Lucknow Station Scam: लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे हजारों रुपये वसूलने का कथित मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ ऑटो चालक गलत स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों को निशाना बनाकर उन्हें ट्रेन पकड़वाने के नाम पर 3000 से 4000 रुपये तक मांगते थे। इतना ही नहीं, यात्रियों को यह भरोसा भी दिया जाता था कि आउटर सिग्नल पर खड़ी ट्रेन के दरवाजे खुलवाकर उन्हें उसमें बैठा दिया जाएगा।
मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल ऑटो को भी कब्जे में लिया है। शुरुआती जांच में इस पूरे मामले में एक संगठित गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई है।
यात्री को ट्रेन पकड़ाने के नाम पर मांगे 3000 रुपये
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला उस समय सामने आया जब एक यात्री को लखनऊ जंक्शन से देहरादून जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पकड़नी थी। यात्री गलती से लखनऊ जंक्शन के बजाय चारबाग स्थित लखनऊ रेलवे स्टेशन पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि प्लेटफॉर्म नंबर 6 और 7 के पास यात्री की मुलाकात ऑटो चालक नितिन राजपूत से हुई। आरोप है कि चालक ने यात्री को बताया कि ट्रेन जल्द ही रवाना होने वाली है और अगर वह 3000 रुपये देगा तो उसे आउटर सिग्नल के पास खड़ी ट्रेन तक पहुंचाकर उसमें चढ़ा दिया जाएगा।
यात्री कथित तौर पर ऑटो में बैठ गया। चालक उसे मवैया आउटर सिग्नल के पास ले गया, जहां ट्रेन लखनऊ जंक्शन से रवाना होने के बाद कुछ समय के लिए रुकी हुई थी।
ऑटोमैटिक दरवाजा खुलवाकर ट्रेन में चढ़ाने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर बात ट्रेन के ऑटोमैटिक दरवाजे को लेकर सामने आई है। आरोप है कि चालक ने ट्रेन के सेंसर वाले दरवाजे को खुलवाकर यात्री को ट्रेन के अंदर प्रवेश करा दिया।
चलती ट्रेन के परिचालन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस तरह किसी यात्री को आउटर से ट्रेन में चढ़ाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया गया कि ट्रेन में मौजूद यात्रियों ने भी इस तरीके पर आपत्ति जताई और मामले की जानकारी आरपीएफ को दी।
रेलवे परिसर और ट्रेन की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है।
सुबह 4 बजे से यात्रियों पर नजर रखने का आरोप
पूछताछ में कथित तौर पर यह जानकारी सामने आई कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहे थे। आरोप है कि चारबाग स्टेशन के आसपास एक गिरोह सक्रिय था, जो सुबह करीब 4 बजे से यात्रियों पर नजर रखना शुरू कर देता था।
गिरोह की नजर खास तौर पर उन यात्रियों पर रहती थी, जो लखनऊ जंक्शन की ट्रेन पकड़ने के लिए गलती से चारबाग स्टेशन पहुंच जाते थे।
ऐसे यात्रियों को जल्दबाजी और ट्रेन छूटने का डर दिखाकर कथित तौर पर महंगे किराए पर ऑटो में बैठाया जाता था।
इन ट्रेनों के यात्रियों को बनाया जाता था निशाना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरोह की नजर उन प्रमुख ट्रेनों के यात्रियों पर रहती थी जो लखनऊ जंक्शन से सुबह या दोपहर के समय रवाना होती हैं। इनमें देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस के अलावा एसी डबल डेकर, तेजस एक्सप्रेस, लखनऊ जंक्शन-काठगोदाम एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल बताई गई हैं।
आरोप है कि यात्रियों को यह कहकर डराया जाता था कि अगर वे तुरंत ऑटो में नहीं बैठे तो उनकी ट्रेन छूट जाएगी।
इसके बाद उनसे सामान्य किराए की तुलना में कई गुना ज्यादा रकम मांगी जाती थी।
मवैया आउटर पर ट्रेन के रुकने का उठाते थे फायदा
इस कथित ठगी के पीछे ट्रेन के मवैया आउटर सिग्नल पर रुकने की स्थिति का फायदा उठाने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ जंक्शन से निकलने के बाद कुछ ट्रेनें मवैया आउटर के पास पॉइंट बदलने की प्रक्रिया के दौरान कुछ मिनट रुकती हैं। आरोप है कि ऑटो चालक इसी जानकारी का इस्तेमाल कर यात्रियों को भरोसा दिलाते थे कि वे आउटर तक पहुंचाकर उन्हें ट्रेन में चढ़ा सकते हैं।
इसी के बदले यात्रियों से 3000 से 4000 रुपये तक की रकम वसूलने का आरोप है।
हालांकि, रेलवे यात्रियों को ऐसी किसी भी व्यवस्था पर भरोसा न करने की सलाह देता है। ट्रेन छूट जाने की स्थिति में निर्धारित रेलवे काउंटर, हेल्पलाइन या रेलवे कर्मचारियों से सहायता लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
पहले भी सामने आ चुका है मनमानी वसूली का मामला
चारबाग स्टेशन पर यात्रियों से कथित तौर पर मनमाना किराया वसूलने का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है।
पिछले साल 24 अगस्त को भी लखनऊ स्टेशन से लखनऊ जंक्शन तक की करीब एक किलोमीटर की दूरी के लिए एक डॉक्टर से कथित तौर पर 2000 रुपये वसूलने का मामला सामने आया था।
उस मामले के बाद भी ऑटो चालकों द्वारा यात्रियों से अधिक किराया वसूलने को लेकर सवाल उठे थे।
आरपीएफ ने दो आरोपियों को पकड़ा
ताजा मामले में आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए कथित गिरोह के मुख्य आरोपी ऑटो चालक नितिन राजपूत और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया है। घटना में इस्तेमाल ऑटो को भी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आरपीएफ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इसी तरीके से पहले भी यात्रियों को आउटर पर ट्रेनों में चढ़ाया गया और उनसे पैसे वसूले गए।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानी
अगर कोई यात्री गलती से गलत रेलवे स्टेशन पहुंच जाए और ट्रेन छूटने वाली हो, तो अनजान व्यक्ति या ऑटो चालक के ऐसे दावों पर भरोसा करने से बचना चाहिए। आउटर सिग्नल पर जाकर ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करना यात्री की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
ऐसी स्थिति में रेलवे स्टाफ से संपर्क करना और आधिकारिक माध्यम से अगली ट्रेन या यात्रा का विकल्प तलाशना सबसे सुरक्षित तरीका है।


