर विस्तृत सुनवाई होती है, तो इससे भविष्य में:
- E20 ईंधन से जुड़े उपभोक्ता विवादों,
- वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारी,
- फ्यूल क्वालिटी की जवाबदेही,
- और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े नियमों पर महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता मिल सकती है।
फिलहाल मारुति सुजुकी ने साफ कर दिया है कि वह रायपुर कंज्यूमर आयोग के फैसले के खिलाफ अपील करेगी और अपने पक्ष में उपलब्ध तकनीकी व कानूनी तथ्यों को उच्च मंच पर पेश करेगी।


