भारत ने वैश्विक व्यापार के सबसे अहम लेकिन अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले सेक्टर में बड़ा कदम उठाया है। दशकों से स्टील शिपिंग कंटेनरों के लिए चीन पर निर्भर रहने वाला भारत अब खुद वैश्विक मानकों के EXIM (एक्सपोर्ट-इंपोर्ट) कंटेनर बनाने लगा है। यह सिर्फ एक औद्योगिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सप्लाई चेन सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और वैश्विक व्यापार में भारत की नई रणनीतिक सोच का संकेत भी है।
चीन का कंटेनर कारोबार पर दशकों से दबदबा
दुनिया में इस्तेमाल होने वाले करीब 90-97% स्टील शिपिंग कंटेनरों का निर्माण चीन में होता है। इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल्स और कृषि उत्पादों सहित अधिकांश अंतरराष्ट्रीय व्यापार इन्हीं कंटेनरों के जरिए होता है।
भारत भी लंबे समय तक अपनी जरूरत के लगभग सभी कंटेनरों के लिए चीन पर निर्भर रहा। इससे देश के पास न तो मजबूत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बन पाया और न ही इस रणनीतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल हो सकी।
कोरोना महामारी ने सिखाया महंगा सबक
कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई। कई देशों में कंटेनरों की भारी कमी हो गई, जिससे भारतीय निर्यातकों को समय पर कंटेनर नहीं मिल सके।
इसके परिणामस्वरूप—
- फ्रेट चार्ज कई गुना बढ़ गए।
- निर्यात में देरी हुई।
- सप्लाई चेन बाधित हुई।
- चीन पर अत्यधिक निर्भरता का जोखिम सामने आया।
यहीं से भारत सरकार ने कंटेनर निर्माण को रणनीतिक महत्व देना शुरू किया।
सरकार ने शुरू की 10,000 करोड़ रुपये की योजना
घरेलू कंटेनर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बजट में 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम की घोषणा की।
इस योजना के तहत—
- नई फैक्ट्रियों को पूंजीगत सहायता मिलेगी।
- मौजूदा यूनिटों के विस्तार को समर्थन मिलेगा।
- उत्पादन लागत कम करने के लिए ऑपरेशनल सहायता दी जाएगी।
- रिसर्च, टेस्टिंग, स्किल डेवलपमेंट और नई तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य केवल कंटेनर बनाना नहीं, बल्कि पूरा घरेलू सप्लाई चेन इकोसिस्टम विकसित करना है।
भारत ने लॉन्च किया पहला ग्लोबल EXIM कंटेनर
भारत ने हाल ही में अपना पहला वैश्विक मानकों वाला EXIM शिपिंग कंटेनर पेश किया है।
इस उपलब्धि में वैश्विक शिपिंग कंपनी AP Moller-Maersk और DCM Shriram Group की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों कंपनियों ने मिलकर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप कंटेनर विकसित किए।
डेनमार्क की तकनीकी टीमों और स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियों ने भारतीय फैक्ट्री का निरीक्षण किया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के दादरी में तैयार कंटेनरों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप माना गया।
Maersk का ऑर्डर बना बड़ा भरोसा
भारत में बने कंटेनरों पर भरोसा जताते हुए Maersk ने 1,000 अतिरिक्त कंटेनरों का ऑर्डर दिया है।
यह ऑर्डर इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि—
- भारतीय कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन का अवसर मिलेगा।
- उत्पादन लागत घटाने में मदद मिलेगी।
- अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा।
- भविष्य में और वैश्विक ऑर्डर मिलने की संभावना मजबूत होगी।
चीन से मुकाबला अभी आसान नहीं
हालांकि भारत ने शुरुआत कर दी है, लेकिन चीन को चुनौती देना आसान नहीं होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार—
- भारत में कंटेनर निर्माण की लागत फिलहाल चीन से 30-40% अधिक है।
- प्रति कंटेनर लागत लगभग 700 से 1,000 डॉलर तक ज्यादा पड़ सकती है।
- चीन के पास विशाल ऑटोमेटेड फैक्ट्रियां, मजबूत सप्लाई चेन और बड़े पैमाने पर उत्पादन का लाभ है।
भारत को प्रतिस्पर्धी बनने के लिए उत्पादन बढ़ाने, ऑटोमेशन अपनाने और लागत कम करने पर तेजी से काम करना होगा।
अर्थव्यवस्था को मिलेंगे कई बड़े फायदे
घरेलू कंटेनर निर्माण केवल आयात कम करने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कई अन्य उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इनमें शामिल हैं—
- स्टील उद्योग
- फैब्रिकेशन
- वेल्डिंग
- पेंट और कोटिंग
- लॉजिस्टिक्स सेवाएं
- कंटेनर कंपोनेंट निर्माण
- बंदरगाह और समुद्री अवसंरचना
सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह सेक्टर हजारों करोड़ रुपये का बाजार और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में कंटेनरों जैसी बुनियादी जरूरत के लिए किसी एक देश पर निर्भर रहना रणनीतिक जोखिम माना जा रहा है।
घरेलू कंटेनर निर्माण से—
- सप्लाई चेन मजबूत होगी।
- आयात पर निर्भरता घटेगी।
- निर्यातकों को समय पर कंटेनर उपलब्ध होंगे।
- वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
- समुद्री और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
भारत ने कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में अभी केवल पहला कदम उठाया है, जबकि चीन दशकों की बढ़त के साथ इस उद्योग का निर्विवाद नेता बना हुआ है। फिर भी भारत का पहला वैश्विक स्तर पर प्रमाणित EXIM कंटेनर यह संकेत देता है कि देश अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। यदि सरकार की नीतियां, उद्योग का निवेश और वैश्विक ऑर्डर लगातार बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में भी दुनिया का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।


