नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा ब्राजील से आने वाले उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद अब भारतीय निर्यातकों की निगाहें 24 जुलाई पर टिक गई हैं। व्यापार जगत को आशंका है कि इस तारीख के बाद अमेरिका भारत के खिलाफ भी नया टैरिफ फैसला ले सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय निर्यात और अमेरिकी बाजार में कारोबार पर पड़ सकता है।
Highlights
- अमेरिका ने ब्राजील पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया।
- भारतीय निर्यातकों की नजर अब 24 जुलाई के बाद अमेरिकी फैसले पर।
- सेक्शन 301 के तहत भारत पर भी अतिरिक्त टैरिफ की आशंका।
- अमेरिकी खरीदार फिलहाल भारत से ऑर्डर देने में सतर्क।
- विशेषज्ञों ने भारत को संतुलित व्यापार नीति अपनाने की सलाह दी।
ब्राजील पर 25% टैरिफ से बढ़ी चिंता
अमेरिका ने अपने व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत ब्राजील से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक व्यापार पहले से ही अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रहा है।
ब्राजील पर कार्रवाई के बाद भारतीय निर्यातकों को भी चिंता है कि अमेरिका भारत पर भी इसी तरह का फैसला ले सकता है। खासकर वे उद्योग, जिनका बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है, लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
क्या है सेक्शन 301?
अमेरिका का सेक्शन 301 ऐसा प्रावधान है जिसके तहत वह उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करता है जिन पर अनुचित व्यापारिक गतिविधियों, जबरन श्रम, बौद्धिक संपदा के उल्लंघन या अत्यधिक उत्पादन क्षमता जैसे आरोप लगते हैं।
इसी कानून के तहत अमेरिका भारत की भी जांच कर चुका है। हालांकि अभी तक अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन व्यापार जगत में यह चर्चा है कि भारत के कुछ उत्पादों पर करीब 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।
24 जुलाई क्यों है अहम?
पिछले वर्ष अमेरिका ने 50 से अधिक देशों पर पारस्परिक (Reciprocal) टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। बाद में कानूनी प्रक्रिया के चलते फिलहाल अधिकांश देशों के लिए 10% अतिरिक्त टैरिफ लागू रखा गया, जिसकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो रही है।
निर्यातकों का मानना है कि इस तारीख के बाद अमेरिका नई टैरिफ नीति की घोषणा कर सकता है। यदि भारत पर अतिरिक्त 12.5% टैरिफ लगाया जाता है तो भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी खरीदार फिलहाल इंतजार के मूड में
भारतीय निर्यातकों के अनुसार, अमेरिका के कई खरीदार फिलहाल नए ऑर्डर देने में सावधानी बरत रहे हैं। उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले दिनों में भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर कितना टैरिफ लागू होगा।
इस अनिश्चितता के कारण कई सौदों में देरी हो रही है और कुछ कंपनियां नए ऑर्डर को फिलहाल रोककर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं।
प्रतिद्वंद्वी देशों पर भी रहेगी नजर
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पर भी समान या उससे अधिक टैरिफ लगाता है, तो भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बहुत अधिक प्रभावित नहीं होगी।
हालांकि यदि भारत पर अपेक्षाकृत अधिक टैरिफ लगाया गया, तो टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, केमिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और अन्य निर्यात आधारित उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है।
100% टैरिफ की भी उठी मांग
इस बीच अमेरिका के कुछ सांसदों ने रूस से तेल खरीद जारी रखने वाले देशों—जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं—पर 100% तक टैरिफ लगाने की सिफारिश की है। हालांकि यह केवल एक प्रस्ताव है और इस पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
विशेषज्ञों की राय
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि अमेरिका की टैरिफ नीति लगातार बदलती रहती है और इसमें काफी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में भारत को अमेरिका के साथ संतुलित और व्यावहारिक व्यापार नीति अपनानी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद चालू वर्ष में अमेरिका को भारत के निर्यात में लगभग 3% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
भारतीय उद्योगों पर क्या होगा असर?
यदि अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो सबसे अधिक असर उन क्षेत्रों पर पड़ सकता है जिनका बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। इससे निर्यात लागत बढ़ सकती है, मुनाफा घट सकता है और नए ऑर्डर मिलने की गति धीमी पड़ सकती है। वहीं यदि प्रतिस्पर्धी देशों पर भी समान या अधिक शुल्क लगाया जाता है, तो भारत को अपेक्षाकृत कम नुकसान होगा।


