भारत अपनी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को नई दिशा देने की तैयारी कर रहा है। देश में अब बुलेट ट्रेन के लिए विदेशी सिग्नलिंग सिस्टम पर निर्भरता कम करने और अपना स्वदेशी हाई-स्पीड रेल कंट्रोल सिस्टम विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। भारतीय रेलवे भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) नाम से एक नया सिग्नलिंग प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है, जिसे भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा।
देश में बुलेट ट्रेन का पहला कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) परियोजना के तहत बनाया जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जिनमें दिल्ली-बनारस जैसे महत्वपूर्ण रूट भी शामिल हैं। इन सभी कॉरिडोर में भविष्य में स्वदेशी BTCS सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
7,000 किलोमीटर के बुलेट ट्रेन नेटवर्क में होगा इस्तेमाल
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, भारत में प्रस्तावित नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर करीब 7,000 किलोमीटर लंबे होंगे। इन परियोजनाओं में BTCS का इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत को यूरोप और जापान जैसे देशों की सिग्नलिंग तकनीक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत हाई-स्पीड रेल के लिए अपना कंट्रोल प्रोटोकॉल विकसित करेगा। यह सिस्टम मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना से मिले अनुभव के आधार पर तैयार किया जा रहा है।
क्या है भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS)?
भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम एक स्वदेशी हाई-स्पीड रेल सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल तकनीक होगी। इसका उद्देश्य तेज रफ्तार ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।
इस सिस्टम की खासियतें:
- भारतीय रेलवे की जरूरतों के अनुसार डिजाइन किया जाएगा
- कम लागत में लागू किया जा सकेगा
- ओपन-सोर्स तकनीक पर आधारित होगा
- घरेलू कंपनियों और उपकरण निर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा
- भविष्य में दूसरे देशों को भी एक्सपोर्ट किया जा सकता है
रेलवे का मानना है कि स्वदेशी सिग्नलिंग सिस्टम विकसित होने से हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं की लागत कम होगी और निर्माण की रफ्तार भी बढ़ेगी।
अभी मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर में इस्तेमाल हो रहा ETCS सिस्टम
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में अभी विदेशी तकनीक आधारित यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) लेवल-2 लगाया जा रहा है।
इस परियोजना के लिए नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने करीब 4,100 करोड़ रुपये का सिग्नलिंग सिस्टम कॉन्ट्रैक्ट दिनेशचंद्र आर अग्रवाल इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड और जर्मनी की कंपनी Siemens के कंसोर्टियम को दिया था।
ETCS लेवल-2 सिस्टम को करीब 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल में भी है ETCS लेवल-2
देश में हाई-स्पीड ट्रेन कंट्रोल तकनीक का इस्तेमाल पहले से भी हो रहा है। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर में ETCS लेवल-2 सिग्नलिंग सिस्टम लगाया गया है।
इस कॉरिडोर पर चलने वाली नमो भारत ट्रेन के लिए यह सिस्टम लगाया गया है, जिसे फ्रांस की कंपनी Alstom ने विकसित किया है।
जापान की टेक्नोलॉजी पर क्यों उठा सवाल?
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की भूमिका काफी अहम रही है। जापान इस प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय मदद और तकनीकी सहयोग दे रहा है।
हालांकि, हाल ही में जापान के पूर्व मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भारत जापान के डिजिटल ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम के बजाय ओपन-सोर्स सिग्नलिंग प्रोटोकॉल की ओर बढ़ रहा है।
इसके बाद भारतीय रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जापानी कंपनियों की ट्रेनें ETCS सिस्टम के साथ भी काम कर सकती हैं। अगर जापानी सप्लायर उचित प्रस्ताव देते हैं, तो भारत भविष्य में जापानी तकनीक पर भी विचार कर सकता है।
दिल्ली से बनारस तक बुलेट ट्रेन का सपना
सरकार ने जिन सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है, उनमें कई बड़े शहरों को जोड़ने की योजना है। दिल्ली-बनारस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी इन्हीं महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश के प्रमुख आर्थिक और धार्मिक शहरों के बीच यात्रा का समय कम करना है। बुलेट ट्रेन नेटवर्क तैयार होने के बाद दिल्ली, वाराणसी, मुंबई, अहमदाबाद जैसे शहरों के बीच तेज और आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।
भारत के लिए क्यों अहम है स्वदेशी सिग्नलिंग सिस्टम?
हाई-स्पीड रेल में सिग्नलिंग सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक होता है। ट्रेन की गति, ब्रेकिंग, ट्रैक की स्थिति और सुरक्षा सभी इसी सिस्टम पर निर्भर करते हैं।
BTCS विकसित होने के बाद:
- भारत हाई-स्पीड रेल तकनीक में आत्मनिर्भर बनेगा
- विदेशी कंपनियों पर खर्च कम होगा
- घरेलू रेलवे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
- भविष्य में भारत इस तकनीक को दूसरे देशों को बेच सकेगा
भारत अब सिर्फ बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि इसके लिए जरूरी तकनीक को भी खुद विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


