Direct vs Regular Mutual Fund: म्यूचुअल फंड की लगभग हर स्कीम में निवेशकों को Direct और Regular Plan का विकल्प मिलता है। दोनों प्लान एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं, लेकिन इनके खर्च, निवेश प्रक्रिया और लंबी अवधि के रिटर्न में अंतर होता है। Direct Plan में निवेशक सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी से निवेश करता है, जबकि Regular Plan में वह म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट के जरिए निवेश करता है। यही अंतर लंबे समय में आपके निवेश की वैल्यू पर असर डाल सकता है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल होता है कि Direct Plan चुनना बेहतर है या Regular Plan? पहली नजर में दोनों विकल्प लगभग एक जैसे लग सकते हैं, क्योंकि दोनों एक ही स्कीम के तहत निवेश करते हैं। लेकिन इनके बीच सबसे बड़ा अंतर लागत यानी Expense Ratio का होता है।
Direct Plan में डिस्ट्रीब्यूटर शामिल नहीं होता, इसलिए इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन का खर्च नहीं जुड़ता। दूसरी ओर, Regular Plan में निवेशक को डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए मिलने वाली सेवाओं के बदले अप्रत्यक्ष रूप से लागत चुकानी पड़ती है। इसी वजह से Direct Plan का Expense Ratio आमतौर पर Regular Plan की तुलना में कम होता है।
Direct Plan में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी
म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच Direct Plan की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। क्रिसिल इंटेलिजेंस ने एंफी (AMFI) के डेटा का विश्लेषण किया है, जिससे रिटेल निवेशकों के बीच Direct Plan की बढ़ती हिस्सेदारी का पता चलता है।
आंकड़ों के मुताबिक, रिटेल निवेशकों के म्यूचुअल फंड एसेट्स में Direct Plan की हिस्सेदारी मार्च 2021 में 21.4 फीसदी थी। मार्च 2026 तक यह बढ़कर 36.7 फीसदी हो गई। यानी पांच साल की अवधि में Direct Plan की हिस्सेदारी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है।
आसान भाषा में समझें तो मार्च 2021 में रिटेल म्यूचुअल फंड निवेश का करीब पांचवां हिस्सा Direct Plan के जरिए था। मार्च 2026 तक यह बढ़कर लगभग हर तीन में से एक निवेश तक पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब म्यूचुअल फंड की लागत और अपने निवेश पर पड़ने वाले खर्च को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक हो रहे हैं।
Direct और Regular Plan में क्या अंतर है?
म्यूचुअल फंड की किसी स्कीम का Direct और Regular Plan मूल रूप से एक ही फंड स्कीम और एक ही पोर्टफोलियो में निवेश कर सकता है। दोनों में निवेश का उद्देश्य भी समान होता है। मुख्य अंतर यह है कि निवेशक फंड हाउस तक कैसे पहुंचता है।
Direct Plan: इसमें निवेशक बिना किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट के सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी के माध्यम से निवेश करता है।
Regular Plan: इसमें निवेशक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर, एजेंट या अन्य मध्यस्थ के जरिए निवेश करता है। डिस्ट्रीब्यूटर निवेशक को स्कीम चुनने, निवेश प्रक्रिया और अन्य संबंधित सेवाओं में मदद कर सकता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि Direct और Regular Plan पूरी तरह अलग फंड हैं। आमतौर पर दोनों एक ही स्कीम के अलग-अलग प्लान होते हैं, लेकिन उनकी लागत अलग होती है।
Direct Plan का Expense Ratio कम क्यों होता है?
दोनों प्लान के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर Expense Ratio का है। Expense Ratio वह खर्च है जिसे म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने और मैनेज करने के लिए फंड के एसेट्स से लिया जाता है।
Direct Plan में डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता। इसलिए डिस्ट्रीब्यूटर को दिए जाने वाले कमीशन से जुड़ी लागत इसमें नहीं होती। इसके परिणामस्वरूप Direct Plan का Expense Ratio आमतौर पर Regular Plan से कम रहता है।
Regular Plan में डिस्ट्रीब्यूटर की भूमिका होती है। निवेशक को स्कीम की जानकारी देने और निवेश प्रक्रिया में मदद करने के बदले डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ी लागत फंड के खर्च में शामिल होती है। इसी वजह से Regular Plan का Expense Ratio अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
Expense Ratio का रिटर्न पर क्या असर पड़ता है?
यह अंतर छोटी अवधि में बहुत बड़ा नजर नहीं आता, लेकिन लंबी अवधि में इसका प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि म्यूचुअल फंड निवेश में मिलने वाला रिटर्न दोबारा निवेश होने पर कंपाउंडिंग का फायदा देता है।
अगर दो प्लान एक ही पोर्टफोलियो में निवेश कर रहे हैं, लेकिन एक प्लान का खर्च लगातार कम है, तो कम खर्च वाले प्लान में निवेश की नेट वैल्यू लंबे समय में ज्यादा हो सकती है।
यही कारण है कि एक ही स्कीम के Direct और Regular Plan के NAV में अंतर दिखाई दे सकता है। Direct Plan का कम Expense Ratio लंबे समय में निवेशक के लिए अतिरिक्त रिटर्न का कारण बन सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Direct Plan का रिटर्न हर परिस्थिति में निश्चित रूप से ज्यादा ही होगा; फंड के प्रदर्शन, खर्च और अन्य कारकों का असर भी पड़ता है।
मार्च 2026 में Direct Plan का AUM कितना था?
