नई दिल्ली: दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) अब सिर्फ खनिज नहीं, बल्कि रणनीतिक हथियार बन चुके हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यदि चीन रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा देता है, तो दुनिया भर में चीन के बाहर होने वाले डाउनस्ट्रीम उत्पादन (Downstream Production) को हर साल 6.5 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। यह नुकसान ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, पवन ऊर्जा, सैटेलाइट और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई महत्वपूर्ण उद्योगों को प्रभावित करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संभावित संकट से बचने के लिए देशों को मिलकर 11 हाई-रिस्क क्रिटिकल मिनरल्स का रणनीतिक भंडार (Strategic Stockpile) तैयार करना चाहिए और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को चीन पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए।
Highlights
- चीन के पूर्ण रेयर अर्थ निर्यात प्रतिबंध से वैश्विक उत्पादन को 6.5 ट्रिलियन डॉलर तक का खतरा।
- IEA ने 11 हाई-रिस्क क्रिटिकल मिनरल्स का रणनीतिक स्टॉक बनाने की सिफारिश की।
- शुरुआती खरीद के लिए 9.2 बिलियन डॉलर और सालाना लगभग 900 मिलियन डॉलर खर्च का अनुमान।
- सप्लाई चेन में विविधता को IEA ने “मिनरल सिक्योरिटी प्रीमियम” बताया।
- 2035 तक रेयर अर्थ रिफाइनिंग में चीन की हिस्सेदारी 90% से घटकर 70% तक आने की उम्मीद।
क्यों बढ़ गया है रेयर अर्थ मिनरल्स का महत्व?
रेयर अर्थ मिनरल्स आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों के मोटर, विंड टर्बाइन, स्मार्टफोन, कंप्यूटर चिप, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, सैटेलाइट, मेडिकल उपकरण और रक्षा तकनीकों में होता है।
दुनिया की अधिकांश रिफाइनिंग क्षमता फिलहाल चीन के पास है। यही वजह है कि यदि चीन निर्यात सीमित करता है, तो वैश्विक उद्योगों की सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ सकता है।
IEA ने क्यों जताई इतनी बड़ी चिंता?
IEA के मुताबिक, यदि चीन का निर्यात प्रतिबंध पूरी तरह लागू हो जाता है, तो चीन के बाहर स्थित मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों का बड़ा हिस्सा कच्चे माल की कमी से जूझेगा।
एजेंसी का अनुमान है कि केवल 9.2 बिलियन डॉलर के शुरुआती निवेश से महत्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक भंडार तैयार किया जा सकता है। इसके बाद इसे बनाए रखने के लिए हर साल लगभग 900 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, यह लागत संभावित 6.5 ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक नुकसान की तुलना में बेहद कम है।
IEA प्रमुख ने क्या कहा?
IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल ने कहा कि आज वैश्विक अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा हिस्सा बेहद कम मात्रा में उपलब्ध महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि सप्लाई चेन का अत्यधिक केंद्रीकरण वैश्विक अर्थव्यवस्था को असुरक्षित बनाता है। यदि विभिन्न देशों से खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है, तो शुरुआती लागत बढ़ सकती है, लेकिन यह भू-राजनीतिक जोखिमों के खिलाफ एक प्रकार का आर्थिक बीमा साबित होगा।
अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर से बढ़ी चिंता
पिछले वर्ष अमेरिका और चीन के बीच बढ़े व्यापारिक तनाव के दौरान रेयर अर्थ मिनरल्स सबसे बड़े रणनीतिक हथियारों में शामिल रहे।
चीन ने कई महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर प्रतिबंध और नियंत्रण लगाए, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस कंपनियों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
हालांकि इन खनिजों की लागत किसी उत्पाद की कुल लागत का छोटा हिस्सा होती है, लेकिन इनकी अनुपलब्धता पूरी मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया को रोक सकती है।
क्या है संकट से बचने का प्लान?
IEA ने रिपोर्ट में कई अहम सुझाव दिए हैं—
- 11 हाई-रिस्क क्रिटिकल मिनरल्स का रणनीतिक भंडार तैयार किया जाए।
- चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सप्लाई चेन का विविधीकरण किया जाए।
- नए खनन और रिफाइनिंग प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाया जाए।
- विभिन्न देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत की जाए।
- रीसाइक्लिंग और वैकल्पिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए।
चीन की हिस्सेदारी कैसे घट सकती है?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और मलेशिया में रेयर अर्थ रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे निवेश से चीन की वैश्विक हिस्सेदारी पहले ही 90% से घटकर लगभग 85% रह गई है।
यदि प्रस्तावित सभी परियोजनाएं समय पर शुरू हो जाती हैं, तो 2035 तक यह हिस्सेदारी लगभग 70% तक आ सकती है। हालांकि IEA ने यह भी कहा कि निकेल और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की रिफाइनिंग अब भी कुछ ही देशों में केंद्रित है, जिससे जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट?
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है। ऐसे में रेयर अर्थ मिनरल्स की स्थिर उपलब्धता देश की औद्योगिक रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को घरेलू खनन, प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, अफ्रीका और अन्य देशों के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करना होगा।
निष्कर्ष
IEA की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि रेयर अर्थ मिनरल्स केवल औद्योगिक संसाधन नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन का आधार बन चुके हैं। यदि दुनिया चीन पर अपनी निर्भरता कम नहीं करती, तो किसी भी बड़े निर्यात प्रतिबंध की स्थिति में वैश्विक उत्पादन, व्यापार और आर्थिक विकास को भारी झटका लग सकता है। ऐसे में रणनीतिक भंडारण, सप्लाई चेन का विविधीकरण और नए निवेश आने वाले वर्षों में देशों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।


