Old Monk Ban: महाराष्ट्र में लोकप्रिय रम ब्रांड ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे चुनौती देने वाली कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। कंपनी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवरोज सीरवाई ने अदालत के सामने तीन संशोधित प्रोडक्ट लेबल पेश किए। इन लेबल के जरिए कंपनी ने विवाद को सुलझाने की दिशा में संभावित समाधान का प्रस्ताव रखा है। अब मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर 2026 को होगी।
कंपनी ने कोर्ट के सामने पेश किए तीन नए लेबल
सुनवाई के दौरान ओल्ड मॉन्क बनाने वाली कंपनी ने अपने उत्पादों के तीन संशोधित लेबल अदालत के समक्ष रखे। कंपनी की ओर से कहा गया कि ये लेबल किसी भी कानूनी अधिकार को छोड़े बिना संभावित समाधान तलाशने के उद्देश्य से पेश किए गए हैं।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित पक्ष इन नए लेबल को स्वीकार करते हैं तो वह आवश्यक बदलाव करने के लिए तैयार है। वहीं, यदि इन पर आपत्ति होती है तो कंपनी इन्हें वापस लेने का विकल्प भी रखती है।
केंद्र सरकार और FSSAI की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इन संशोधित लेबल पर निर्देश लेने के लिए अदालत से समय मांगा। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को अर्जेंट सप्लीमेंट्री बोर्ड में निर्धारित कर दी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत क्यों नहीं दी?
कंपनी ने अदालत से मांग की थी कि FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए और अंतिम फैसला आने तक महाराष्ट्र में उसकी रम की बिक्री की अनुमति दी जाए।
हालांकि, कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत का मानना था कि इस स्तर पर कंपनी को बिक्री की अनुमति देना लगभग उसे अंतिम राहत देने के समान होगा।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि दोनों पक्ष मामले के अंतिम निपटारे से जुड़े मुद्दों पर पहले ही विस्तृत दलीलें पेश कर रहे हैं। ऐसे में अंतरिम चरण में बिक्री की अनुमति देना उचित नहीं माना गया।
इस फैसले के बाद महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर लगी मौजूदा रोक फिलहाल प्रभावी रहेगी।
आखिर क्यों लगी ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर रोक?
यह पूरा विवाद FSSAI की ओर से कंपनी के महाराष्ट्र स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के निरीक्षण के बाद शुरू हुआ। कंपनी का प्लांट खोपोली, रायगढ़ में स्थित है।
निरीक्षण के दौरान FSSAI ने उत्पाद की लेबलिंग को लेकर आपत्ति जताई। खाद्य नियामक के अनुसार, कंपनी के उत्पाद में बाहरी रम फ्लेवरिंग का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन पैकेजिंग पर इसे स्पष्ट तौर पर ‘फ्लेवर्ड रम’ के रूप में घोषित नहीं किया गया था।
इसी लेबलिंग को लेकर नियामक ने कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र में संबंधित उत्पाद की बिक्री पर रोक लगा दी।
कंपनी के लिए क्यों अहम है कोर्ट का फैसला?
ओल्ड मॉन्क देश के चर्चित रम ब्रांड्स में शामिल है और महाराष्ट्र उसके महत्वपूर्ण बाजारों में से एक है। ऐसे में बिक्री पर रोक का सीधा असर कंपनी के कारोबार पर पड़ सकता है।
कंपनी की ओर से संशोधित लेबल पेश किया जाना इस बात का संकेत है कि वह नियामकीय आपत्ति को दूर करने का रास्ता तलाश रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि FSSAI और केंद्र सरकार इन नए लेबल को स्वीकार करते हैं या नहीं।
अब 8 सितंबर 2026 की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। उस दिन अदालत के सामने संशोधित लेबल को लेकर संबंधित पक्षों का रुख स्पष्ट हो सकता है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
फिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट ने ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर लगी रोक हटाने का आदेश नहीं दिया है। यानी महाराष्ट्र में कंपनी को तत्काल बिक्री शुरू करने की अनुमति नहीं मिली है।
अब कंपनी की ओर से पेश किए गए तीन संशोधित लेबल पर केंद्र सरकार और FSSAI के जवाब के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी। 8 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट इस मुद्दे पर आगे विचार करेगा।


