Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली है। अमेरिका की ओर से ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाए जाने के बावजूद बाजार में सप्लाई बाधित होने का जोखिम फिलहाल कम माना जा रहा है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी से ज्यादा गिरकर 90 डॉलर के स्तर के नीचे आ गया।
Crude Oil Prices Fall: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी से ज्यादा टूटकर करीब 89.25 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 3 फीसदी से अधिक गिरकर करीब 82.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल की कीमतों में यह गिरावट पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी को आगे बढ़ाती है। सोमवार को भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर बंद हुए थे। बाजार में निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली भी की है।
ईरान पर अमेरिका ने बढ़ाया आर्थिक दबाव
क्रूड ऑयल में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को और मजबूत करने का फैसला माना जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ाने के लिए नई पाबंदियों का ऐलान किया।
अमेरिका ने दूसरे देशों से भी ईरान के साथ कारोबारी संबंधों पर पुनर्विचार करने को कहा है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों को अमेरिकी डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, इन प्रतिबंधों के दायरे और उनके लागू होने की समयसीमा को लेकर तत्काल कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। इससे बाजार में यह धारणा बनी कि अमेरिकी कदम फिलहाल सीधे सैन्य टकराव की दिशा में नहीं बढ़ रहा है।
सैन्य टकराव का खतरा कम होने से तेल पर दबाव
सैक्सो बैंक के कमोडिटी स्ट्रैटेजी प्रमुख ओले हैनसेन के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव में सैन्य टकराव की जगह आर्थिक दबाव पर ज्यादा जोर दिए जाने से तेल बाजार की कुछ चिंताएं कम हुई हैं।
बाजार की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर मध्य पूर्व से होने वाली तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। लेकिन फिलहाल ऐसा कोई बड़ा व्यवधान सामने नहीं आया है। इसी कारण निवेशकों ने तेल की कीमतों में शामिल जोखिम प्रीमियम को कम करना शुरू कर दिया है।
हालांकि, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने यह भी कहा है कि ईरान के खिलाफ सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है। ऐसे में बाजार अभी भी मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा जोखिम
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बावजूद सप्लाई को लेकर खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासतौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।
दुनिया में इस्तेमाल होने वाले तेल का करीब पांचवां हिस्सा इस अहम समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
KCM के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वॉटरर ने भी संकेत दिया कि ईरान के पास शिपिंग गतिविधियों को प्रभावित करने की क्षमता है। इसलिए तेल की कीमतों में कुछ जोखिम प्रीमियम अभी भी बना हुआ है।
शिपिंग आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सामान ले जाने वाले केवल दो टैंकर गुजरे। मई की शुरुआत के बाद यह एक दिन में गुजरने वाले टैंकरों की सबसे कम संख्या बताई गई।
तेल टैंकर पर हमले की खबर से बढ़ी चिंता
क्षेत्रीय तनाव के बीच यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने मंगलवार को एक तेल टैंकर के खराब होने की जानकारी दी। बताया गया कि टैंकर ओमान के अश शिशाह से करीब 9 नॉटिकल मील यानी लगभग 16.7 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में किसी अज्ञात वस्तु से टकराने के बाद रुक गया।
ऐसी घटनाएं तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है। अगर हमलों या सुरक्षा जोखिमों की संख्या बढ़ती है तो शिपिंग लागत के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
रूस की रिफाइनरी पर ड्रोन हमले का भी असर
तेल बाजार में एक अन्य घटनाक्रम रूस से जुड़ा रहा। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, रूस के दक्षिणी रोस्तोव इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमले के कारण नोवोशाख्तिंस्क तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा और वहां कामकाज रोकना पड़ा।
रिफाइनरी पर हमले से क्षेत्रीय पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बनी है। हालांकि, वैश्विक बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया अभी मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े सप्लाई जोखिमों पर अधिक केंद्रित है।
आगे क्या रहेगा क्रूड का रुख?
फिलहाल बाजार का फोकस इस बात पर है कि ईरान से जुड़े तनाव का वास्तविक तेल सप्लाई पर कितना असर पड़ता है। अमेरिका की नई पाबंदियों के बावजूद अगर मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई सामान्य बनी रहती है तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
इसके उलट, अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है या ईरान की ओर से तेल शिपमेंट को प्रभावित करने वाला कोई बड़ा कदम उठाया जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है।
इसलिए आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति, टैंकरों की आवाजाही और वैश्विक तेल सप्लाई क्रूड ऑयल की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में लगातार गिरावट भारत के लिए राहत देने वाली हो सकती है। इससे तेल आयात का खर्च कम होने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घटने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के भाव से तय नहीं होतीं। इनमें रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, टैक्स, रिफाइनिंग लागत और अन्य स्थानीय कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता होने का असर भारतीय उपभोक्ताओं तक तुरंत और उसी अनुपात में पहुंचे, यह जरूरी नहीं है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में कमोडिटी बाजार से जुड़ी जानकारी और विश्लेषण दिए गए हैं। इसे निवेश की सलाह न समझें। कमोडिटी या किसी अन्य वित्तीय साधन में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