क्रिसिल इंटेलिजेंस के विश्लेषण के मुताबिक, मार्च 2026 में Direct Plan का AUM करीब 33.28 लाख करोड़ रुपये था। यह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एसेट्स का लगभग 45.1 फीसदी था।
मार्च 2021 में Direct Plan की कुल एसेट्स में हिस्सेदारी करीब 43.4 फीसदी थी। इस तरह पांच साल की अवधि में कुल म्यूचुअल फंड एसेट्स में Direct Plan की हिस्सेदारी भी बढ़ी है।
दूसरी ओर, Regular Plan की कुल एसेट्स में हिस्सेदारी इस अवधि में 56.6 फीसदी से घटकर 54.9 फीसदी हो गई। हालांकि, Regular Plan अभी भी म्यूचुअल फंड निवेश का एक बड़ा हिस्सा है।
मार्च 2026 में Regular Plan के जरिए निवेशित एसेट्स का आंकड़ा करीब 40.46 लाख करोड़ रुपये था। इससे साफ है कि Direct Plan तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन Regular Plan का इस्तेमाल करने वाले निवेशकों की संख्या और इसमें मौजूद एसेट्स अभी भी काफी बड़े हैं।
किस निवेशक के लिए Direct Plan बेहतर हो सकता है?
Direct Plan उन निवेशकों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो खुद रिसर्च कर सकते हैं और अपने म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेना चाहते हैं।
अगर आपको म्यूचुअल फंड की कैटेगरी, रिस्क, Expense Ratio, फंड का प्रदर्शन और अपने वित्तीय लक्ष्य समझ में आते हैं, तो Direct Plan की कम लागत आपके लिए फायदेमंद हो सकती है।
खासकर लंबी अवधि के निवेश में खर्च का अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है। निवेश की अवधि जितनी लंबी होती है, लागत में छोटा अंतर भी कंपाउंडिंग के कारण अंतिम कॉर्पस पर असर डाल सकता है।
Regular Plan किसके लिए उपयोगी हो सकता है?
हर निवेशक के लिए Direct Plan जरूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति म्यूचुअल फंड की स्कीम चुनने, पोर्टफोलियो की समीक्षा करने या अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निवेश तय करने में विशेषज्ञ की मदद चाहता है, तो Regular Plan उसके लिए सुविधाजनक हो सकता है।
Regular Plan में डिस्ट्रीब्यूटर निवेशक को स्कीम से जुड़ी जानकारी और निवेश प्रक्रिया में सहायता दे सकता है। नए निवेशकों या उन लोगों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है जो खुद लगातार फंड की निगरानी नहीं करना चाहते।
इसलिए केवल कम Expense Ratio देखकर यह तय नहीं करना चाहिए कि Direct Plan ही हर निवेशक के लिए सबसे अच्छा है। निवेशक को यह देखना चाहिए कि उसे सलाह और सहायता की कितनी जरूरत है।
Direct या Regular Plan चुनने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले सिर्फ Direct और Regular का नाम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए।
अगर आप खुद निवेश संबंधी फैसले लेने में सक्षम हैं और जरूरी रिसर्च कर सकते हैं, तो Direct Plan की कम लागत आपके लिए आकर्षक हो सकती है। वहीं, अगर आपको निवेश के फैसलों में पेशेवर सहायता की जरूरत है, तो Regular Plan की सुविधा आपके लिए ज्यादा उपयोगी हो सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि Direct Plan का कम Expense Ratio एक फायदा है, लेकिन सही म्यूचुअल फंड स्कीम का चयन, जोखिम और निवेश का लक्ष्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है। निवेश करने से पहले फंड के दस्तावेजों और खर्चों की जानकारी जरूर पढ़ें और जरूरत पड़ने पर SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लें।
निष्कर्ष
Direct और Regular दोनों प्लान का अपना महत्व है। Direct Plan में डिस्ट्रीब्यूटर की लागत नहीं होने के कारण Expense Ratio कम रहता है और इसी वजह से लंबी अवधि में इसका रिटर्न Regular Plan की तुलना में बेहतर हो सकता है। दूसरी तरफ, Regular Plan निवेशकों को डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है।
पिछले कुछ वर्षों में Direct Plan की बढ़ती हिस्सेदारी बताती है कि निवेशक अब लागत और रिटर्न के बीच के संबंध को ज्यादा गंभीरता से समझ रहे हैं। हालांकि, आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है, इसका फैसला आपकी जानकारी, निवेश अनुभव, वित्तीय लक्ष्य और सलाह की जरूरत पर निर्भर करता है।


